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राष्ट्रीय

लीगल मैट्रोलॉजी एक्ट पूरे देश में लागू मगर सब अनजान

October 13, 2017 12:47 PM

नूंह, धनेश विद्यार्थी:
हलवाई हो या फिर सूखे मेवे, काजू, किशमिश बेचने वाले दुकानदार दिवाली सीजन में जमकर खूब चांदी कूटते हैं। अधिक बोलना और कम तोलना इनकी आदत में शुमार है। मीठी छुरी से भोले-भाले और शिक्षित ग्राहकों को हलाल करने के फन में ये माहिर हैं। इन पर नुकेल लगाने के लिए देश भर में एक कानून लागू है मगर अधिकांश लोग इसे अनजान हैं। जागरुकता के अभाव में ऐसा हो रहा है। प्रशासन खाद्य सुरक्षा नियंत्रक की ओर से चालू साल में अभी तक कोई खास कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई।
आप भी जान लें अगर कोई दुकानदार 10 या 20 रुपए की कीमत वाले खाली डिब्बे में महंगी खाद्य वस्तु को डालकर उसे तराजू पर तोलकर देता है तो वह आपके साथ ठगी कर रहा है क्योंकि वह डिब्बे के वजन की चीज भी कम दे रहा है और खाली डिब्बे के वजन के बराबर उस चीज के मूल्य का पैसा भी आपसे वसूल रहा है। यह सीधे तौर पर लीगल मैट्रोलोजी एक्ट का उल्लंघन है मगर जिला नूंह में माप-तोल विभाग इस बात पर चुप है। बता दें कि इस कानून में ऐसा करने वाले दुकानदार पर न्यूनतम दस हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है।    

दिवाली सीजन में ग्राहकों को लगता रहा है ठगी का फटका। जागरूक हुए तो पकड़ में आने पर कम तोलने पर लग सकता है दस हजार रुपए का फटका


माप-तोल विभाग सीधे तौर पर केन्द्र सरकार के अधीन होने के चलते यह कानून पूरे देश में एक समान लागू है और इसके तहत देश का हर दुकानदार आता है। हरियाणा— पंजाब में बरसों से त्यौहारी सीजन पर डिब्बे में मिठाई डालकर उसे मिठाई के दाम पर बेचने का धंधा कई दशक से चल रहा है मगर अधिकारी अपनी जेब भरकर जनता को लूटने की इन दुकानदारों को पूरी छूट दे देते हैं और आम आदमी लुटता रहता है।
ऐसे पड़ता है जेब पर डाका:
बता दें कि खाद्य पदार्थ बेचने वाली दुकानों पर ग्राहक को सामान बेचते वक्त बातों में उलझाया जाता है और इसी दौरान उससे ठगी हो जाती है। इस ठगी का शिकार होने वाले ग्राहकों का आंकड़ा शत-प्रतिशत तक पहुंच रहा है। गौरतलब है कि मिष्ठान भंडार/किरयाना और बेकरी दुकानों में मिठाई के साथ आधा किलो या उससे अधिक भार के खाली डिब्बे में सामान भरकर तोला जाता है। ग्राहक से डिब्बे के वजन के साथ मिष्ठाई के भाव के पैसे वसूल लिए जाते हैं। ग्राहक को सामान कम मिलता है और ऊपर डिब्बा भी मिष्ठान के भाव में चला जाता है।
उदाहरण के लिए अगर आपने 500 रुपए किलोग्राम भाव वाली एक किलोग्राम मिठाई खरीदी तो ग्राहक को डिब्बे के वजन के मुताबिक कम मिष्ठान मिलेगा मगर डिब्बे की लागत से अधिक धनराशि संबंधित दुकानदार ग्राहक से कर लेता है। अब वह डिब्बा कितने रुपए का होगा और कितने ग्राम का होगा, यह आप खुद तोलकर और गत्ता व्यापारियों से अपने स्तर पर पता कर सकते हैं। डिब्बा बनाकर बेचने का काम त्यौहारी सीजन में एडवांस में चलता है। एक छोटा-सा दुकानदार भी एक सीजन में एक हजार से अधिक डिब्बों की खरीद कर लेता है।
इन चमक-दमक वाले डिब्बों में मिठाई पैक होने के बाद उसकी गुणवत्ता पर ग्राहक का ध्यान ही नहीं जाता। मिठाई पैक होने के बाद चौबीस घंटे के बाद मिठाई के डिब्बे से बदबू आने लगती है। बता दें कि मिष्ठान विक्रेता ठेके पर हलवाईयों त्यौहारी सीजन में मिठाई बनवाते हैं और उनके मिष्ठान की गुणवत्ता त्यौहारों के दिनों में बहुत घटिया स्तर तक पहुंच जाती है मगर ग्राहकों की आपा-धापी में खुद दुकानदार और ग्राहक मिठाई की गुणवत्ता की बजाए हलवाई की साख को अधिक प्राथमिकता देता है।
नहीं देते बिल:
अधिकांश दुकानदार बड़ी संख्या में मिठाई लेने वालों को ही बिल देते हैं अन्य लोगों को तो वे बिल तक नहीं देते। किसी बड़े सरकारी अफसर का नाम लेने पर दुकानदार अच्छे और ताजा माल में से मिठाई देता है और डिब्बे के वजन से अधिक मिठाई दी जाती है ताकि उनकी सच्चाई दबी रहे। कुछ दुकानदार तो आम ग्राहकों को कच्चा बिल बनाकर देते हैं ताकि बाद में शिकायत आने पर आसानी से मना किया जा सके कि यह हमारा बिल नहीं है।
अधिकारियों को चढ़ता है नजराना:
वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों एवं मंत्रियों के आगमन पर प्रशासन के कुछ अधिकारी इनको खुश करने के लिए बच्चों के लिए मिठाई भिजवाने की परम्परा भी निभाते हैं और अधिकारी के इशारे पर मातहत अधिकारी इस मिठाई के बिल को सरकारी खजाने से पैसा निकालने के लिए अलग-अलग तरीके से एडजस्ट करता है। आरटीआई एक्ट 2005 में ऐसी जानकारियां सामने आई हैं। सामाजिक कार्यकत्र्ताओं के मुताबिक 50 फीसदी से ज्यादा बिल कच्चे या फर्जी लेटरपैड पर कुटेशन ली जाती हैं और इनके आधार पर ही बिल पास कराकर भुगतान करा दिया जाता है।
अपना विज्ञापन मुफ्त में:
अधिकांश दुकानदार अपनी दुकान के प्रचार के लिए यह फार्मूला अपना रहे हैं कि जिन डिब्बों में वे सामान पैक करके देते हैं, उन पर अपनी दुकान अथवा फर्म का नाम छपवाते हैं, ताकि उनका जनता के बीच मुफ्त में प्रचार भी हो जाए।
मूल वजह: जागरुकता की कमी
इस लूट की मूल वजह लोगों को इस बात की जानकारी ही नहीं है कि भारतीय ग्राहकों को कौन-कौन से कानूनी हक दिए गए हैं। शहरी उपभोक्ता तो अब उपभोक्ता अदालतों में उनके साथ हुई ठगी की शिकायत करते हैं और केस दर्ज कराकर इंसाफ भी हासिल करते हैं मगर ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा नहीं है और ग्राहकों की बातों को दुकानदार भी अनसुना कर देते हैं।
क्या होना चाहिए:
अधिकांश लोगों को तो माप-तोल विभाग के कार्यालय और संबंधिक कानून की जानकारी तक नहीं है। प्रशासन भी कभी ग्राहकों के अधिकारों की जानकारी देने के लिए ना तो जागरुकता सेमीनार कराता है और ना ही संबंधित विभाग कभी बाजारों में छापामारी करता है। साल में एक-दो बार आयकर विभाग की छापामारी होती है तो दुकानदार दुकान बंद करके गायब हो जाते हैं और फिर एक-दो दिन बाद मामला ठंड़ा होने के बाद सारा मामला फिर चल निकलता है।
कैसे बचे:
इस बार आप जब भी मिठाई खरीदने जाए तो दुकानदार से पहले मिठाई तोलने तथा बाद में उसे डिब्बे में डालने के लिए कहे क्योंकि यह आपका हक है। अगर कोई दुकानदार ऐसा नहीं करता तो उसकी शिकायत प्रशासन या पुलिस के पास लिखित तौर पर करें। साथ ही दूसरे लोगों को भी इस मामले पर जागरुक करें। किसी के साथ ठगी होता देखकर चुप ना रहे और उसका विरोध करें। आपकी आवाज समाज में नया बदलाव लेकर आएगी।
विधिवेता पक्ष:
वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद मुजीब, हारून खान, अब्दुल रहमान रेवासन, केके शर्मा, सोमदत्त शर्मा व दीपक सिंगला बताते हैं कि मेवात के लोग भोले-भाले हैं और इनके साथ ठगी करना आम बात है। ईद-दिवाली पर दुकानदार मिठाई कम तोलते हैं। डिब्बे के साथ तोलते हैं। कीमत अधिक वसूलते हैं। डिब्बों पर अपनी फर्म का नाम छपवाकर उसमें सामान डालकर देते हैं। कर बचाने के लिए बिल नहीं देते। सरकार ने कानून बनाया हुआ है। प्रशासन को समय-समय पर उपभोक्ताओं के लिए जागरुकता सेमीनार लगानी चाहिए। ऐसा करने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।
माप-तोल के बाट की जांच हो:
शहरवासी पीसीसी सदस्य इमरान खान फिरोजपुर झिरका, अरशद खान बीसरू, सामाजिक कार्यकत्र्ता साहून मालब, राजू कटारिया, पवन कुमार, खालिद हुसैन, इमरान खान अड़बर, युसुफ खान पलड़ी, जुबैर दिहाना, अभय सिंह बैंसी समेत काफी लोगों ने नूंह प्रशासन से यह पुरजोर मांग उठाई है कि जिला भर में जल्द माप-तोल विभाग दुकानदारों के तराजू और बाटों की जांच कराए तथा उन पर साल में एक बार लगने वाली सरकारी मुहर की जांच हो। तराजू के माप की प्रमाणिकता जांची जाए।
सरकारी पक्ष:
इस मामले पर जिला प्रशासन के अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं। उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा का पक्ष ज्ञात करने के लिए सचिवालय का दौरा किया गया मगर वे अपने कोर्ट काम में व्यस्त रहे। उधर जिले में माप-तोल विभाग के कार्यालय को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पूछताछ करने पर यह बात सामने आई है कि नूंह में इस विभाग का कोई अधिकारी नहीं बैठता। खाद्य सुरक्षा नियंत्रक के पद पर अधिकांश समय नूंह जिले का अतिरिक्त पदभार किसी अधिकारी के पास रहा है। पहले रजनीश नाम के अधिकारी यह पदभार संभाल रहे थे मगर अब उनकी जगह कोई नए अधिकारी ने पदभार संभाला हुआ है मगर उनकी पुख्ता जानकारी प्रशासन से नहीं मिल पाई है।

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