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हरियाणा

सरपंच की मार्कशीट फर्जी, हाईकोर्ट पहुंचा विवाद

September 10, 2017 01:59 PM

नूंह (धनेश विद्यार्थी) नूंह की एसीजेएम डॉ. यशिका गुप्ता की अदालत में गांव रानियाकी के सरपंच जमशेद की दसवीं की मार्कशीट फर्जी होने का मामला काफी हद तक सही पाए जाने के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में इस मामले के पहुंच जाने के बाद ग्राम पंचायत रानियाकी एकाएक चर्चाओं में आ गई है। बता दें कि गांव रानियाकी के मोहम्मद युसुफ ने ग्राम सरपंच जमशेद की दसवीं की मार्कशीट पर सवाल उठाते हुए उसे फर्जी करार दिया था।
नूंह में एसीजेएम अदालत में यह मामला इंसाफ के लिए दायर किया गया। तावडू पुलिस ने इस मामले में आरोपी सरपंच के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत केस दर्ज किया। उपरोक्त अदालत में इस मामले में सुनवाई हुई, जिसमें दोनों पक्षों के अलावा सरपंच की दसवीं कक्षा की मार्कशीट वाले बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन जम्मू डिविजन जम्मू के हैड असिस्टेंट जनरल सेक््शन विजय सिंह जसरोटिया, ज्वाइंट सैकेटरी सरिता आनन्द, असिस्टेंट सैकेटरी मोहिन्द्र गुप्ता, सेक््शन आफिसर अशोक कुमार, जूनियर असिस्टेंट अमित भाव और शिवानी गुप्ता के हस्ताक्षरों वाले आरटीआई आवेदन के आधार पर जारी दस्तावेज व श्री जसरोटिया की उपस्थिति में बोर्ड की ओर से उपरोक्त अदालत में पेश होने की अनुमति एवं बोर्ड की ओर से जारी व्यक्तिगत पहचान पत्र दिखाकर इस मामले में उसके बयान दर्ज किए गए।
बोर्ड अधिकारी ने साफ तौर पर माना कि बोर्ड की ओर से मोहम्मद युसुफ की ओर से मांगी गई सूचना सही और दुरुस्त है तथा जमशेद की ओर से पेश मार्कशीट फर्जी है। नूंह की एसीजेएम अदालत के निर्णय के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में यह मामला न्याय के लिए दाखिल होने के बाद माननीय अदालत ने वहां से हरियाणा सरकार और नूंह के उपायुक्त को नोटिस जारी करके इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
बता दें कि प्रदेश की मनोहर लाल सरकार ने करीब सवा दो साल पहले पंचायत चुनाव लडऩे के लिए शैक्षिक योग्यता निर्धारित की थी और मेवात में सरपंच और पंच के चुनाव में काफी उम्मीदवारों ने यूपी, राजस्थान तथा कुछ अन्य शिक्षा बोर्डों की ओर से जारी फर्जी शिक्षा प्रमाण पत्र जमा कराकर यह चुनाव लड़ा और जीत भी गए। अब ऐसे मामलों में फर्जी प्रमाण पत्र धारकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने को लेकर जवाब दायर करने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ ने सरकार को छह माह का दिया हुआ है।
नूंह जिले में रानियाकी गांव का मामला मोहम्मद युसुफ ने एडवोकेट दीपांशु मात्या के माध्यम से अदालत के समक्ष उठाया है और जमशेद को सरपंच पद से हटाने की गुहार लगाई है। उधर एडवोकेट मोहम्मद अरशद और एडवोकेट एमडी खान ने भी ऐसी याचिकाएं दाखिल की हुई हैं। उधर नूंह प्रशासन ऐसी शिकायतों पर कानूनी कार्रवाई को लेकर अभी गंभीर नजर नहीं आ रहा।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से सरकार को दिया गया समय भी जल्द निकट आ रहा है। ऐसे में नूंह जिले में उन पंच-सरपंचों पर गाज गिरना लगभग तय है, जिनके शैक्षणिक प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए थे। इस मामले पर नूंह के उपायुक्त अशोक शर्मा अथवा डीडीपीओ राकेश कुमार मोर का पक्ष हासिल नहीं हो पाया है।

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