ENGLISH HINDI Tuesday, June 18, 2019
Follow us on
कविताएँ

पवित्र अग्नि

August 06, 2017 04:27 PM

— रोशन
जीवन भी देती
विध्वंश भी मचाती
पर सदा ही रही पवित्र
ये अग्नि
सीनों में जले
तो है जलाती
जलती है जब चूल्हों में
तो
पेट की क्षुब्दा है मिटाती
उद्र में जले तो जठराग्नि कहलाती
ये अग्नि
जन्म से होकर शुरू
अंत समय तक
साथ है निभाती
और अपने
आलिंगन में अपनाती
ये अग्नि
अग्नि से ही यज्ञ
अग्नि से पाणिग्रह
अग्नि से जीवन यापन
अग्नि से है अंतिम संस्कार
पल—पल जो साथ दे
उसमें बड़ा गहरा है राज
बस! इसकी समझ
बहुत कम को है आती
अर्थ की लगी हो तो
कल्याणकारी हो जाती
और
व्यर्थ की जहां भी लगी
विध्वंशकारी होकर
अपना रौद्र रूप
है दिखाती
ये अग्नि...

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें