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राष्ट्रीय

राजस्थान सरकार लाएगी ऐसा कानून जिसमे सरकारें आमजन को पीटेंगी पर रोना गैर कानूनी होगा

October 23, 2017 03:35 PM

चंडीगढ, संजय मिश्रा:
आज सोमवार को राजस्थान सरकार विधानसभा में ऐसा कानून पेश करने जा रही है जिसके पास होने के बाद यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी कोई घोटाला करता है या अन्य किसी भी प्रकार का कोई अपराध करता है तो सरकार की अनुमति लिए बिना मीडिया न तो इस बारे में रिपोर्ट कर सकेगा, और न ही अधिकारी का नाम छाप सकेगा! कोई भी कार्यकर्ता या नागरिक इन अधिकारियों के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं करा सकेंगे। और यदि पीड़ित पक्ष अदालत जाता है और जज शिकायत दर्ज करने के आदेश देता है तब भी सरकार की अनुमति के बिना शिकायत दर्ज नहीं की जा सकेगी।
यह बिल पास होने के बाद सरकार के भ्रष्टाचार, निकम्मेपन, लापरवाही एवं घोटालों पर सरकार की अनुमति बिना बात करना गैर कानूनी हो जाएगा।
प्रभाव
भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग एवं चर्चा बंद हो जायेगी और इस तरह एक ही झटके में राजस्थान सरकार एवं उसके सभी अधिकारी ईमानदार हो जाएंगे। अब से आपको अखबारों एवं टीवी पर इस तरह की ख़बरें पढ़ने को नहीं मिलेगी कि अमुक अधिकारी को घूस लेते पकड़ा गया है या अमुक अधिकारी ने अमुक ठेके में इतना घोटाला कर दिया है।
इसके पहले सरकार ने 7 सितम्बर को एक ऑर्डिनेंस (आर्डिनेंस नंबर 3 ऑफ़ 2017) के जरिये उपरोक्त प्रावधानों को लागु भी कर दिया, जिसके खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच में भागवत गौर नामक एक अधिवक्ता ने याचिका दाखिल की है।
क्या है इस आर्डिनेंस के पीछे की कहानी?
अपुष्ट खबरों के मुताबिक राजस्थान सरकार के उपरोक्त आर्डिनेंस के पीछे का राज ये है कि
खो नागोरियन में 200 बीघा ईकोलोजिकल भूमि को जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने आवासीय में बदल दिया था जिसके विरूद्ध यशवंत शर्मा ने जनहित याचिका लगायी थी उस पर हाईकोर्ट ने 2005 में ये आदेश दिया कि भविष्य में ईकोलोजिकल भूमि का भू-उपयोग नहीं बदला जाये। लेकिन इस आदेश की धज्जियाँ उड़ाते हुए 2006 में जेडीए ने मिलीभगत करके 1222.93 हेक्टेयर भूमि का उपान्तरण ईकोलोजिकल से आवासीय व मिश्रित भू उपयोग कर दिया क्योंकि ये ज़मीन ज़्यादातर IAS-IPS ने ख़रीद रखी थी जिनमें डी.बी.गुप्ता, वीनू गुप्ता, दिनेश कुमार गोयल, मधुलिका गोयल, सुनील अरोड़ा, रीतू अरोड़ा, सत्यप्रिय गुप्ता, प्रियदर्शी ठाकुर, ईश्वर चन्द श्रीवास्तव, अलका काला, पुरूषोत्तम अग्रवाल, डाक्टर लोकेश गुप्ता, ऊषाशर्मा, एम के खन्ना, केएस गलूणडिया, चित्रा चोपड़ा, पवन चोपड़ा अशोक शेखर, संदीप कुमार बैरवा वग़ैरह हैं इतना ही नहीं इन अधिकारियों ने जेडीए से इनके आसपास की ज़मीनों को सड़के बनाने के लिए अधिग्रहण करवा दिया ताकि इनकी ज़मीनों के आगे 160 फ़ीट चौड़ी सड़के बन जाएँ । 21.01.017 को जोधपुर हाईकोर्ट ने मास्टर प्लान याचिका में आदेश पारित किया और इस 1222 हैक्टेयर ज़मीन का रिकोर्ड मँगवाया लेकिन जेडीए ने कोर्ट को गुमराह करने के लिए उपांतरण का रिकोर्ड ही पेश किया लेकिन वो रिकार्ड नहीं पेश किया जिसके द्वारा उपांतरण किया गया था और न्यायालय में कहा कि इसके अलावा कोई रिकोर्ड नहीं है, जब वादी ने ज़बर्दस्त एतराज़ किया और हाईकोर्ट के फटकार के बाद जेडीए ने रिकार्ड पेश किया तब पोल खुली कि मुख्य नगर नियोजक ने ईकोलोजिकल से भूउपयोग बदलने से इंकार किया था लेकिन इन अधिकारियों ने मिलिभगत करके भू-उपयोग परिवर्तन करा लिया और कोड़ियों की ज़मीन करोड़ों रूपए की हो गयी जिसमें मोहन लाल गुप्ता एमएलए और अशोक परनामी एमएलए वग़ैरह भी शामिल हैं हमने याचिका में सारे दस्तावेज़ व जमाबंदियां भी पेश की थी हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्या कार्यवाही करेगी और ये जानकारी मिलने के बाद हम भी रिपोर्ट दर्ज करने की कार्यवाही कर रहे थे कि सरकार इनको बचाने के लिए ये ordinance लेकर आ गयी जो असंवैधानिक है। इसके अलावा वादी द्वारा हाईकोर्ट से बारबार आग्रह किया जा रहा था कि जेडीए योजनाओं का नियमन बिना ज़ोनल प्लान बनाए कर रहा है जो अवैध है हाईकोर्ट ने मना किया लेकिन नियमन लगातार जारी रहा। जब वादी ने अवमानना याचिका 02 जून 2017 को हाईकोर्ट में लगायी तो सरकार एवं उसके सभी अधिकारी समझ गए कि अब वे जेल जा सकते हैं तो सरकार ये ordinance लेकर आ गई ताकि उन भ्रष्ट अधिकारियों को बचाया जा सके। और इनके ख़िलाफ़ एफआईआर भी दर्ज नहीं हो सके।

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