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हिमाचल प्रदेश

डिजिटल भुगतान को देश में बढ़ावा देने के लिए कैट ने किया गोलमेज सम्मेलन

April 06, 2017 09:49 AM

शिमला, (विजयेन्दर शर्मा) देश में नकद रहित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के सन्दर्भ में कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स ने आज नई दिल्ली में एक गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली से आग्रह किया है की डिजिटल भुगतान द्वारा किये गए लेन-देन पर बैंक अथवा अन्य संस्थानों द्वारा किसी भी प्रकार का ट्रांसक्शन शुल्क नहीं लिया जाए और सरकार बैंको को ट्रांसक्शन शुल्क की भरपाई सीधे तौर पर करे !
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बी.सी.भरतिया ने कहा की डिजिटल भुगतान को अपनाने में ट्रांसक्शन शुल्क एक बहुत बड़ी बाधा है और इसको बढ़ावा दिए जाने के तौर पर उपभोक्ता अथवा व्यापारियों से कोई भी ट्रांसक्शन शुल्क न लिया जाए ! एक कदम आगे बढ़ाते हुए कैट ने यह भी शुझाव दिया है की नकद के चलन को कम करने के लिए सरकार एटीएम से धन निकालने पर एक न्यूनतम सरचार्ज लगाये जिससे एटीएम से अनावश्यक रूप से नकद निकलने पर रोक लगे ! उधर दूसरी ओर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सरकार एक समग्र इंसेंटिव स्कीम घोषित करे जिसके अन्तर्गत डिजिटल भुगतान के प्रत्येक तरीके जिसमें सभी प्रकार के डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड सहित पोस मशीन, मोबाइल पोस, मोबाइल वॉलेट, मोबाइल एप्लीकेशन, क्यू आर कोड, यूपीआई, आधार आधारित पेमेंट एप्लीकेशन आदि को इंसेंटिव स्कीम में शामिल किया जाए !
कैट ने कहा की केंद्र सरकार ने अगस्त 2015 में देश में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को बढ़ावा देने के लिए एक कैबिनेट नोट तैयार किया था जिसमें व्यवसायिओं ओर उपभोक्ताओं को कर में रियायतें ओर अन्य लाभकारी प्रस्ताव थे! कैट ने आग्रह किया है की सरकार उक्त कैबिनेट नोट को स्वीकार कर नकदरहित अर्थव्यवस्था के लिए एक माहौल तैयार करे !
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल ने यू इस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट की भारत में भुगतान की स्थिति पर जारी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा की 97 % रिटेल ट्रांज़ैक्शन नकद में होती है वहीँ 11 % उपभोक्ता डेबिट कार्ड का उपयोग खरीदारी के लिए करते हैं एवं केवल 6 % व्यावसायी ही इलेक्ट्रॉनिक भुगतान स्वीकार करते हैं ! रिपोर्ट में यह भी कहा गया है की 82 % उपभोक्ता मोबाइल के द्वारा भुगतान किये जाने के प्रति अनभिज्ञ है वहीँ 79 % उपभोक्ता ऑनलाइन बैंकिंग के बारे में जानते ही नहीं हैं ! लगभग 89 % व्यवसायी डेबिट कार्ड का उपयोग करने की इच्छा रखते हैं ! क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के विषय में लोगो को जानकारी ही नहीं है इसी वजह से देश में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान बेहद कम होता है !
कैट ने कहा की सरकार पूरे तौर पर शत प्रतिशत ई गवर्नेंस की ओर बढ़ रही हैं ओर ऐसे में व्यापारियों ओर उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के बारे में शिक्षित करने की जरूरत है क्योंकि देश भर में अभी तक इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के प्रति रूझान बेहद कम है ! ज्यादा से ज्यादा लोगों को खरीददारी करते समय डेबिट/क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने ओर व्यापारियों को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से व्यापार करने की ओर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ! इस हेतु कर में रियायत देना ओर अनेक लाभ देने से दोनों वर्ग प्रोत्साहित होंगे ! देश में 95 % डेबिट कार्ड एटीएम मशीन से नकद निकलवाने के काम में आते हैं ओर इसीलिए कैट ने सरकार से आग्रह किया है की एटीएम से नकद निकलवाने पर 0 .5 प्रतिशत का न्यूनतम सरचार्ज लगाया जाना चाहिए !
भारत मुख्यत: एक नकद आधारित अर्थव्यवस्था है जिसमें लगभग 70 हजार करोड़ रुपये के व्यक्तिगत उपभोग खर्च में से केवल 5 % खर्च ही कार्ड भुगतान से होता है ! देश में लगभग 5 करोड़ डेबिट कार्ड है लेकिन फिर भी नकद भुगतान बेहद मजबूत है क्योंकि अधिकांशत : कार्ड एटीएम से पैसा निकलवाने के उपयोग में लिए जाते हैं ! देश में 10 बार कार्ड के उपयोग में से केवल एक बार ही कार्ड कुछ खरीदने के लिए इस्तेमाल होता है ! भारत में करेंसी का जी डीपी में अनुपात सबसे ज्यादा 12 .5 % है जबकि रूस में यह 11 .9 %, ब्राज़ील में 4 .1 % एवं मेक्सिको में 5 .7 % प्रतिशत है !कार्ड से भुगतान की अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगिता तभी है जब कार्ड नकद निकलवाने के बजाय सामान खरीदने के लिए ज्यादा इस्तेमाल हो ओर तभी यह खरीद की श्रंखला में लगे लोगों के लिए ज्यादा लाभदायक होगा !
कैट ने यह भी सुझाव दिया है की देश में डिजिटल भुगतान को सही तरीके से लागू करने के लिए एक डिजिटल पेमेंट प्रमोशन बोर्ड का गठन किया जाए जिसमें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अलावा व्यापारियों ओर उपभोक्ताओं के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए वहीँ दूसरी ओर वट्टल कमेटी की सिफारिशों के अनुरूप एक स्वतंत्र डिजिटल पेमेंट नियामक बोर्ड भी बनाया जाए ओर रूपए कार्ड को संचालित करने के लिए अलग से एक अथॉरिटी का गठन किया जाए ! डिजिटल भुगतान व्यवस्था में नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी और माइक्रो फाइनेंस इंस्टिट्यूशंस को भी शामिल किया जाए !

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