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पंजाब

जीरकपुर में भरभरा कर गिरी तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत, कई मजदूरों के दबे होने की आशंका, तत्कालीन ईओ, पार्षद सहित दस पर मामला दर्ज,

April 12, 2018 09:17 PM
जीरकपुर, जेएस कलेर 

नगर परिषद के अधीन आते पीरमुछल्ला में एक तीन मंजिला निर्माणधीन इमारत अचानक ढह गई जिसमे कुल 18 फ्लैट थे। वहीं दुर्घटना की खबर मिलते ही जिरकपुर पुलिसने थानामुखी पवन कुमार की घटना स्थल पर शहर में मौजूद सारा पुलिस अमला दुर्घटना स्थल की और रवाना कर दिया गया। इसी बीच
ढ़कौली पुलिस चौंकी इंचार्ज सहायक इंस्पेक्टर जगजीत सिंह की शिकायत पर उस तत्कालीन ईओ, उस समय के वार्ड र्षद अजैब सिंह जो अब भी मौजूदा ढ़कोली से पार्षद है, एसई, एसडीओ, आर्टिटेक्ट, नक्शा पास करने वाले अधिकारी, बिल्डिंग इंस्पेक्टर व अन्य इमारत बनाने वालों सहित दस कालोनाइजरों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इनमें नगर परिषद के प्रधान कुलविंद्र सिंह सोही का नजदीकी ओपी सिंगला, मनदीप सिंगला, अमित सिंगला, पवन गोयल, पु‌शपिंद्र गोयल, सुरेश सिंगला, संजीव गोयल, प्रवीण, विनोद, सुनील अग्रवाल के ‌खिलाफ धारा 420, 336, 337, 288, 427, 120बी आईपीसी के तहत केस दर्ज किया है।

जिरकपुर ट्रैफिक पुलिस के इंचार्ज मनफूल सिंह ने भारी संख्या में ट्रैफिक पुलिस को पिरमुछाला व किशनपुरा क्षेत्र की सड़कों पर तैनात कर दिया ताकि राहत और बचाव टीमें निर्विघ्न घटनास्थल पर पहुच सके। घटना का पता चलते ही मोके पर डी एस पी डेराबसी जी पी सिंह भी पहुचे जिन्होंने मोके पर फायर बर्गेड, स्थानीय हॉस्पिटल से डॉक्टरस की टीम, व एम्बुलेंस बुला कर राहत के लिए तैनात कर ली। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि मलबे में कई मजदूरों के दबे होने की आशंका है। वही मौके पर एन डी आर ऑफ व दमकल विभाग ने राहत एवं बचाव कार्य प्राम्भ कर दिया है। मलबे में कितने मजदूर दबे हैं अभी इसकी ठीक-ठीक जानकारी नहीं है। लेकिन ध्वस्त हुए निर्माण में से एक साइड से लेबर का सामान निकाला गया है जिससे आशंका बनी हुई है कि मलबे में कोई दबा हो सकता है।  
इंपीरियल गार्डन हाउसिंग सोसायटी की ओर से तीन मंजिला इमारत का निर्माण करवाया जा रहा था। ये इमारत सोसायटी की ओर से आगे ठेके पर काम देकर बनवाई जा रही है। तीन मंजिला इमारत में हर फ्लोर पर चार फ्लैट बनाए जा रहे थे।
आसपास की इमारतों के निर्माण में लगे मजदूरों ने बताया कि वे अपने काम में लगे थे कि अचानक जोर की आवाज आई। जब पलट कर देखा तो तीन मंजिला इमारत गिरकर ढेर हो गई। आपपास की इमारतों के मजदूरों ने बताया कि बिल्डिंग में काम चल रहा था। लेकिन, ये साफ नहीं कि कितने मजदूर काम कर रहे थे। पुलिस व प्रशासन के लोगों ने आसपास के मजदूरों की मदद से मलबे को हटाने का काम शुरू कर दिया है। 
जे सी बी के जरिये मलबा हटाता बचाव दल। 
कई बिल्डर बना रहे फ्लैट 
जीरकपुर में जिस जगह पर ये बिल्डिंग गिरी। वहां पर कई बिल्डरों की ओर से फ्लैट बनाए जा रहे है। बिल्डरों की ओर से फ्लैट बनाने के लिए जमीन के अलग अलग टुकड़े (दो एकड़, चार एकड़, तीन एकड़) खरीदे हुए हैं। जिन पर फ्लैट बनाए जा रहे हैं। जिरकपुर में पिछले 10 वर्ष से बड़ी तादात में 3 मंजिला फ्लैट बनाए जा रहे है लेकिन जिरकपुर शहर में बिजली, पानी और सीवरेज का जो इंफ्रास्ट्रक्चर डाला गया है वह केवल कोठियों के लिए पर था। लोगो का कहना है कि प्रशाशन को इस क्षेत्र में रेतीली जमीन होने के कारण पहले तो नक्शे स्वीकृत नहीं होने चाहिए। फिर हो गए तो नक्शे के मुताबिक भवन बनाने चाहिए। लेकिन अफसरों की लापरवाही से मकान का नक्शा पास कराने वालों ने यहाँ बहुमंजिले अपार्टमेंट खड़े कर दिए। प्रशासन चुपचाप तमाशा देखता रहा।  
पिछले लंबे समय से कालोनाइजर घरों का नक्शा पास करवा बना रहे है फ्लैट्स 
नगर काउंसिल को धोखे में रखकर जीरकपुर के कालोनाइजर घरों के नक्शे पास करवाकर फ्लैट्स बना रहे है।  जिक्रयोग है कि शहर में कालोनाइजरों द्वारा छोटी कालोनी काटने के बाद काउंसिल अधिकारियों को धोखे में रखकर या कहें मिलीभूगत से तीन मंजिला घरों का नक्शा पास करवा लिया जाता है। बाद में कालोनाइजर तीन मंजिला मकान को प्रतिमंजिल (फ्लैट) के रूप में लोगों को बेच देते हैं, तांकि कालोनी पास करवाने वाली फीस से बचा जा सकें। वही माल विभाग भी इन फ्लैट्स की रजिस्ट्री कर देता है जो कि असल में 200 गज के प्लेट को खड़ा कर 66.6 गज प्रति यूनिट के हिसाब से रजिस्ट्री कर देता है। दूसरी ओर, कालोनी को पास न करवाकर और तथाकथित फ्लैट बना कॉलोनाइजर सरकार के खजाने को सरेआम चूना लगा रहे हैं। साथ ही इन कालोनाइजर के जाल में फंसकर लोगों को बाद में बुनियादी सुविधाओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ता है।  
क्या है मामला 
क्षेत्र में कालोनाइजरो द्वारा जीरकपुर नगर काउंसिल के अधिकारियों को धोखे में रखकर अलग-अलग तीन मंजिला मकान का नक्शा पास करवा लिया गया। इसके बाद उक्त कालोनाइजर ने तीन मंजिला मकान की जगह फ्लैट ( एक यूनिट की जगह 3 यूनिट्स) बना लिए जाते, जो कानूनी रूप से अवैध है। सूत्रों से पता चला है कि काउंसिल द्वारा कालोनाइजर को अलग-अलग तीन मंजिला घर बनाने के लिए नक्शा जारी किया गया जाता है उसकी एवज में फ्लैट्स बना दिए जाते है। 

*घटना के बाद डीसी मोहाली गुरप्रीत कौर सपरा और ज़िला पुलिस प्रमुख कुलदीप सिंह चाहल ने घटना स्थान का दौरा कर नज़दीकी इमारतें सबंधित जांच करने के दिए आदेश दिए । उन्होंने एस.डी.एम.डेराबसी परमजीत सिंह को इस घटना के लिए जांच अधिकारी नियुक्त किया है। सरकारी प्रैस विज्ञप्ति में अभी तक किसी भी किस्म के जानी नुक्सान से बचाव की बात कही गई है। कांग्रेस के महासचिव दीपिन्दर ढिल्लों ने भी दौरा किया।
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