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पंजाब

मैरिज पैलेसों में हो रही चोरियों, प्रबन्धों पर लगा सवालिया निशान

September 11, 2017 06:45 PM

बरनाला, अखिलेश बंसल/विपन गुप्ता:
लाखों-करोड़ों रुपया कमाने के बावजूद मैरिज पैलेस मालिकों द्वारा लोगों को सुविधाएं नहीं दी जा रहीं। सुरक्षा के लेहाज से तो पैलेसों का सिस्टम जीरो ही है। अकेले पंजाब प्रदेश की बात करें तो पैलेसों के अन्दर आज तक सैंकड़ों बरातियों के चोरी हो चुके पर्स व बहु-कीमती आभूषणों का कोई भी सुराग नहीं मिल सका है। पार्किंग का इंतजाम नहीं होने से बाहर खड़े होते लोगों के वाहनों के शीशे तोड़ सामान चोरी होने के अनेकों मामले सामने आ चुके हैं। उधर मैरिज पैलेस एसोसिएशन के मुख्य प्रतिनिधी कह रहे हैं कि उन पर कोई कानून लागू नहीं होता। जिससे मैरिज पैलेसों के प्रबन्धों पर सवालिया निशान लग गया है।
किसी को नहीं मिल सका पैसा व आभूषण:
पुलिस के पास पैलेसों में चोरी/मारपीट/हल्ला-गुल्ला जैसी घटनाओं के अनेकों मामले पहुंच चुके हैं। दर्ज शिकायतों के अनुसार जितने भी मैरिज पैलेसों में शादियां हो चुकी हैं उनमें ज्यादातर फंक्शनों के दौरान अनेकों बारातियों के पर्स चोरी हुए हैं। यहां तक कि सजे हुए दुल्हा-दुल्हन के अंग-संग रिश्तेदार भी होते हैं उसके बावजूद उनके भी गले में पहने हुए हारों में से भी नोट चोरी हो चुके हैं। बता देते हैं कि इशारा मिलते ही पैलेसों के तजुर्बेकार करिन्दें, बरातियों में घुस जाते
हैं और दांव लगते ही महिलाओं के गहने व शादी जोड़े के हार से पैसे उड़ा लेते हैं। कुछ दिन पहले ही लुधियाना मार्ग पर स्थित एक पैलेस में चोरी की बड़ी घटना घटी। जिसमें मेजबानों ने सीधे पैलेस मालिकों को जिम्मेवार ठहराया था, लेकिन पैलेस मालिकों ने पैसे के दम पर मामला दबा दिया था। उसके कुछ दिनों के आस पास ही एक घटना गरचा रोड पर स्थित पैलेस में घटी, जहां कार के शीशे तोड़ चोर सामान उड़ा ले गए। सवाल यह है कि जब ज्यादातर मैरिज पैलेस शहर से दूरी पर होते हैं और पैलेस मालिकों के दावे के अनुसार पैलेस के मेन गेट समेत अन्दर की सुरक्षा के लिए चार सुरक्षा/सिक्योर्टी भी मौजूद होती हैं तो वहां चोरी की वारदातें कैसे घट सकती हैं।   

बरातियों के चोरी होते पर्स व महिलाओं के पहने हुए बहु कीमती आभूषणों का आज तक नहीं मिल सका कोई भी सुराग


