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हिमाचल प्रदेश

हिमाचल: बिजली घंटों गायब, जेई का जवाब- बिजली नहीं तो इन्वर्टर लगा लो

September 08, 2017 04:08 PM

हमीरपुर, फेस2न्यूज:
सरकार के नुमाईदे यानि सरकारी अधिकारी या कर्मी जनता की सेवा के लिए चयनित किए जाते हैं. सेवा के बदले इन्हें वेतन व अन्य भत्ते भी भरपूर दिया जाते है, जो इसी जनता का ही पैसा होता है। लेकिन जब जनता मदद के लिए गुहार लगाती है तब इनके भाव सातवें आसमान पर चढ़ जाते हैं. ये कोई नई बात नहीं हैं. हर रोज किसी न किसी काम को लेकर इनसे पाला पड़ जाता है. जब तक इनसे कोई सरोकार न रखो तब तक ये कुर्सी पर आनंद फरमाएंगे जैसे ही किसी ने शिकायत की या मदद मांगी जाती है तब ये झल्ला जाते हैं, अपना आपा खो बैठते हैं आम आदमी व उपभोक्ता पर अपनी ही हेंकड़ी डालते हैं.
ऐसा ही कुछ सरकारी रौब दिखा हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में. हमीरपुर जिले के गांव हरसन में शिकायतकर्ता ने 18001808060 पर फ़ोन करके बिजली के रोज लग रहे लम्बे-लम्बे कट को लेकर जानकारी और समाधान के बारे में जानकारी लेनी चाही. टोल फ्री नम्बर पर कॉल करने पर एग्ज़क्यूटिव ने सीधी बात वहां के जेई से करवा दी. शिकायतकर्ता ने शिकायत की कि पिछले 7 दिनों से बिजली 3 से 4 घंटे गुल रहती है इसका कारण बताए और कब तक बिजली की समस्या रहेगी तथा कब तक इसका हल हो जाएगा.
शिकायतकर्ता ने ये भी बताया कि ये ग्रामीण क्षेत्र है यहां लोग शिकायत करने में अपना वक्त जाया करना अच्छा नहीं समझते लेकिन मरीज होने के कारण उन्हें मजबूरन फ़ोन करना पड़ रहा है. बिजली न होने के कारण बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही है. इस पर जेई कहते है कि बिजली का ट्रांसफोर्मर जल गया। जब शिकायतकर्ता ने पिछले 7-8 दिनों से लग रहे कट के बारे में पूछा तो जेई भड़क गए और भड़कते हुए बोल उठे कि “बिजली नहीं तो इन्वर्टर लगा लो”.
इसका मतलब जब भी बिजली जाती है तो उसे समय पर ठीक करने की जिम्मेदारी बिजली विभाग नहीं लेता. आम जनता अपने-अपने घरों में इन्वर्टर लगा लें. जब उन्हें फुर्सत होगी या आराम फरमाने से निजात मिलेगी तब ही लोगों की शिकायत दूर हो पाएगी? 

यहां एक ओर अहम सवाल ये भी उठता है कि कहीं उक्त जेई सरकारी नौकरी साथ—साथ किसी के साथ मिलकर ईनवर्टर का कार्य तो नहीं करता?

यहां सवाल यह उठता है कि आम जनता/ उपभोक्ता को इतना तो अधिकार है कि समस्या होने पर उसके निदान के बारे में पूछ सके लेकिन क्या ऐसे अधिकार कागजों के पन्नों तक सिमट कर रह गए हैं? क्या बिजली अधिकारी या कर्मचारी उपभोक्ता की दिक्कतों व शिकायतों पर भड़कने या भड़किले बोल रखने का अधिकार रखता है? इस ओर उच्चाधिकारियों को गौर फरमाना होगा ताकि आम जनता इनकी मनमानी का शिकार न हो सके।
बिजली विभाग के जेई का यह भड़क कर जवाब देने का तरीका त्रस्त करने वाला है गैर वाजिब भी कि “बिजली नहीं तो इन्वर्टर लगा लीजिए” क्या हिमाचल सरकार को ठेंगा दिखाने वाला नहीं है। जहां तक अपनी डियूटी हेतु मेहनत करने की बात है तो एक मजदूर इंसान दिन-रात सिर पर भार ढोकर कार्य करता है. इस नजरिये से तो उस मजदूर को ज्यादा भडकना चाहिए जो थका होने पर पंखे की हवा लेने की सोचता है लेकिन बिजली न होने के चलते मन मसौस कर रह जाता है।

सरकारी व्यवस्था पर सवालिया निशान तो आम बात है लेकिन इन सवालों पर विराम की कोई आस नहीं दिख रही. ये व्यवस्था और इसके रौब झाड़ने वाले अधिकारी जनता की परेशानियां कम करने नहीं बल्कि और बढ़ाने वाले लगते हैं. इस तरह के अधिकारी/कर्मी सरकारी व्यवस्था पर कलंक है, कुछेक उन अधिकारियों/कर्मियो को छोड़ कर जो व्यवस्था की दीमक का शिकार न होते हुए जनता की पीड़ा को समझते है और समस्याओं के निराकरण में सहयोगी बनते हैं।

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