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धर्म

इन्सान कितने साल जिया बल्कि कैसे जी कर गया यह है महत्वपूर्ण

April 29, 2018 02:59 PM

चण्डीगढ़, फेस2न्यूज:
इस संसार से छोटा-बड़ा, अमीर-गरीब, निर्बल और बलवान सभी को एक दिन जाना होता है, अध्यात्मवाद में कोई इन्सान अपनी जिन्दगी कितने साल इस धरती पर जी कर गया की बजाए उसने अपना जीवन किस तरह का जिया, अर्थात घर-समाज-देश में लोगों के साथ उसका कैसा व्यवहार था, यह अधिक महत्वपूर्ण होता है, ये भाव दिल्ली से आए सन्त निरंकारी योजना एवं सलाहकार बोर्ड के अध्यक्ष के. आर. चढ्ढा ने प्रवीन नन्दवानी के ब्रह्मलीन होने पर यहां सैक्टर 30 में स्थित सन्त निरंकारी सत्संग भवन में हुए श्रद्धांजलि समारोह में उपस्थित श्रोताओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।
श्री चढ्ढा ने आगे कहा कि इन्सान का शरीर तो पिंजरे के समान है जो यहीं रह जाता है लेकिन इसमें विराजमान आत्मा पंछी की तरह उड़ जाती है। जो इन्सान अपने जीवन-काल में मानुष जन्म के उद्देश्य को पूरा कर लेते हैं वे मृत्यु से डरते नहीं क्योंकि उन्हें सत्गुरू माता सविन्द्र हरदेव से ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने बाद यह विश्वास हो चुका होता है कि इस शरीर को त्यागने के बाद मेरी आत्मा ने कहीं और नहीं बल्कि अपने निज घर में जाना है। इसके अतिरिक्त उनके परिवार के सदस्य जिन्हें ब्रह्मज्ञान की प्राप्त हो चुकी होती है वे भी यह भली भांति जान चुके होते हैं कि उनके परिवार के मृत सदस्य की आत्मा चौरासी के चक्कर में नहीं बल्कि इस घट-घटवासी परमात्मा में विलीन हो गई है जिसकारण वे रो-रो कर अपना बुरा हाल करने की बजाए परमात्मा के भाणे को मानना ही उचित समझते हैं।

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