हथियारों सहित पहुंचते लोगों की नहीं की जाती शिनाखत:
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश हैं कि पैलेसों के अन्दर किसी किस्म का असलाह लेजाना मनाह है। उसके बावजूद पैलेसों के अन्दर हथियार दाखिल हो रहे हैं। जिन्हें रोकने की जिम्मेदारी पैलेस मालिकों की होती हैं। ताकि पार्टी बुकिंग रद्द ना करवा ले, पैलेस मालिकों के लालचपन की वजह से खुलेआम हथियारों का दाखिल होना जारी है। जिसके चलते बठिंडा में एक आर्केस्ट्रा कलाकार अपनी जान गंवा चुकी है। यह एक किस्सा नहीं, बरनाला के पैलेसों में भी पिछले समय में कई घटनाएं घट चुकी हैं।
पर्दे के पीछे गडक़ जाते हैं शराब व कवाब:
विवाह शादी का समारोह हो या किसी अन्य खुशी का कार्यक्रम। उस वक्त पैलेस के करिन्दों द्वारा परोसी जाती शराब व कवाब का कोई हिसाब नहीं होता। औस्तन 100 बोतलों में से पांच बोतलें आसानी से इधर से उधर कर दी जाती हैं। उदाहरण के तौर पर बता देते हैं कि बरनाला के नज़दीक हंडियाया मार्ग पर स्थित एक पैलेस में कुछ माह पहले विवाह समागम आयोजित हुआ था। जिसमें मेजबान द्वारा 6 पेटी शराब मंगवाई गईं थी। समागम समाप्ती के बाद गिणती
करने पर दो बोतलें कम पायी गई थी जो पैलेस के कार्यालय से मिली थी। जिसके बाद पैलेस मालिक को शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी।
आर्केस्ट्रा कलाकारों से होती है छेडख़ानी:
गरीबी के चलते बहुत सी लड़कियां आर्केस्ट्रा ग्रुपों से जुड़ी हुई हैं। जिनके साथ मैरिज पैलेसों में छेड़छाड़ की घटनाएं घट चुकी हैं। ऐसे मामलों को पैलेस मालिक रफा-दफा करने के प्रयास में रहते हैं। पिछले एक साल के दौरान धनौला मार्ग पर स्थित अलग-अलग मैरिज पैलेसों में आर्केस्ट्रा ग्रुप की कलाकारों से छेडख़ानी की घटनाएं घट चुकी हैं। उन दोनों मामलों में पीडि़त आर्केस्ट्रा ग्रुप की महिला कलाकारों ने पैलेसों के प्रबन्धन को जिम्मेदार ठहराया था।
अवैध पार्किंग से हो चुके हैं अनेकों हादसे:
ज्यादातर मैरिज पैलेसों के पास पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। जिसके चलते मेजबान पार्टी के अपने दोस्तों व सगे संबंधियों के अलावा बारातियों के वाहन भी हाई-वे पर खड़े करने पड़ते हैं। जिससे पैलेसों के बाहर आज तक अनेकों हादसे हो चुके हैं। किसी बाराती का नुकसान हो जाए तो उसका बोझ भी लडक़ी वालों को उठाना पड़ जाता है। उल्लेखनीय है कि आज तक किसी मैरिज पैलेस मालिक के खिलाफ कार्यवायी नहीं की जा सकी है।
पुलिस थानों में नहीं है रिकार्ड:
मैरिज पैलेसों के ज्यादातर करिन्दों की कोई पहचान नहीं होती, ना ही उन्हें पैलेस मालिकों द्वारा कोई वर्दी दी जाती है। जिला का पुलिस व सिविल प्रशासन की ओर से दुकानदारों व पैलेस मालिकों को करिन्दों के पहचान पत्र देने को बार-बार आदेश जारी कर चुका है। उसके बावजूद अधिकांश पैलेस मालिकों ने उक्त अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं दी है।
प्लेट सिस्टम में होती है चार सौ बीसी:
बरातियों के आने से पहले अज्ञात लोग खाना खा जाते हैं। जिनके बारे में प्रोग्राम बुक करवाने वाले सोचते हैं कि पैलेस के लोग हैं, बाराती सोचते हैं कि स्वागतकर्ताओं में हैं, ऐसे लोगों का आखिर तक भेद बना रहता है। जब हिसाब किताब करने की बारी आती है तो झगड़ा होता है इस्तेमाल की गई प्लेट सिस्टम का। जिसका निप्टारा करने के दौरान मेजबान पार्टी को 500 प्लेट के पीछे औस्तन 100 प्लेट का घाटा पड़ जाता है। नियमानुसार प्लेट सिस्टम में मेजबान व बरातियों के अलावा किसी को अधिकार प्राप्त नहीं है कि शादी समारोह में वो लोग खाना खा सकें। क्यूंकि उन सभी को बुकिंग करते समय पूरा मेहनताना फिक्स किया जाता है।
करते हैं टैक्स की चोरी:
मैरिज पैलेस मालिक आंखों में धूल झौंक आयकर व सेलटैक्स के साथ साथ एक्साईज टैक्स की चोरी भी करते आ रहे हैं। पैलेस में होते कार्यक्रमों में प्लेट की औस्तन बुकिंग 500 से एक हजार तक होती है, लेकिन उक्त महकमें के पास दस गुणा कम सूची पेश की जाती है। बता दें कि मैरिज पैलेस की बुकिंग, हल्वाई/कारीगर व बहरों की बुकिंग, आर्केस्ट्रा ग्रुप की बुकिंग, लाईट व डेकोरेशन की बुकिंग, विस्की/शराब, नॉन-वैज, बैंड-बाजा आदि की बुकिंग करते वक्त मोटी रकमें वसूली जाती हैं, वो भी ज्यादातर नकद रूप में।
यह कहते हैं पैलेस मालिक:
जिला मैरिज पैलेस के एक प्रवक्ता कुलदीप का कहना है कि कोई भी कार्यक्रम हो तो प्रोग्राम बुक करवाने से पहले उनसे हर किस्म के नुकसान होने की जिम्मेवारी लेने के बारे में लिखवा लिया जाता है। जिससे हमारे पर कोई कानून लागू नहीं होता। पैलेस में कार्यक्रम के दौरान कोई भी घटना हो जाए उसमें पैलेस मालिकों की कोई जिम्मेवारी नहीं होती।
यह कहते हैं समाजसेवी:
बाबा कालामहर स्टेडियम के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजीतपाल सिंह संधू का कहना है कि भारतीय संस्कृति है कि यदि लडक़ी की डोली घर से उठे तो उसे सबसे शुभ माना जाता है। जगह की कमी के कारण लोगों को मजबूरीवश मैरिज पैलेसों की ओर मुंह करना पड़ता है। जहां लोगों की जमकर लूट होती है। इसके लिए सरकार को सख्त मैरिज पैलेस एक्ट लागू करना होगा।
यह कहते हैं अधिकारी:
-जिला पुलिस मुखी एसएसपी हरजीत सिंह का कहना है कि मैरिज पैलेसों में विवाह समागमों में दाखिल होते हथियारों पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए पुलिस द्वारा जल्दि ही नई प्रोपोजल तैयार की जा रही है। जिसे सख्ती से लागू करवाने को लेकर डिप्टी कमिशनर साहिब को लिखकर दिया जाएगा।

