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रघुवीर सिंह सयाल ने टिकट की दावेदारी जता कर बढाई धवाला की बेचैनी

September 29, 2017 02:31 PM

ज्वालामुखी, (मोनिका शर्मा)
ज्वालामुखी विधानसभा चुनाव क्षेत्र अपने आप में अनूठा है। इसका एक भाग चंगर का है तो दूसरा बलिहार। सत्तारूढ़ कांग्रेस हो या भाजपा दोनों दलों में टिकट को लेकर इस बार खासी गहमागहमी है। नेता अपने-अपने तरीके से गोटियां बिठाने में सक्रिय हैं। कांग्रेस पार्टी के मौजूदा विधायक संजय रतन का संगठन व सरकार पर कब्जा तो है, लेकिन विरोधी भी उनके खिलाफ सक्रिय हैं। सीधे तौर पर इस बार टिकट आवंटन में सीएम वीरभद्र सिंह की चली तो टिकट संजय रतन को ही मिलेगा। यही वजह है कि संजय रतन व उनके समर्थक आश्वस्त हैं। दलील दी जा रही है कि संजय रतन ने अपने कार्यकाल में रिकार्ड तोड़ विकास करवाया है। पिछले पंचायत चुनावों में जिस तरीके से संजय रतन के हाथों से जिला परिषद की चारों सीटें चली गई, उससे उनकी परेशानी बढ़ी है। अंदरखाते कांग्रेस में उनके विरोधी भी सक्रिय हैं। उनकी दलील है कि संजय रतन की इस बार टिकट कट सकती है। चूंकि हल्के के जातिगत समीकरण व परिस्थितियां उनके हक में नहीं हैं। खासकर नरदेव कंवर तो अपना टिकट पक्का मानकर चल रहे हैं। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू के वफादार माने जाने वाले नरदेव कंवर पिछली बार भी टिकट के दावेदार रहे हैं। इस बार सुक्खू ने उन्हें देहरा संगठनात्मक जिला का अध्यक्ष बनाया है, जिससे उन्होंने संगठन पर पकड़ बनाई है। दूसरी ओर जिला परिषद चुनावों में जीत कर आए विजेंद्र धीमान भी परिवहन मंत्री जीएस बाली के सहारे अपनी टिकट यकीनी बनाने में लगे हैं। धीमान ने तो इलाके में अपने होर्डिंग लगाकर बाकायदा चुनाव प्रचार शुरू कर रखा है, लेकिन देखने वाली बात होगी कि ओपन सीट में उनकी दावेदारी कहां तक फिट बैठती है। यही नहीं नगर परिषद की पूर्व अध्यक्ष अनिल प्रभा शर्मा भी महिला कोटे से अपने लिए टिकट का जुगाड़ करने में लगी हैं। वहीं भाजपा में रमेश धवाला का एकछत्र दबदबा इस मामले में रहा है। डिलिमिटेशन के बाद ज्वालामुखी कांगड़ा संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। माना जा रहा है कि कांगड़ा के सांसद शांता कुमार से वफादारियों के चलते इस बार धवाला को भाजपा की टिकट हासिल करने में कोई खास दिक्कत पेश नहीं आएगी, लेकिन रिटायर्ड प्रिंसिपल रघुवीर सिंह सयाल ने अपने लिए टिकट की दावेदारी जता कर धवाला की बेचैनी बढ़ा दी है। सयाल इन दिनों जनसंपर्क अभियान में खासे सक्रिय हैं। रिटायर्ड कर्मचारी व सैनिक छवि के बल पर वह अपने लिए समर्थन जुटाने में लगे हैं। सयाल भी ओबीसी बिरादरी से हैं व उनका भी प्रभाव है। वह अपने आपको नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल का सर्मथक बता रहे हैं। धूमल व धवाला के बीच रिश्तों में खटास रही है। इस बात का आधार भी सयाल बना रहे हैं। उनका दावा है कि टिकट के लिए उन्हें पार्टी नेतृत्त्व से आश्वासन मिल चुका है।

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