ENGLISH HINDI Thursday, April 02, 2020
Follow us on
 
ताज़ा ख़बरें
मरकज की तब्लीगी जमात से लौटे छह नागरिकों की पहचान: डीसी सोशल डिस्टेंसिंग से ही बचा जा सकता है कोरोना सेनेतागिरी चमका रहे राजसी नेताओं पर नहीं कसा जा रहा शिकंजाकोविड-19 से लड़ने में युद्ध स्तर पर जुटे सीएसआईआर के वैज्ञानिकराष्ट्रपति करेंगे राज्यपालों, लेफ्टिनेंट गवर्नरों एवं राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेश प्रशासकों के साथ कोविड-19 पर चर्चादेश के 410 जिलों में कराया गया राष्‍ट्रीय कोरोना सर्वेक्षण जारीलक्ष्य ज्योतिष संस्थान ने जरूरतमन्द लोगों में भोजन बांटालॉक डाउन: डोर टू डोर गार्बेज कलेक्टर यूनियन ने प्रधानमंत्री को समस्याओं और मांगों से ट्वीट कर करवाया अवगत
कविताएँ

पवित्र अग्नि

August 06, 2017 04:27 PM

— रोशन
जीवन भी देती
विध्वंश भी मचाती
पर सदा ही रही पवित्र
ये अग्नि
सीनों में जले
तो है जलाती
जलती है जब चूल्हों में
तो
पेट की क्षुब्दा है मिटाती
उद्र में जले तो जठराग्नि कहलाती
ये अग्नि
जन्म से होकर शुरू
अंत समय तक
साथ है निभाती
और अपने
आलिंगन में अपनाती
ये अग्नि
अग्नि से ही यज्ञ
अग्नि से पाणिग्रह
अग्नि से जीवन यापन
अग्नि से है अंतिम संस्कार
पल—पल जो साथ दे
उसमें बड़ा गहरा है राज
बस! इसकी समझ
बहुत कम को है आती
अर्थ की लगी हो तो
कल्याणकारी हो जाती
और
व्यर्थ की जहां भी लगी
विध्वंशकारी होकर
अपना रौद्र रूप
है दिखाती
ये अग्नि...

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें