राष्ट्रीय

पारम्परिक तरीके से पुश्तैनी कार्य में लगे इलाज करने वाले हकीमों पर कसा शिंकजा

April 15, 2018 01:24 PM

नई दिल्ली:
अब समय बद गया है। पारम्परिक तरीके से पुश्तैनी कार्य में लगे लोगों का इलाज करने वाले हकीमों पर शिंकजा कसा जा रहा है। बिना किसी स्वीकृत या अनुमोदित योग्यता के किसी व्यक्ति को देशी तरीके से मरीजों का इलाज करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। इस बारे में शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि झोला छाप डॉक्टर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। फैसले में कहा गया है कि हमारे देश में आवश्यता से कम क्वालीफाइड डॉक्टर हैं। अब देश में बड़ी संख्या में देशी मेडिसीन की शिक्षा देने वाले संस्थान हैं। लेकिन आजादी के सात दशक बाद भी देश में दवाइयों के बारे में हल्की-फुल्की जानकारी रखने वाले या बिना स्वीकृत योग्यता वाले लोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं जो लाखों लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी करते हुए केरल में सदियों से चली आ रही देशी इलाज करने वाले तथाकथित वैद्य को मेडिकल प्रैक्टिस की इजाजत देने से इनकार करते हुए दी है। ये वे लोग हैं पीढ़ी दर पीढ़ी इस पेशे को अपनाते चले आ रहे हैं।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
और राष्ट्रीय ख़बरें
महिला आयोग की लोक अदालत में 35 मामलों का निपटारा नाबार्ड ने 37वां स्थापना दिवस मनाया वो भाई ही होता है... अफगानिस्तान में बसे सिख-हिन्दुओं को सहायता देगी भारत सरकार: सांपला मेडिकल कॉलेज शिक्षा की गुणवत्ता भारत के स्वस्थ भविष्य का जीवन आधार: उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति 7 और 8 जुलाई को गोवा यात्रा पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, दिल्ली के असली बॉस मुख्यमंत्री है, उपराज्यपाल नहीं कोसली-दिल्ली वाया रेवाड़ी रेल-सेवा शुरू होने का सैनिकों को बेसब्री से इंतजार दिल्ली में निजी स्वामित्व भूमि के नियोजित विकास के लिए अधिसूचना जारी इसरो ने अंतरिक्ष यात्री बचाव प्रणाली का सफलतापूर्वक किया परीक्षण