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संत सान्निध्य से विकसित होती है भला करने की प्रवृति

March 02, 2017 04:26 PM

अबोहर, फेस2न्यूज ब्यूरो:
बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के 6वें अध्यात्मिक मुखिया पूज्य महंत स्वामी महाराज ने कहा है कि भगवान के भक्ति रस में डूबने से सभी दुख दर्द दूर हो जाते हैं।
पंजाब में प्रथम स्वामीनारायण मंदिर जालंधर के सूर्य एन्कलेव में निर्माण के फलस्वरूप आयोजित 4 दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की अंतिम सभा को संबोधन करते हुए उन्होनें कहा कि संत के माध्यम से ही विवेक आता है। संत के साथ की गई वार्ता सत्संग के समान है। संतो के सान्निध्य से कुछ भला करने की प्रवृति विकसित होती है। शास्त्रों में लिखा है कि एक मंदिर के निर्माण से ब्रह्मांड का जीवन बढ जाता है। मंदिर में शुभ भावना से जाने वाले व्यक्ति का जीवन अवश्य सुधरता है।
सभा के शुभारंभ में युवा कलाकारों ने ‘मंदिर ईश्वर की पहचान’ पावे शांति जहां इंसान’ शीर्षक सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद वंदना नृत्य प्रस्तुत किया गया। जब युवाओं ने पंजाब का सुप्रसिद्ध लोक-नृत्य भंगड़ा प्रस्तुत किया तो पंडाल में बैठे हजारों दर्शकों के हाथों से हुई करतल ध्वनि ने वातावरण गुंजाएमान कर दिया।
स्वामी अक्षरवत्सल द्वारा बाखूबी संचालित इस कार्यक्रम में देश विदेश के 125 संतों के अलावा प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व केन्द्रीय मंत्री विजय सांपला, पूर्व मंत्री तीक्षण सूद व मनोरंजन कालिया तथा पूर्व सांसद महेन्द्र सिंह के पी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। सभा से पूर्व महंत स्वामी जी ने नवनिर्मित मंदिर में भगवान स्वामीनारायण, अक्षरब्रह्मा गुणातीतानंद स्वामी, श्री राधाकृष्ण, श्रीराम सीता हनुमान तथा शिव-पार्वती व गणेश की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित कीं। उन्होंनें पांच धातुओं से निर्मित नीलकण्ठवर्णी की प्रतिमा पर अभिषेक भी किया।
सभा को संबोधन करते हुए अक्षरधाम गांधीनगर के प्रभारी पूज्य आनंदस्वरूप स्वामी ने मंदिरों का महत्व बताते हुए कहा कि इनसे जीवन रूपांतरण हो जाता है। भौतिक पदार्थ क्षणिक सुख भले ही दें लेकिन जीवन में शांति प्रदान नहीं करते। भगवान में श्रद्धा मंदिर से प्रकट होती है।   


4 दशकों तक विश्ववंदनीय संत प्रमुखस्वामी जी महाराज के साथ विचरण करने वाले पूज्य विवेक सागर स्वामी ने कहा कि देश विदेश में अब तक विभिन्न संस्थाओं द्वारा 35लाख मंदिरों का निर्माण हो चुका है। मंदिर शांतिधाम है, इनसे धर्म व संस्कृति की रक्षा होती है।
बीएपीएस संस्था के संयोजक पूज्य ईश्वरचंद स्वामी ने कहा कि भगवान सर्वकर्ता-हर्ता हैं। प्रमुखस्वामी जी महाराज 1200 मंदिरों व 3 अक्षरधामों की स्थापना के बावजूद सदैव यही कहा करते थे कि सभी कार्य भगवान करते हैं। हम तो निमित बनकर सेवा कर रहे हैं। भगवान की मूर्ति के दर्शन करने से समग्र शरीर में भगवान की दिव्य चेतना प्रसारित होती है।
मंचासीन वरिष्ठ संतों का अक्षरधाम दिल्ली के कोठारी स्वामी मुनिवत्सल ने पुष्प मालाओं द्वारा अभिनंदन किया। संतों ने प्रमाणिक दस्तावेजों के हवाले से कहा कि महाराजा रण्जीत सिंह ने 200 वर्ष पूर्व भगवान स्वामीनारायण से पंजाब में आध्यात्मिकता के प्रसार हेतू आग्रह किया था। एक हरिभक्त सुभाष अग्रवाल ने बताया कि 1970 में जब प्रमुख स्वामी जी महाराज जालंधर आए, तब उनसे यहां मंदिर निर्माण की प्रार्थना की गई थी। वह स्वपन अब जाकर साकार हुआ है। उल्लेखनीय है कि जालंधर स्थित मंदिर के लिए मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा विधि सारंगपुर तीर्थधाम में 18 जुलाई 2015 को प्रमुखस्वामी जी महाराज के कर कमलों से संपन्न हुई थी। चार दिवसीय समारोह के दौरान संतो के नेतृत्व में शोभायात्रा भी निकाली गई।

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