ENGLISH HINDI Tuesday, June 25, 2019
Follow us on
ताज़ा ख़बरें
विजिलेंस जांच के चलते कई अफसर नदारद, चौथे दिन भी हुई पूछताछ, हाईप्रेाफाइल मामले पर एआईजी ने कहा, जांच जारी पंजाब में गतका खेल गतिविधियों में और तेज़ी लाई जायेगी: लिबड़ाडॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस भाजपा ने श्रद्धांजलि दी डडू माजरा में जानवर जलाने के प्लांट के प्रस्ताव के विरोध में रोष प्रदर्शन, मेयर का पुतला जलायासीवरेज ओवरफ्लो की बदबू से लोग बेहाल, कोई सुनवाई नहींअवैध निर्माणों से जीरकपुर लगातार बन रहा है अर्बन स्लमजीजा के साथ बलटाना का युवक बुलेट पर काजा घूमने निकला पहाड़ से बोल्डर गिरा, दोनों की मौके पर मौतहाई—वे किनारे मनमर्जी की पार्किंग, हादसों को न्यौंता
कविताएँ

फलसफा-ए-जिन्दगी

May 18, 2017 02:49 PM

रिश्तों को हमने बिठाया था

अपनी कश्ती में,
और
फिर कश्ती का बोझ कह कर,
हमें ही उतारा गया...
जिंदगी तो बे—वफा है
फिर भी
उसी का गीत गाया गया।
सांसे हैं पल—पल घट रही
फिर भी
जन्मदिन मना कर
उसी का जश्न मनाया गया
जिसने भेजा है धरा पर
उसका गुणगान पलभर भी नहीं
बस!
चका चौंध रोशनियों का
बखान सुनाया गया।
मौत महबूब है
मगर
उसको सदा भुलाया गया।

— रोशन

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें