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पंजाब

प्लॉट मालिकों ने लैंड प्रोमोटर्स एंड डिवलपर्स पर लगाये धोखाधडी के आरोप

February 09, 2018 05:46 PM

चंडीगढ, फेस2न्यूज ब्यूरो:
प्रीत लैंड अलॉटी वैल्फेयर ऐसोसियेशन के पीडित सदस्यों ने चंडीगढ प्रैस कल्ब में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान मोहाली स्थित प्रीत लैंड प्रोमाटर्स एंड डिवपलर्स प्राईवेट लिमेटिड को आडे हाथ लेते हुये प्लॉट मालिकों के साथ धोखाधडी करने के आरोप लगाये हैं। कंपनी ने वर्ष 2006 में अपने अस्तित्व के साथ ही लोगों के 1193 प्लॉट बुक करवाये थे और जमीन की कीमत और डिवलपमेंट चार्जेज के रुप में पैसो के अदायगी के बावजूद भी प्लॉट मालिको को उनकी संपतियों से वंचित रखा।
बारह साल का यह लम्बा इंतजार इन लोगों को न केवल मानसिक कष्ट दे रहा बल्कि शारीरिक पीडा झेल रहे यह प्लाट मालिक आज भी अपनी कडी मेहनत की कमाई से अपने सपनों के घर को साकार होने की आस में उम्मीद लगाये हुये हैं।   

बारह साल के बाद भी नौ सौ से भी अधिक प्लॉट मलिक हैं अपनी संपति से वंचित


पत्रकारों को सम्बोधित करते हुये ऐसोसियेशन के महासचिव प्रीतपाल सिंह सोढी ने बताया कि मोहाली स्थित इस कंपनी ने सेक्टर 85, 86 और 87 मोहाली में अपनी साईट से साथ पंजाब सरकार को अपरोच किया था जिसमें करीब 291 करोड के निवेश के साथ करीब 200 एकड जमीन में रेजिडेंश्यिल टाऊनशिप प्रोजेक्ट का प्रस्ताव जिससे प्रदेश सरकार की इम्पावर्ड कमेटी ने पारित कर दिया था। कंपनी चार डायरेक्टरों चरण सिंह सैणी, यशपाल, नरेन्द्र सिंह सैणी और कंवलजीत सिंह वालिया के साथ शुरु हुई जिसके बाद तीन डायरेक्टरों ने अपने शेयर लेने के बाद इस निवेश से कन्नी काट ली।
साईट की डिवलपमेंट के लिये कंपनी को संबंधित अथारिटियों से अपरुवल प्राप्त हुये और ग्राहकों को रिझाने के लिये कंपनी ने विकास के कार्य तेज कर दिये जिससे ग्राहकों के साथ धोखाधडी कर अधिक से अधिक पैसा बनाया जा सके। जुलाई 2010 में कंपनी ने 13 शर्तो के साथ अलॉटमेंट लैटर्स जारी किये जिसके प्लाट धारक को जमीन की कीमत की 50 फीसदी अदायगी और पूरे डिवलपमेट चार्ज का भुगतान जरुरी था।
कंपनी ने इसी बीच अपने विकास कार्यो पर लगाम लगाई और अपने प्रोजैक्ट के प्लाटों को बेचने में जुट गई। कंपनी प्लॉटों की सेल और धारको का बकाया पैसा बटोरती रही परन्तु उन्हें पौजेशन देने में आनाकानी करती रहीं
वर्ष 2012, 2013 और 2014 के दौरान कंपनी ने प्लाट जारी करने के लिये नये अलाटमेंट लैटर्स जारी किये जिसमें शर्ते 13 से बढाकर 44 तक कर दी जिससे अधिकतर अलॉटी मालिक एक बार फिर नये प्लाट का भागीदार होने से वंचित रह गये।
इसके बाद कंट्री टाऊन एंड प्लानिंग ने इस प्रोजैक्ट के एक भाग का पहला ले आऊट मैप जारी किया जिसमें 431 प्लॉट पारित किये गये जिसमें से कंपनी ने मात्र 206 प्लॉट धारको को अधिकारिक पोजेशन दिये तथा शेष लाभार्थी आज की तारिख तक वंचित हैं। अलॉटमेंट लैटर के न प्राप्त होने के मुख्य कारणों में जमीन की कमी, अलॉटमेंट पालिसी में खोट, प्लॉट के क्लेरेंस के लिये कंपनी द्वारा संबंधित विभाग या प्रधिकरण को फंड को जमा न करवाया जाना, कंपनी की धोखाधडी, आदि शामिल है।
अपने गठन से लेकर यह ऐसोसियेशन समय समय पर इस समास्या के निदान के लिये कई बैठके आयोजित कर चुकी है परन्तु कंपनी के निदेशक इस ओर कतई रुचि नहीं दिखा रहे है। अपने प्लॉट को हासिल करने के दौरान कई सदस्यों का स्वर्गवास हो चुका है या कई कुछ ऐसे है जो जीवन के ऐसे पडाव में है जो अब कोई आस नहीं लगाये हुये है।
सोढी ने बताया यह बडे ही दुख की बात है कि सरकारी तंत्रों के बीच हम सदस्यों को अपने ही निवेश के फल के लिये तरसना पड रहा है। उन्होंने बताया कि उनकी ऐसोसियेशन पूडा और गमाडा में भी शिकायत दर्ज कर चुके है तथा इसके भी अभी परिणामा नहीं निकले।

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