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हरियाणा

जगाधरी में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाशोत्सव के समापन समारोह पर राज्यस्तरीय चढ़दी कला कार्यक्रम में कई घोषणाएं

November 12, 2017 07:21 PM

यमुनानगर, चंडीगढ़, फेस2न्यूज                                                                                                  हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रविवार को जगाधरी में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाशोत्सव के समापन समारोह पर राज्यस्तरीय चढ़दी कला कार्यक्रम में कई घोषणाएं की, जिनमें लौहगढ़ में बाबा बंदा सिंह बहादुर जी के नाम से राज्य सरकार द्वारा एक बोर्ड या ट्रस्ट बनाया जाएगा ताकि इस क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत को संजो कर दुनिया को दिखाया जा सके और यह एक पर्यटन केन्द्र के रूप में उभरें। कपाल मोचन से लौहगढ़ के रास्ते पर भव्य मैमोरियल गेट बनाया जाएगा, बढ़ खालसा में यात्री निवास की स्थापना की जाएगी, लाडवा से झीवरहेड़ी गुरूद्वारा साहिब तक की सडक को चौडा किया जाएगा और इसका नाम गुरू तेग बहादुर के नाम से रखा जाएगा।

पटना साहिब में आयोजित होने वाले श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाशोत्सव के समापन समारोह में हरियाणा से दो विशेष रेलगाडिय़ां चलाई जाएंगी, जिनमें एक गाड़ी अंबाला और दूसरी गाड़ी सिरसा से चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल होंगें।

                                   
 
 
 
 
उन्होंने कहा कि आगामी 22 दिसंबर से 25 दिसंबर, 2017 के दौरान  मुख्यमंत्री ने कहा कि बढखालसा में खुशहाल सिंह दहिया ने अपना शीश देकर श्री तेग बहादुर का शीश लेकर जा रहे भाई जैता को मुगल सेनाओं से सुरक्षा प्रदान की थी। उन्होंने कहा कि भाई जैता सिंह के नाम से भी संग्रहालय बनाया जाए ताकि वह आस्था का केन्द्र बनें। उन्होंने कहा कि असंध के कालेज का नाम श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे बेटे बाबा फतेहसिंह जी के नाम पर रखा गया है। अंबाला में श्री गुरू गोबिंद सिंह पुस्तकालय का जीर्णोद्धार करने का कार्य किया जा रहा है, इसके लिए 63 लाख का खर्च होगा। कैथल मार्ग पर चिराओ मोड़ पर श्री गुरु नानक देव जी के नाम से एक प्रवेश द्वार का निर्माण करवाया जा रहा है। इसी प्रकार, प्रदेश में पंजाबी भाषा को प्रसारित करने के लिए पंजाबी के 397 पीजीटी, 392 टीजीटी अध्यापकों की सीधी भर्ती की जा रही है और पदोन्नति की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में हैं। उन्होंने कहा कि लखनौर साहिब में माता गुजरी के नाम से वीएलडीए कालेज स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। उन्होंने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय ने भी कहा कि वे हरियाणा के कुछ कालेजों को मान्यता देकर जोडऩा चाहते हैं, जब पंजाब विश्वविद्यालय के साथ इस क्षेत्र के कालेज जुड़ेंगे तो बच्चों का विकास होगा।
उन्होंने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाश पर्व पर राज्य के भिन्न-भिन्न स्कूलों और कालेजों में सेमिनार आयोजित किए गए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने लोगों की आस्था को देखते हुए श्री हजुर साहिब गुरूद्वारा, श्री ननकाना साहिब, श्री हेमकुण्ड साहिब ओर श्री पटना साहिब जाने वाले प्रदेश के तीर्थ यात्रियों के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने के उदेश्य से गुरु दर्शन यात्रा योजना शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि सिंधू दर्शन एवं कैलाश मानसरोवर के तीर्थ यात्रियों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की एक योजना प्रारंभ की है।
उन्होंने उपस्थित साध-संगत से अपील व आह्वान करते हुए कहा कि आजादी से पहले के इतिहास और आजादी के बाद के इतिहास में बदलाव हुआ है और इसलिए आज हमें देश के लिए मरने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पहले कहा जाता था कि देश की रक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान देना है, परंतु अब आज के युग में देश की सीमाओं पर हमारे सैनिक तैनात है जो देश की रक्षा करते हैं, इसलिए हम जो देश के अंदर रहते हैं, को मरना नहीं बल्कि जीना सीखना है और हमें देश, पंथ के लिए जीना है ताकि जरूरतमंद लोगों की मदद की जाए। उन्होंने कहा कि आज हमें भूखे को लिए रोटी, कपडे और मकान की सुविधा उपलब्ध करवाकर सेवा करनी चाहिए। उन्होंने उपस्थित साध-संगत से आहवान करते हुए कहा कि हमें इस काम में जुटे रहना चाहिए ताकि देश व प्रदेश की प्रगति भी हो।
मुख्यमंत्री ने साध-संगत से बोले सो निहाल के तहत सीधा संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आज बड़े ही खुशी और उत्साह का मौका है दशमेश गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को याद किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 12 फरवरी, 2017 को करनाल में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाशोत्सव के समारोह की शुरूआत की गई थी और आज 12 नवंबर, 2017 को इसका समापन किया जा रहा है। उन्होंने उपस्थित लोगों के साथ संवाद स्थापित करते हुए कहा कि आज यहां इस कार्यक्रम में पहले एक वक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हैं, इस पर उन्होंने कहा कि मैंं जब कभी भी यहां यमुनानगर में आया हूं तो होस्ट के नाते से ही आया हूं, इसलिए मुझे भी होस्ट ही समझा जाए।
मुख्यमंत्री ने करनाल में आयोजित किए गए श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाशोत्सव समारोह के बारे में बात करते हुए कहा कि इससे पहले असंध से विधायक सरदार बख्शीश सिंह विर्क ने साध-संगत के सामने कहीं गई बातें रखीं, जिन्हें पूरा करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समाज और जनता की भलाई के लिए किए जाने वाले कार्यों को पूरा करने के लिए वे व उनके नेतृत्व में हरियाणा सरकार हर संभव कोशिश करेगी।
श्री गुरु गोबिंद सिंह के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हालंाकि मुझसे पहले के वक्ताओं ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के बारे में काफी बातें की है परंतु उनका कहना है कि हम जब कभी भी उनके बलिदान के बारे में सुनते हैं और विचार करते हैं तो रोंगटें खड़े हो जाते हैं, क्योंकि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पिता और पुत्रों दोनों का ही बलिदान दिया था और स्वयं तिल-तिल करके समाज की सेवा की थी। उन्होंने कहा कि श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने अकाल तख्त की स्थापना की थी। उन्होंने उपस्थित साध-संगत अर्थात लोगों से कहा कि उनकी लिखी वाणी को हमें अपने जीवन में उतारना है और देश व समाज की सेवा करनी है।
मुख्यमंत्री ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के अंबाला जिले के लखनौर में स्थित ननिहाल का जिक्र करते हुए कहा कि लखनौर साहिब में उनका बचपन बीता था। उन्होंने कहा कि सिरोपा की परंपरा भी श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने ही शुरू की थी, जोकि कपालमोचन से शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने सिरोपा भेंट कर अपने सैनिकों को सम्मानित करने का काम किया था।
इससे पूर्व, हरियाणा भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष श्री सुभाष बराला ने उपस्थित साध-संगत से देश व प्रदेश के विकास के हित में अपील करते हुए कहा कि हम सभी को मिलकर गुरुओं द्वारा दिखाए गए मार्गों पर चलना चाहिए और समाज में समरसता के साथ-साथ भाईचारेे को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने गुरूओं द्वारा दिए गए रास्ते का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुओं ने जातिवाद का मतलब ही नहीं रखा, इसलिए समाज के अलग अलग क्षेत्रों से पांच प्यारे चुने गए जिसके तहत समरस समाज की स्थापना करनी थी। इसलिए आज समरसता की बहुत जरूरत हैं। खालसा पंथ की स्थापना त्याग, तपस्या और बलिदान के तहत हुई थी। उन्होंने कहा कि आज शायद इस तरह के कम ही लोग होगें जो इस प्रकार से बलिदान दे सकते हैं। उन्होंने साध-संगत से अपील करते हुए कहा कि वे संकल्प लें कि गुरुओं द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलते हुए समाज को एकजुट करें और हरियाणा को तरक्की के रास्ते पर लेकर चलें। उन्होंने कहा कि इतिहास में जिन लोगों ने बलिदान दिया था आज उनके लिए हजारों-लाखों लोग इकटठा होकर कार्यक्रम आयोजित करते हैं। उन्होंने कहा कि आप सब लोग दुनिया में अपने देश को अद्भूत देश बनाएं।
असंध से विधायक सरदार बख्शीश सिंह विर्क ने कहा कि गत 12 फरवरी, 2017 को करनाल में आयोजित कार्यक्रम में जिन बातों के बारे में कहा गया था उनकी शुरूआत हो चुकी है और उन पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने श्री गुरुगोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाशोत्सव पर हरियाणा की ढ़ाई करोड जनता को बधाई दी और आज के कार्यक्रम में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ साध संगत और उनकी की ओर से बधाई दी।
इस मौके पर सिख इतिहासकार हरजिन्द्र सिंह, एसजीपीसी के वाईस प्रेसीडेंट बलदेव सिंह कायमपुर, पीर साहब, बाबा त्रिलोकी सिंह, महंत बाबा कर्मजीत सिंह ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पंजाबी साहित्य अकादमी और हिन्दी साहित्य अकादमी की ओर से रचित पुस्तकों का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री को इस मौके पर सिरोपा, तलवार और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने छका लंगर                                                                                                     जगाधरी में आयोजित किए गए श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के 350वें प्रकाशोत्सव के समापन समारोह में प्रदर्शनी का अवलोकन किया और लंगर भी छका।  इस अवसर पर हरियाणा के परिवहन मंत्री श्री कृष्ण लाल पंवार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी, खाद्य एवं आपूर्ति राज्यमंत्री श्री कर्णदेव कम्बोज, श्रम एवं रोजगार राज्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, सांसद रतन लाल कटारिया, विधायक ज्ञानचंद गुप्ता, श्याम सिंह राणा, पर्यटन विभाग के चेयरमैन श्री जगदीश चोपडा, महंत करण सिंह, बाबा कश्मीरा सिंह, बीबी जागिर कौर, बाबा शरणजीत सिंह, बाबा बलदेव सिंह, बाबा गुरूविन्द्र सिंह, बाबा सुक्खा सिंह, बाबा करण बीर सिंह, बाबा दुर्गा सिंह, पीर बाबा, बाबा त्रिलोकी सिंह सहिह प्रदेशभर से आई साध-संगत भी उपस्थित थी। 

जगाधरी मे उमड़ा साध संगत का सैलाब                                                                                    समारोह में लाखों की संख्या में सिख श्रद्धालुओं की उपस्थिति श्रद्धा के जन सैलाब के रूप में अलग नजारा पेश कर रही थी। प्रात:काल से ही जगाधरी और यमुनानगर के विभिन्न गुरूद्वारों सेे नगर कीर्तन के रूप में सिक्ख संगत श्री गुरुग्रंथ साहिब को नतमस्तक होने के लिए शब्द कीर्तन करते हुए और बोले सो निहाल सत श्रीअकाल के गगन भेदी जय घोष के साथ पंहुचनी आरम्भ हो गई थी। विशेषतौर पर छोटा माडल टाऊन सिक्ख सभा गुरूद्वारा से प्रधान गुरबक्श सिंह, परमजीत सिंह बब्बु व अन्य सिक्ख नेताओ की मौजुदगी में 500 मोटरसाईकिलें और 500 कारों के काफिले के साथ आयोजन स्थल पर पंहुची। इसके अलावा अम्बाला, कुरूक्षेत्र, पंचकुला, कैथल सहित प्रदेश के सभी जिलों से बसों और कारों में बड़ी संख्या में सिक्ख श्रद्धालु जगाधरी अनाज मण्डी में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। सिक्ख संगतों के लिए जिला प्रशासन व आयोजन समिति द्वारा पेयजल, खाने और अन्य सुविधाओं के व्यापक प्रबंध किए गए थे। विभिन्न विभागों, संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से 33 स्टालों पर चाय, फल, जलेबी अन्य मिष्ठान, पकौड़े, कॉफी व अन्य प्रबंध किए गए थे। कार्यक्रम में शामिल हुए लाखों लोगों ने जहां रागी, ढाडी और कविशरी जत्थों से गुरबाणी कीर्तन और सिक्ख इतिहास श्रवण किया वहीं जिला प्रशासन द्वारा किए गए बेहतर और पुख्ता प्रबंधों की भी मुक्त कंठ से प्रशंसा की। श्रद्धालुओं को आयोजन स्थल तक पंहुचाने के लिए यमुनानगर और जगाधरी के अलग-अलग क्षेत्रों में पार्किग स्थल बनाए गए थे। पुलिस द्वारा यातायात के बेहतर प्रबंधों के कारण किसी भी श्रद्धालु को आयोजन स्थल पर पंहुचने व वाहनों की पार्किग में कोई दिक्कत पेश नही आई। प्रशासन द्वारा इस आयोजन को सफलता पूर्वक सम्पन्न करने के लिए पिछले एक सप्ताह से दोनो शहरों में सफाई व्यवस्था और सजावट के विशेष प्रबंध किए गए थे। इसके अलावा नगर निगम और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं द्वारा सभी प्रमुख मार्गो, आयोजन स्थल व पूरे शहर में जल का छिडक़ाव किया गया था। केसरिया निशान साहिब लगने से पूरे जिला का वातावरण श्रद्धा और धार्मिक वातावरण में रंगा नजर आया।
मुख्यमंत्री ने किया भव्य प्रदर्शनी का आवलोकन
गुरु नानक देव जी की सिख फिलोसफी से लेकर बंदा सिंह बहादुर द्वारा लौहगढ़ में स्थापित की गई पहली सिख राजधानी का सचित्र प्रदर्शन किया गया है. मुख्मंत्री ने जगाधरी की अनाज मंडी में आयोजित भव्य और ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। हरियाणा के सूचना, जनसम्पर्क एवं भाषा विभाग द्वारा लगाई गई इस प्रदर्शनी में लगभग 73 डिस्प्ले बोर्डों पर सिख धर्म के पहले गुरु नानक देव जी द्वारा आरम्भ की गई सिख फिलोसफी से लेकर बाबा बंदा सिंह बहादुर द्वारा यमुनानगर और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर 7200 एकड़ क्षेत्र में स्थापित की गई पहली सिख राजधानी तक के इतिहास को चित्रों सहित प्रदर्शित किया है। इसके अलावा, इस प्रदर्शनी में 25 डिस्प्ले बोर्ड पर यमुनानगर व आस-पास के जिलों में लौहगढ़ के किले अवशेष व प्राचीन इतिहास को विशेष तौर पर प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी में गुरु नानक देव जी द्वारा आरम्भ की गई सिख फिलोसफी, गुरु नानक देव जी द्वारा तत्कालीन शासक बाबर के अत्याचारों के विरोध पर बाबर को जाबर कहना, राजा अकबर द्वारा दूसरे गुरू श्री अंगद देव, तीसरे गुरु श्री अमर दास व चौथे गुरु रामदास जी को सम्मान देना, सिख धर्म में गुरु अर्जुन देव जी की पहली कुर्बानी, गुरु हरराय जी द्वारा 13 वर्ष तक लौहगढ़ किले के निर्माण कार्य की देखरेख करना, 20 जुलाई 1652 को लौहगढ़ में 8वें गुरू श्री गुरु हरिकृष्ण जी का जन्म होना, गुरु तेग बहादुर जी द्वारा 1644 से 1664 तक लक्खी शाह बंजारा, पीर बुदुशाह के साथ लोहगढ़ किले का निर्माण करवाना इत्यादि घटनाओं को प्रदर्शित किया गया है।
प्रदर्शनी में पटना साहिब में श्री गुरु गोबिंद सिंह के जन्म, गुरु हरराय द्वारा राजा फतेह सिंह को संतान का वरदान देना, श्री गुरु गोबिंद सिंह की बाल्य काल की घटनाओं, श्री गुरु तेग बहादुर का 1666 से 1671 तक असम भ्रमण के बाद पटना में वापसी व बाल श्री गुरु गोबिंद सिंह से पहली मुलाकात, वर्ष 1675 में आनंदपुर साहिब में कश्मीरी पंडितों द्वारा धर्म की रक्षा के लिए श्री गुरु तेग बहादुर जी का प्रार्थना करना, धर्म की रक्षा के लिए श्री तेग बहादुर की कुर्बानी, भाई जैता द्वारा श्री गुरु तेग बहादुर जी का शीश दिल्ली से आनंदपुर साहिब तक ले जाना व श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को यह शीश सौंपना, श्री गुरु गोबिंद सिंह का पौटासाहिब में 4 वर्ष तक का विश्राम, इस काल में लौहगढ़ किले के निर्माण को अंतिम रूप देना, भंगाणी का युद्ध, इस युद्ध में सढ़ौरा के पीर बुदुशाह द्वारा अपने पुत्र शहीद करवाना तथा श्री गुरू गोबिंद सिंह के कपालमोचन से वापसी के दौरान 13 दिन तक लाहड़पुर में ठहराव, भाई मनी सिंह की शहीदी 1699 में श्री गुरु गोबिंद सिंह द्वारा आनंदपुर साहिब में सिख धर्म की स्थापना, श्री गुरू गोबिंद सिंह के चारों साहिबजादों की शाहादत, श्री गुरु गोबिंद सिंह द्वारा गुरू ग्रंथ साहिब को पूर्ण गुरू का दर्जा देना इत्यादि घटनाओं का प्रदर्शन किया गया है। प्रदर्शनी में नांदेड़ साहब में श्री गुरु गोबिंद सिह और बंदा सिंह बहादुर की पहली मुलाकात, बंदा सिंह बहादुर द्वारा दिल्ली से लाहौर तक सिख राज की स्थापना, लौहगढ़ में सिख राज की पहली राजधानी स्थापित करने तक के सफर को प्रदर्शित किया गया है। इस प्रदर्शनी में यमुनानगर के लौहगढ़, रायपुर-रानी क्षेत्र के मसूमपुर सहित करनाल, कुरूक्षेत्र, अम्बाला और पंचकूला के अलग-अलग क्षेत्रों में लौहगढ़ किले और 52 गढ़ो के मिले अवशेषों और प्राचीन निशानियों को प्रदर्शित किया गया है-प्रदर्शनी के अंत में मुख्यमंत्री  की अध्यक्षता में 3 जून 2016 को लौहगढ़ में बाबा बंदा सिंह बहादुर के 300वें शहीदी दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के चित्रों को प्रदर्शित किया गया है।         गतका दलों ने दिखाए हैरतअंगेज करतब  
विभिन्न जिलों से 9 गत्तका दलों ने संगतों को हैरतअंगेज करतबों से मंत्रमुग्ध कर दिया। इस प्रतियोगिता का उदघाटन रादौर के विधायक श्याम सिंह राणा ने किया। श्री राणा ने इस मौके पर कहा कि सिख इतिहास कुर्बानियों से भरा हुआ है और सभी सिख गुरूओं ने बिना धार्मिक और जातपात के भेदभाव से धर्म की रक्षा के लिए लम्बा संघर्ष किया है। भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की रक्षा में सिख गुरूओं का महत्वपूर्ण योगदान है।
प्रतियोगिता का संचालन और गत्तका युद्व कला के कोच इन्द्रपाल सिंह ने बताया कि सिख धर्म में गत्तका युद्व कला और शस्त्र विद्या का विशेष महत्व है। इस कला की शुरूआत छठे गुरू श्री हरगोबिन्द सिंह साहिब ने मीरी-पीरी सिख सिंद्वात के तहत की थी। जब मुगल सम्राट ने पांचवे गुरू श्री गुरू अर्जुनदेव जी को तत्ती तवी पर बिठाकर शहीद किया था, उसके बाद गुरू गद्दी पर विराजमान होने के बाद गुरू हरगोबिन्द साहिब ने भक्ति के साथ शक्ति के प्रयोग के लिए मीरी-पीरी का सिंद्वात दिया था। इससे पूर्व सिख धर्म के 5 गुरूओं केवल धर्म प्रचार को ही प्रमुखता दी थी।
गत्तका कला में लाठी, जंमदार, कृपाण, काती, चक्र, गोला, टीटी सुधार, मल्धी, दल कृपाण, गंडासी इत्यादि का प्रयोग किया जाता है। इस कला में दूसरे प्रतिभागियों पर हमला करने के साथ-साथ आत्मसुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। इस प्रतियोगिता में मीरी-पीरी सिख आर्टस अम्बाला, डीएसएस, गत्तका अखाडा पिंजौर, दशमेश गत्तका अखाडा यमुनानगर, मीरी-पीरी गत्तका बराडा, रामगढिया गत्तका अखाडा पानीपत, खालसा खास गत्तका अखाडा शाहबाद, गुरमीत अखाडा करनाल, अमर शहीद बाबा दीप सिंह गत्तका अखाडा नीलोखेडी और वीररस गत्तका अखाडा पेहवा की टीमों के लगभग 200 प्रतिभागियों ने भाग लिया। गुरु गोबिन्द सिंह के हथियारों और निशानियों को सम्मानपूर्वक प्रदर्शित किया गया-समारोह में तख्त केशगढ़ साहिब आनंदपुर रोपड़ से आए विशेष वाहन में श्री गुरु गोबिन्द सिंह के हथियारों और निशानियों को सम्मानपूर्वक प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में शामिल हजारों सिख श्रद्धालुओं और प्रदेशवासियों ने श्रद्धा के साथ इन हथियारों व निशानियों को नमन किया। इन निशानियों की प्रतियोगिता श्री गुरु गोबिन्द सिंह की कृपाण, तलवार, तेगा, दस्तार, कंघा, केश, हस्तलिखित पोथी, छोटी कृपाण, दो तीर, बरछा, कोरड़ा सहित अन्य हथियार प्रदर्शित किए गए थे। उल्लेखनीय है कि गुरू गोबिन्द सिंह ने युद्ध कौशल का प्रशिक्षण तख्त श्री केशगढ आनंदपुर साहिब में लिया था और वहीं पर उन्होंने सिख फौज तैयार करके विभिन्न युद्ध भी लड़े थे।

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