ENGLISH HINDI Thursday, April 02, 2020
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
मरकज की तब्लीगी जमात से लौटे छह नागरिकों की पहचान: डीसी सोशल डिस्टेंसिंग से ही बचा जा सकता है कोरोना सेनेतागिरी चमका रहे राजसी नेताओं पर नहीं कसा जा रहा शिकंजाकोविड-19 से लड़ने में युद्ध स्तर पर जुटे सीएसआईआर के वैज्ञानिकराष्ट्रपति करेंगे राज्यपालों, लेफ्टिनेंट गवर्नरों एवं राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेश प्रशासकों के साथ कोविड-19 पर चर्चादेश के 410 जिलों में कराया गया राष्‍ट्रीय कोरोना सर्वेक्षण जारीलक्ष्य ज्योतिष संस्थान ने जरूरतमन्द लोगों में भोजन बांटालॉक डाउन: डोर टू डोर गार्बेज कलेक्टर यूनियन ने प्रधानमंत्री को समस्याओं और मांगों से ट्वीट कर करवाया अवगत
कविताएँ

दोष किस का

February 10, 2017 03:51 PM

तकनीक ने उंगलियों को

चलना तो सिखा दिया

लेकिन

अधर सबके अब मूक हो गए

तकनीक को दोष दें भी तो कैसें

वो तो बराबर सब बांटती है सर्वोसर

शायद

अपनाने वाले ही बे—ख़बर हो गए

अपनों को भूल कर

चुन लिया एक पहलू

और

बस! मग्न हो गए!

 

धरा और आकाश में

अंतर बड़ा है

उसके बीच में समाया

खालीपन घना है

अपनों की दूरियों को पाटने में लाते

यदि

तकनीक

तो

मैं भी छोटा न रहता

और मानता

तुम भी संमुदर की तरह

विशाल हो गए।

और कह दूं

कुछ तो

बुरा तो मानो गे ही

ये विदित है मुझे

पर

तुम विशाल होकर खारे हो गए

और

हम

तालाब रह कर

भी

मीठे जल से

प्यास बुझाने के काबिल हो गए।

जिसे तुम अब तक मेरी

बस!

कमजोरी ही भांपते रहे

दरअसल

है तो हम

अब भी

विशाल ही

लेकिन

अहसास होने लगा है

कि

तालाब होकर प्यास से

तृप्ति देने की

भूल कर ली

तो

ये मत समझो

कि

हम तुम्हारे दास हो गए हैं

हम

कंलदर हैं

अपनी मन मर्जी के

और

रहें गें

मत प्रयास करो

अपने सांचे में

ढालने का

पढना है तो

पढ लो अभी हमें

वर्ना

मत बातें करना कि

हम बिन बताए चले गए।

— रोशन

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें