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संपादकीय

कच्चे सूत से बँधी पक्की डोर है रक्षाबन्धन

August 26, 2015 09:57 PM

एक हिन्दू त्यौहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। रक्षाबंधन भाई बहनों का वह त्योहार है तो मुख्यत हिन्दुओं में प्रचलित है  पर इसे भारत सभी धर्मों के लोग समान उत्साह और भाव से मनाते हैं। पूरे भारत में इस दिन का माहौल देखने लायक होता है और हो भी क्यूं ना, यही तो एक ऐसा विशेष दिन है जो भाई-बहनों के  रक्षाबंधन पर्व पर जहाँ बहनों को भाइयों की कलाई में रक्षा का धागा बाँधने का बेसब्री से इंतजार है, वहीं दूर-दराज बसे भाइयों को भी इस बात का इंतजार है कि उनकी बहना उन्हें राखी भेजे। उन भाइयों को निराश होने की जरूरत नहीं है, जिनकी अपनी सगी बहन नहीं है, क्योंकि मुँहबोली बहनों से राखी बंधवाने की परंपरा भी काफी पुरानी है। रक्षाबंधन सिर्फ त्योहार नहीं एक भाई का धर्म है बहन की रक्षा करना फिर वह किसी भी परिस्थितियों में क्यों ना हो? राखी एक रेशम का धागा ही तो होता है लेकिन यह एक ऐसा धागा होता है जो बहन पर आई हर मुसीबत में रक्षा करने की याद दिलाता है। राखी का त्योहार कब शुरू हुआ यह कोई नहीं जानता। लेकिन भविष्य पुराण में वर्णन मिलता है कि देव और दानवों में जब युद्ध शुरू हुआ तब दानव हावी होते नज़र आने लगे। भगवान इन्द्र घबरा कर बृहस्पति के पास गये। वहां बैठी इन्द्र की पत्नी इंद्राणी सब सुन रही थी। उन्होंने रेशम का धागा मन्त्रों की शक्ति से पवित्र करके अपने पति के हाथ पर बाँध दिया। संयोग से वह श्रावण पूर्णिमा का दिन था। लोगों का विश्वास है कि इन्द्र इस लड़ाई में इसी धागे की मन्त्र शक्ति से ही विजयी हुए थे। उसी दिन से श्रावण पूर्णिमा के दिन यह धागा बाँधने की प्रथा चली आ रही है। यह धागा धन,शक्ति, हर्ष और विजय देने में पूरी तरह समर्थ माना जाता है। त्योहार मनाना सभी को अच्छा लगता है पर क्या करें? सभी की यही चाहत होती है कि वे भी बाजारों के अनुरूप सजे सामानों से अपने घर का हर त्योहार मना सकें। लेकिन यह हर मध्यमवर्गीय परिवार के लिए मुमकिन नहीं होता है। आदमी चाहता तो बहुत कुछ लेकिन कर कुछ नहीं पाता क्योंकि दिनोंदिन बढ़ती महँगाई से लोगों का जीना दुर्लभ हो गया है। और ऐसे में जब त्योहार आ जाते है तो मानो ऐसा लगता है जैसे आपके सिर पर तलवार लटक रही हो। इस बढ़ती महँगाई के दौर में बच्चों और परिवार की कई बातों को नजरअंदाज करना पड़ता है। भाई-बहन के प्यार का साक्षी रक्षाबंधन का त्योहार भी एक ऐसा ही त्योहार है, जिसमें उपहार और प्यार दोनों साथ-साथ चलते हैं। आखिर यह रिश्ता ही हक का रिश्ता होता है, जिसमें किसी उपहार के लिए औपचारिकतावश पूछा नहीं जाता बल्कि हक से माँगा और दिया जाता है। उपहारों के दाम इस त्योहार की मिठास को कम नहीं कर सकती | इस राखी पे कुछ खास प्लान करे अपनी प्यारी बहन को उनकी पसंद का तोहफा दे के उन्हें सरप्राइज दे के इस पवित्र दिन को यादगार बनाये हैप्पी राखी टू आल ब्रदर्स एंड सिस्टर्स |                                                                                - सरोज नेहा वर्मा, चंडीगढ़

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