ENGLISH HINDI Friday, November 24, 2017
Follow us on
ताज़ा ख़बरें
हाथी को छोड़ हाथ का साथ, निगम चुनाव से पहले बहुजन समाज पार्टी को झटका, युवा नेता और अन्य पंजाब कांग्रेस में शामिलहरियाणा सरकार ने तुरंत प्रभाव से 42 पुलिस उप-अधीक्षकों (डीएसपी) के स्थानांतरण एवं नियुक्ति आदेश जारी कियेमोरनी में मिले तीन बच्चों के शव, पिता ही निकला हत्यारा, पंचकुला पुलिस ने किया अरेस्टपद्मावती , मीडिया संपर्क प्रमुख को कारण बताओ नोटिसरूपाणी के चुनाव प्रचार जिम्मेदारी संभालेंगे भाजपा प्रदेश मीडिया प्रमुखमैं तो मेवात का हमसफर हूं : राव इंद्रजीत "पढ़ेगी महिला तो बढ़ेगी महिला, महिला पतंजलि योग समिति ने किया महिला सशक्तिकरण दिवस का आयोजन भगवान श्री सत्य साईं बाबा के 92 वें जन्मदिन समारोह के अवसर पर बहुधर्मी एवं वेद समारोह आयोजन 20 से 21 नवंबर तक होगा
व्यापार

केन्द्र सरकार को सौंपे गये एआइओसीडी के ज्ञापन में दवाईयों की ऑनलाइन बिक्री के खिलाफ सख्त आपत्ति जताई गई

March 05, 2017 08:46 PM

चंडीगढ - दवाईयों की ऑनलाइन बिक्री का नेटवर्क समूचे देश में फैल रहा है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (एआइओसीडी) के प्रेसिडेंट श्री जगन्नाथ शिंदे ने यह प्रश्न उठाया कि आखिर सरकार नागरिकों के स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों को नजरअंदाज क्यों कर रही है?इससे संबंधित निर्णय संवेदनशीलता के साथ विचार-विमर्श करने के बाद लिये जाने चाहिए। क्या देशमें ऐसी आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो गयी है कि दवाईयों की ऑनलाइन बिक्री को तुरंत शुरु किया जाना अनिवार्य हो गया है? ई-फार्मेसी से संबंधित केन्द्र द्वारा तैयार किए गए दिशा-निर्देश पर आपत्ति जताते हुए एआइओसीडी ने केन्द्रीय स्वास्थ्य  मंत्रालय के उपसचिव श्री के. एल. शर्मा को एक बिंदु-वार ज्ञापन सुपुर्द किया है। 

पूरी संवेदनशीलता के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही स्वास्थ्यसंबंधी निर्णय लिए जाने चाहिए - जगन्नाथ शिंदे, प्रेसिडेंट,एआइओसीडी

 

दवाईयों की ऑनलाइन बिक्री को केवल छूट के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इस संदर्भमें दीर्घकालिक दृष्टि से ग्राहकों के वापस न मिल सकने योग्य अधिकारों एवं सुरक्षा को भी ध्यान मेंरखा जाना आवश्यक है। वास्तव में केन्द्र सरकार ने औषधि विक्रेताओं के लाभ को निर्धारित करदिया है और अब अतिरिक्त छूट पर दवाईयों की बिक्री इनकी गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगाती है।यह स्पर्धा 8 लाख दवा विक्रेताओं की गरिमा और अस्तित्व के साथ खिलवाड़ है एवं असंगत होने केसाथ ही साथ प्रश्नों के दायरे में आती है। 

एआइओसीडी ने यह ज्ञापन दिल्ली में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव को प्रदान किया, जिसमेंदवाईयों की बिक्री के व्यवसाय की सच्चाई एवं कमियों को इंगित किया गया है। कमेटी ने इस बातको पुख्ता तरीके से रखा कि डीसीजीआइ में केवल विनियामक निकायों के प्रतिनिधि ही नहीं होनेचाहिए, बल्कि इसमें व्यवसाय के सभी वर्गों को शामिल किया जाना चाहिए। केन्द्र सरकार के प्रारुपमें ऑनलाइन तौर पर दवाईयों की बिक्री के लिए नए केंद्रीय प्राधिकरण का प्रस्ताव किया गया है,जोकि प्राधिकरण के विकेन्द्रीकरण के सिद्धांतों के विरुद्ध है।  

देश के ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च योग्यता-संपन्न चिकित्सकों के अभाव के साथ समुचित स्वास्थ्यसेवाओं की भी काफी कमी है, इसलिए केन्द्र सरकार को विनियामकीय प्रणाली को मजबूत करने परअपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जो फिलहाल कमजोर स्थिति में है। दवाईयों की गुणवत्ता की जांचके लिए प्रयोगशाला, आइटी सेंटर, लॉ यूनिट की व्यवस्था करने जैसे विभिन्न बिंदुओं के साथ ज्ञापनको सुपुर्द किया गया। 

हालांकि केन्द्र सरकार सभी स्थानों पर दवाईयों को उपलब्ध कराने की इच्छुक है, लेकिन उसके इसप्रारुप में ड्रग माफिया, युवाओं में मादक द्रव्यों की लत, ग्राहकों के हित, एचआइवी रोगियों केसामाजिक हित, खरीदारों की स्वास्थ्य संबंधी सुरक्षा, इत्यादि जैसे मुद्दों को शामिल किया जानाआवश्यक है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट के प्रेसिडेंट श्री जगन्नाथ शिंदे नेस्पष्ट रुप से यह मांग की कि 1940 के ड्रग एंड कॉस्मेटिक ऐक्ट अथवा नियम 45 में प्रस्तावितसंशोधन तथा दवाईयों की ऑनलाइन बिक्री की अनुमति को तब तक रोक कर रखना चाहिए, जबतक कि केन्द्र सरकार द्वारा प्रस्तुत इस प्रारुप में संशोधन नहीं किया जाता तथा एआइओसीडी द्वारा उठाई गयी आपत्तियों पर सकारात्मक समाधान का निर्णय नहीं लिया जाता। 

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें