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अंतर्राष्ट्रीय

चीन की योजना पाकिस्तान में बनाएगा सैन्य अड्डा

June 09, 2017 12:49 PM

बीजिंग:  

चीन ने ऐसी खतरनाक चाल चली है कि इसे भारत के लिए एक गंभीर खतरा माना जा रहा है। 

विशेषज्ञों की मानें तो चीन ने इस कदम से भारत की सामरिक शक्ति को चुनौती दी है।

विश्व में अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए इन दिनों चीन जहां एक ओर स्वयं को आर्थिक शक्ति के रूप में पेश कर रहा है वहीं दूसरी ओर एशिया में अपना सैन्य दखल भी बढ़ाता जा रहा है। चीन इन दिनों विश्व की सबसे बड़ी शक्ति बनने की दिशा में कार्य कर रहा है और अपने इस सपने को पूरा करने के लिए भारत और अमेरिका को सबसे बड़ा अवरोध मानता है। एशिया क्षेत्र में चीन को भारत से सर्वाधिक चुनौती मिलती रही है जिसके कारण दोनों देशों के बीच सीमा और क्षेत्र विवाद को लेकर भी तनातनी बनी रहती है। लेकिन अब चीन ने ऐसी खतरनाक चाल चली है कि इसे भारत के लिए एक गंभीर खतरा माना जा रहा है। पाकिस्तान से चीन तक इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के बाद अब चीन पाकिस्तान में अपना एक सैनिक अड्डा बनाने की योजना बना रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय ‘पेंटागन’ की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है। विशेषज्ञों की मानें तो चीन ने इस कदम से भारत की सामरिक शक्ति को चुनौती दी है।

इसके पहले से ही चीन हिंद महासागर के कई देशों में बंदरगाह निर्माण के नाम पर घुसपैठ कर रहा है। इस योजना के तहत चीन भारत को जमीन और समुद्र में घेरने का हर संभव प्रयास करने में लगा है। इससे भारत के सामने सीमा सुरक्षा का खतरा पैदा हो सकता है। 

उल्लेखनीय है कि चीन अफ्रीकी देश जिबूती में पहले ही अपना एक सैन्य ठिकाना बना चुका है। पेंटागन ने इस संबंध में अमेरिकी कांग्रेस में 97 पेज की रिपोर्ट पेश की है। इसमें कहा गया कि 2016 में चीनी सेना का बजट 180 अरब डॉलर के पार जा चुका है। जबकि चीन का अनुशंसित बजट 140 अरब डॉलर है।
अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक यदि चीन, पाकिस्तान में सैन्य अड्डा बनाता है तो फिर इससे भारत की मुश्किलें ज्यादा बढ़ जाएंगी। इसके पहले वो अफ्रीकी देश जिबूती में भी यही कर चुका है। खास बात ये है कि जिबूती हिंद महासागर और लाल सागर के काफी नजदीक है।
दरअसल, चीन एक खास तरह की नीति पर काम कर रहा है। इसे ङ्क्षस्टग ऑफ पल्र्स (मोतियों की माला) पॉलिसी कहते हैं। पाकिस्तान का ग्वादर, मालदीव का मारो, श्रीलंका का हम्बनटोटा, बंगलादेश का चटगांव, म्यांमार का सित्तबय और थाईलैंड के क्रॉनहर पोर्ट का विस्तार उसकी इसी योजना का हिस्सा है।


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