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स्मार्टफोन और इन्टरनेट के कॉम्बिनेशन का जानलेवा वार

August 04, 2017 08:31 PM

— शिखा शर्मा
खुले मैदान में खेलने वाले खेल सिमट रहे है, वहीं कमरे की बंद चार दीवारी में हजारों ऐसे खेल इन्टरनेट पर उपलब्ध है जिन्हें खेलने के लिए आज की जेनरेशन बहुत ज्यादा दिलचस्पी के साथ खेलती है. स्मार्टफोन और इन्टरनेट का कॉम्बिनेशन स्मार्टनेस तो बढ़ाता है लेकिन जिस तरह जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने पर हर चीज़ नुक्सान देती है, ठीक उसी तरह स्मार्टफोन और इन्टरनेट भी परेशानी का सबब बनता जा रहा है. खासकर टीनएजेर्स के अभिभावकों के लिए यह एक बड़ी मुसीबत बनती जा रही है. उन्हें यह तक मालूम नहीं कि उनका बच्चा इन्टरनेट पर क्या खोज रहा है या किस तरह से उसका उपयोग या दुरुपयोग कर रहा है. आए दिन इन्टरनेट और सोशल मीडिया से जुड़ी हिंसा, हत्या और उसके दुरूपयोग की खबरें तो मिलती रहती है लेकिन इस बार का मामला थोड़ा गंभीर है. गंभीर होने के साथ-साथ यह भारत में घटित होने वाला कथित पहला मामला है जो अभिभावकों का डर बढ़ा रहा है.    


मुम्बई के अँधेरी ईस्ट में 14 साल के बच्चे ने 6 मंजिला इमारत से छलांग लगा ली, महज इन्टरनेट पर एक गेम के टास्क को पूरा करने के लिए. घटना हैरान करने वाली है लेकिन बहुत विचारणीय है कि गेम में ऐसा क्या था कि गेम खेलते-खेलते बच्चे को सुसाईड करने की सूझी. हालांकि बच्चे के परिजन इस बात से इनकार कर रहे है लेकिन बच्चे के कुछ दोस्तों के मुताबिक वह कई दिनों से इन्टरनेट पर “ब्लू व्हेल” नाम की एक गेम खेल रहा था. छलांग लगाने से पहले बच्चे ने अपने दोस्तों को व्हाट्सएप्प पर छत की ऊंचाई की फोटो भी भेजी थी. यहां तक कि बच्चे ने सोमवार को स्कूल न आने की बात भी कही थी. “ब्लू व्हेल” के ज़िक्र होने के बाद उस गेम का काफी विचारणीय और खौफनाक सच सामने आया. सबसे पहले यह गेम न तो प्ले स्टोर पर मिलता है और न ही किसी साईट पर. आज की जेनरेशन सबसे ज्यादा सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती है और गेम बनाने वाले ने भी बिना दिमाग पर ज़ोर डाले इन्हीं एप्प का सहारा लिया. फेसबुक, इन्स्टाग्राम और व्हाट्सएप्प जैसी सोशल एप्प के जरिए बच्चे इसका निशाना बनते हैं. इस गेम के कुल 50 टास्क है, पहले पड़ाव से लेकर और अंतिम पड़ाव तक खतरों से भरे और जानलेवा टास्क है जिनमें तेजधार वाले ब्लेड से अपनी बाजू की नस काटना, होंठ काटना, चाकू से बाजू पर ब्लू व्हेल का चित्र उकेरना, सुबह 4 बजे उठकर डरावनी फ़िल्में देखना, मौत को उकसाने
वाला म्यूजिक सुनना और अंतिम यानि 50वें पढ़ाव में ऊंची इमारत से छलांग लगाना शामिल हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि हर एक टास्क को पूरा करने का सबूत फोटो के तौर पर एडमिन को भेजना होता है और ऐसा न करने पर प्लेयर को धमकी दी जाती है कि आपके पूरे परिवार की जानकारी उनके पास है अगर आपने यह सब नहीं किया तो आपके परिवार को जान से मार दिया जाएगा.
यह सब सामने आने के बाद यह तो तय है कि इस गेम को बनाने का सीधा उदेश्य मौत के लिए उकसाना है. यह बात गेम बनाने वाले ने स्वयं भी स्वीकार की है. रूस के 21 वर्षीय फिलिप बुड़ेकिन ने साल 2013 में इस गेम को इजाद किया था और यह भी कहा है कि यह गेम उसने उन लोगों के लिए बनाई है जो जीना नहीं चाहते. इस गेम के खतरनाक टास्क को खेलते-खेलते प्लेयर के दिमाग से मौत के डर को भगाया जाता है जिसके बाद प्लेयर को ऊंची से ऊंची बिल्डिंग से छलांग लगाने पर डर नहीं लगता. भारत में इस तरह मौत का यह कथित पहला मामला है लेकिन रूस में अब तक 130 बच्चे इस गेम के भंवर के फंस कर अपनी जान गंवा चुके है जबकि पहला ब्लू व्हेल गेम सुसाईड केस 2015 में सामने आया था. हालांकि उसके बाद फिलिप बुड़ेकिन को पुलिस ने हिरासत में लिया और उस पर केस चलाया गया.
अगर मुम्बई में बच्चे ने इसी गेम के टास्क को पूरा करने के लिए सुसाईड किया है तो यह साफ़ जाहिर होता है कि एडमिन अभी भी इस गेम का संचालन कर रहा है. भले ही फिलिप को लेकर केस चल रहा हो लेकिन दुःखद तो यह है कि इस गेम की वजह से इतनी मौतें होने के बावजूद व इतना समय बीत जाने के बाद भी सोशल मीडिया से क्यों नहीं हटाया गया?
इन्टरनेट यूज़ करने वाले बच्चों की रोजाना गतिविधियों में होने वाले बदलाव को अनदेखा न करें. इसका मतलब यह नहीं कि अभिभावक हर वक्त निगरानी करते रहे या फिर इन्टरनेट को यूज़ ही न करने दें. ऐसा करने से बच्चों का चिडचिडापन और चोरी छिपे इन्टरनेट यूज़ करने जैसी और परेशानियां बढ़ सकती है. किशोरावस्था में बच्चों का जिद्द करना स्वाभाविक है लेकिन अगर उन्हें प्यार और बुद्धिमानी से समझाया जाए तो शायद इस तरह की परेशानियां कम हो सकती है. साथ ही इस तरह मौत को उकसाने वाली गेम बनाने वालों के खिलाफ भी कड़ी सज़ा का प्रावधान होना चाहिए.

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