ENGLISH HINDI Sunday, February 18, 2018
Follow us on
ताज़ा ख़बरें
प्रापर्टी डीलर ने एक प्लाट को 2 अलग-अलग टुकड़ों में बांटा, और फिर एमसी ने कर दिए नक्शे पास..जीरकपुर : दस्तावेज पूरे तो तीस दिन में नक्शा चकाचककुकरमुत्तों की तरह डेराबस्सी और जीरकपुर में बनी अवैध कलोनियां एनओसी के बिना रजिस्ट्री पर रोक का निकाला हलपावरकॉम ने बकायेदारों से वसूली के लिए कसी कमर, काटे जाएंगे कनेक्शनकोई भी अपना सकता हैं छतबीड़ जू के जानवर, पौने तीन लाख में हाथी, दो लाख में शेरयुनाईटड जर्नलिस्ट एसोसिएश्न ने किया पत्रकारों का सम्मान चोरों ने मोबाइलों की दुकान पर किया हाथ साफ़, घटना कैमरे में कैदचैलेंज : अगर सुखबीर मुझे शिकस्त दे दें तो मैं राजनीती से सन्यास ले लूंगा: नवजोत सिंह सिद्धु
कविताएँ

मदहाेशी

March 15, 2017 02:35 PM

— शिखा शर्मा
पीली-पीली सरसाें के लहराते खेत
हरे चनाें से लदा पाैधा हर एक
रंग-बिरगीं फसलाें का नजारा देख
बिन नशे मदहाेश करते है

गांव की गाेरियाें री पायल की झनकार
गागर से गिरती पानी की बाैछार
मुड़-मुड़ उनका पीछे देखना साै बार
बिन नशे मदहाेश करते हैं

मिट्टी के चूल्हे में जलती आग
पतीले में पकता सरसाें का साग
मक्की की राेटी और मक्खन का स्वाद
बिन नशे मदहाेश करते हैं

गांव किनारे वो खेल का मैदान
सांझ में शरारत करते बच्चे और जवान
मिट्टी से सना तालियां बजाता नन्हा नादान
बिन नशे मदहाेश करते हैं

पतली सी गलियां, बड़े-बड़े घर
सुस्वागतम से सजे दहलीज—औ—दर
भजन-कीर्तन के सुनते ऊंचे-ऊंचे स्वर
बिन नशे मदहाेश करते हैं।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें