ENGLISH HINDI Tuesday, June 25, 2019
Follow us on
ताज़ा ख़बरें
विजिलेंस जांच के चलते कई अफसर नदारद, चौथे दिन भी हुई पूछताछ, हाईप्रेाफाइल मामले पर एआईजी ने कहा, जांच जारी पंजाब में गतका खेल गतिविधियों में और तेज़ी लाई जायेगी: लिबड़ाडॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस भाजपा ने श्रद्धांजलि दी डडू माजरा में जानवर जलाने के प्लांट के प्रस्ताव के विरोध में रोष प्रदर्शन, मेयर का पुतला जलायासीवरेज ओवरफ्लो की बदबू से लोग बेहाल, कोई सुनवाई नहींअवैध निर्माणों से जीरकपुर लगातार बन रहा है अर्बन स्लमजीजा के साथ बलटाना का युवक बुलेट पर काजा घूमने निकला पहाड़ से बोल्डर गिरा, दोनों की मौके पर मौतहाई—वे किनारे मनमर्जी की पार्किंग, हादसों को न्यौंता
कविताएँ

आशीष के पुष्प

August 02, 2017 04:40 PM

हे हंस वाहिनी विद्या दायिनी

तेरे चरणों में है कोटि नमन
आशीष के पुष्प जब—जब बरसे
तब—तब पुलकित होता है ये मन
सेवा कर सकूं मां तेरी
वीणावादिनी ये रहमत कर
रहे तेरी ही सुध—बुध
भूलूं सारी दुनियां भूलूं जन
पुत्र हूं मां वीणापाणि तेरा
रखना सिर पर हाथ
स्वर भी तेरे शब्द भी तेरे
मां शारदे शब्द पथ को संवार
लेखनी में धार दे
चित्त में चेतना को आकार दे
शुद्ध रहे तन और मन
हे हंस वाहिनी विद्या दायिनी
तेरे चरणों में है कोटि नमन
— रोशन

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें