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जीरकपुर में स्वच्छता अभियान: 50 टन कूड़े की बिल्ली में घंटी कौन बांधे, बिशनपुरा के लोग विरोध में उतरे

January 02, 2018 08:02 PM

डेराबस्सी, पिंकी सैनी                                                                                                                जीरकपुर शहर स्वच्छता मुहिम तब तक कामयाब नहीं हो सकती जब तक इस शहर के रोजाना निकलने वाले करीब 40 से 50 टन के गारबेज के लिए कोई प्रबंध हो सके। अब तक नगर कौंसिल बिशनपुरा में एक अस्थाई डंपिंग ग्राउंड में शहर का गारबेज जमा कर रही है। लेकिन, नजदीकी गांव बिशनपुरा के लोगों की ओर से इसका विरोध हो रहा है। लोग नहीं चाहते हैं कि जीरकपुर शहर का गारबेज बिशनपुरा में डंप हो। उनका कहना है की इससे उनके गांव में दुर्गंध फैल रही है। यहाँ तक की इसकी दुर्गंध एमसी ऑफिस तक आती है। बिशनपुरा के लोग ही इस शिकायत को लेकर एमसी ऑफिस तक कई बार पहुंच चुके हैं। यहां कि निवासी प्रदीप, गुरपाल सिंह, दीवान चंद, राजिंदर सिंह अन्य लोगों ने कहा कि अब हम यहां शहर का कचरा इस डंपिंग ग्राउंड में नहीं गिराने देंगे। लोगों की मांग है कि इसे यहां से शिफ्ट करना ही होगा। गारबेज की दुर्गंध से यहां रहना मुश्किल हो रहा है। जीरकपुर एमसी को भी इसकी दुर्गंध कम करने के लिए मिट्टी डालकर इसे ढकना पड़ता है। इसमें एमसी को हर महीने काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं।                                                                                        बिजली बनाने के लिए गारबेज देने की योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में                                                                 नगर कौंसिल की सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर चल रही महत्वाकांक्षी योजना एक बार फिर से अधर में लटकी दिख रही है। अगर जल्द ही हल नहीं ढूंढा गया तो शहर को कचरामुक्त करने के लिए सालों से चल रही योजनाएं एक बार फिर से जमींदोज हो जाएंगी और शहर के डंपिंग प्वाइंट पर कचरों का ढेर लगता ही रहेगा। ऐसे में ठोस कचरा प्रबंधन का प्लांट लगा शहर को साफ-सुथरा करने की सालों से चल रही कवायद एक बार फिर से हवा होती दिख रही है। एक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी से इस बारे में बात चल रही थी। लेकिन सरकार बदलते ही वह सिरे नहीं चढ़ती नही दिख रही। अब पुराने तरीके से ही यहां गारबेज को ठिकाने लगाया जा रहा है। दो सालों से समगोली में एक यूनिट लगाने की भी योजना बनती रही है। इसमें कई शहरों के गारबेज को रीसाइकिल कर उससे बिजली तैयार किया जाना था। इस वेस्ट को रीसाइकिल कर कई अन्य कामों में लाया जाने की भी योजना थी। इसी योजना के कारण जीरकपुर में डंपिंग ग्राउंड पर ज्यादा पैसा नहीं लगाया जा रहा है। कोट्स: मैंने आज ही इस मसले पर डिप्टी डायरेक्टर लोकल बाड़ी से इस मसले को लेकर मीटिंग की है। सरकार ने डेराबस्सी सब डिवीजन में पड़ते गांव समगौली में 50 एकड़ जमीन पर प्लांट बनकर तैयार है। जल्द ही कचरे का हल निकल जाएगा मनवीर सिंह गिल ई.ओ. नगर कौंसिल जिरकपूर गारबेज को री-साइकिलिंग करने के लिए जिस कंपनी से बात चल रही थी। हमारी कोशिश है कि गारबेज को डिस्पोज आॅफ करने के लिए ठोस काम हो। अभी पुराने तरीके से ही काम कर रहे हैं। लेकिन, जीरकपुर शहर के गारबेज को शहर से बाहर ले जाने का काम हर हाल मे पूरा होगा। -कुलविंदरसोही, एमसी प्रधान जीरकपुर

क्या है प्रोजेक्ट                                                                                                                        सरकार ने गमाडा क्लस्टर के पूरे इलाके में कूड़ा उठाने से लेकर उसके निपटारे को यह पायलट प्रोजेक्ट बनाया था। जिसे बाद में दूसरी जगहों पर लॉन्च किया जाना है। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत संचालित प्रोजेक्ट की लागत 72.73 करोड़ है। जोकि मोहाली, खरड़, कुराली, बनूड़, डेराबस्सी, जीरकपुर, लालड़ू समेत गमाडा क्लस्टर की कुल 18 काउंसिल व पंचायतों को कवर करेगा। इसमें कंपनी ने ही घरों से कूड़ा उठवाना है। फिर उसे गारबेज कलेक्शन सेंटर पहुंचा कर अलग-अलग किया जाना है। फिर सारा कूड़ा समगौली प्लांट पहुंचाया जाना है। जीरकपुर से रोजाना 60-70 टन कूड़े का निपटारा इस प्लांट में प्रस्तावित है।

 

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