-सहायक कर व आबकारी कमिशनर राजीव गर्ग का कहना है कि मैरिज पैलेसों पर हमारी पूरी नज़र है जिस दिन कोई पुख्ता सबूतों समेत सूचना मिली तो तुरन्त ही ऐसी कार्यवायी की जाएगी जिससे बाकी लोग भी कानून की रेखा में आ जाएंगे।

-डिवीजनल फोरेस्ट आफिसर मोनिका यादव का कहना है कि जिन मैरिज पैलेस मालिकों ने पैलेसों के आगे लगे वृक्षों को काटा है, जिन्होंने वन व जंगलात विभाग की ज़मीन को खराब किया है, जिन्होंने विभाग की नियमावली का उल्लंघन किया है की जल्दि ही सूचि जारी की जाएगी और उनके खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लिया जाएगा।

-प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एसडीओ प्रवीण सलूजा का कहना है कि मैरिज पैलेसों को अपनी ही निशिचत जगह पर कूड़ा-कर्कट एकत्रित करने और उसका उचित जगह पर भेजने का प्रबन्ध करना होता है। मालिक हों या नौकर वह पैलेसों के बाहर इधर-उधर नहीं फेंक सकते और ना ही कूड़े को आग लगा सकते हैं। विभागीय आदेशों को नहीं मानने वालों पर कार्यवायी की जाती है। उनका बिजली का कनेक्शन तक काटने का प्रावधान है।

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