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धर्म

गहरे पानी पैठ से ही आनन्द की प्राप्ति: राज वासुदेव सिंह

August 21, 2017 03:47 PM

चण्डीगढ़, फेस2न्यूज:
जिसप्रकार समुन्द्र में जो गोताखोर मेहनत करके जितना गहराई में जाते हैं वे ही उसमें से उतने हीरे—मोती लेकर आते हैं उसी प्रकार इन्सान भी जितना परमात्मा की गहराई में जाता है वह उतना ही तन—मन—धन के सुखों के साथ—साथ आनन्द को भी प्राप्त करता है। ये उद्गार यहां दिल्ली से आए सन्त निरंकारी मण्डल प्रचार विभाग के इन्चार्ज श्रीमति राज वासुदेव सिंह ने सैक्टर 30 में स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन में हुए विशाल सत्संग समारोह में उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने धार्मिक ग्रन्थों का हवाला देते हुए कहा कि आनन्द किसी धन—दौलत, विद्या या किसी अन्य कला आदि से प्राप्त नही किया जा सकता, इसे प्राप्त करने का आदि काल से केवल एक ही तरीका रहा है वह है सत्गुरू की शरण में जाकर ब्रह्मज्ञान प्राप्त करना और यह केवल मानुष जन्म में ही प्राप्त किया जा सकता है क्योंकि इस धरती पर रहने वाला हर इन्सान दो तरह का जीवन जी सकता है एक सांसारिक और दूसरा अध्यात्मिक जीवन, जबकि पशु.पक्षी केवल सांसारिक जीवन ही जी पाते हैं। इसी कारण केवल मानुष योनि में ही अवसर मिलता है। परमपिता परमात्मा जो उसका निज घर है जहां उसकी आत्मा ने इस शरीर को छोड़ने के बाद जाना है, की जानकारी हासिल कर ले अन्यथा उसके लिए मायारूपी संसार में जीवन यात्रा को आनन्दमयी तरीके से तय करने के साथ—साथ अन्त समय में मोक्षद्वार में प्रवेश करना भी असंभव हो जाता है।

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