ENGLISH HINDI Wednesday, July 15, 2020
Follow us on
 
कविताएँ

जश्न—ए—मौत

March 23, 2017 11:16 AM

— शिखा शर्मा
क्यों न जश्न मनाऊं
फांसी पर चढ़ जाने का
सौभाग्य मिला है मुझको
मां भारती को आजाद कराने का
जंजीरों में घुटती मां को
देखूं ऐसा मैं लाल नहीं
बोटी-बोटी भी हो जाए
उसका कोई मलाल नहीं
किस काम की ये जवानी जो
देश काम में न आए
गुलामी की जंजीरों में जकड़ी माँ
और हम आराम फरमाए?
समय नहीं अब छुप कर
हथियार चलाने का
वक्त हो गया बम फोड़कर
बहरों को सुनाने का
अलख जगा कर आजादी की अब
हिंद आजाद कराना है
राजगुरू और सुखदेव से मिलकर
क्रांति की जोत जगाना है
आंदाेलन तैयार कर
इंकलाब जिंदाबाद बुलाएंगे
मस्तानाें की टाेली अब
रंग दे बंसती गाएगें
भूख प्यास काे तज कर
अंग्रेजी हूकूमत से आजादी दिलाएंगें
फांसी का फंदा तैयार कर लाे
तीन दीवाने हंसते-हंसते
फांसी पर झूलने आएंगें

— Shikha Sharma

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें