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खेल

ग़ैर-कानूनी गतिविधियों के कारण ओहदों से बाहर हुए अधिकारी नेटबॉल खिलाड़ियों से कर रहे धोखा -एनएफआई।

May 23, 2018 08:04 PM

नयी दिल्ली/चंडीगढ़/बरनाला

नेटबॉल फेडरेशन आफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव हरीओम कौशिक ने कहा है कि फर्जी एडहॉक कमेटी के अधिकारी भी फर्जी हैं, जिनकी तरफ से दिल्ली में करवाए गए 34वें सीनियर नेश्नल नेटबॉल मुकाबलों और राजस्थान के जयपुर में करवाए गए जूनियर नेश्नल नेटबॉल चैंपिअनशिप दोनों फर्जी थे। उनके आधार पर जिन खिलाड़ियों की गरेडेशन करवाई गई थी उसे खेल मंत्रालय, भारतीय ओलंपिक संघ और संबंधित राज्यों के खेल विभागों से रद्द करवाई जाएगी।

 ग़ैर-कानूनी गतिविधियों के कारण ओहदों से खुद-बा-खुद बाहर हुए जो अधिकारी नेटबॉल खिलाड़ियों में भ्रम पैदा कर रहे हैं उनके खिलाफ माननीय पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में केस भी दायर किया हुआ है। जिसका नतीजा आने पर दोषियों को मुँह छिपाने को जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने सख़्त शब्दों से चेतावनी दी है कि मानता हासिल ऐसोसिएशनों को फर्जी बताने वाले तत्व खिलाड़ियों को भड़काना बंद करें।

एनएफआई के महासचिव हरीओम कौशिक ने प्रेसविज्ञप्ति के माध्यम से नेटबॉल खेल के समूह खिलाड़ियों और जो खिलाड़ी ख़ुद को खेल से बाहर महसूस कर रहे हैं उन्हें भी अपील की है कि यदि उन्होंने किसी भी तरह की जानकारी चाहिए तो वह अपने अपने प्रांतों में स्थापित एसोसिएशनों के प्रधानों और महासचिवों से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में नेटबॉल प्रोमोशन एसोसिएशन स्थापित है। जिसके प्रधान गोरी शंकर टंडन और महासचिव एडवोकेट करन अवतार कपिल हैं।

कौशिक ने खिलाड़ियों को जानकारी देते बताया कि पंजाब प्रांत में दो साल पहले एडहॉक कमेटी के बैनर नीचे काम कर रहे अधिकारियों ने खिलाड़ियों के साथ ही नहीं बल्कि भारतीय खेल मंत्रालय, खेल विभाग भारत सरकार, भारतीय ओलंपिक संघ, पंजाब ओलंपिक एसोसिएशन के साथ बड़ा धोखा किया है। जिसको लेकर दोषियों खिलाफ माननीय हाईकोर्ट में केस दायर करना पड़ा।

कौशिक ने समूह खिलाड़ियों से अपील की है कि वह दिल्ली में 28 दिसंबर 2016 से 3 जनवरी 2017 के बीच करवाए गए फर्जी 34वें सीनियर नेश्नल नेटबॉल मुकाबलों के सर्टिफिकेट मांगें, 2016 -2017 दौरान तैयार की एडहॉक कमेटी की ऐफीलेशन के दस्तावेजों की मांग करें, उनसे यह जवाब भी हासिल करें कि गत दो वर्ष के दौरान उनकी संस्था का क्या आधार रहा है और एनएफआई की तरफ से 7 जून 2016 को जो पत्र डिसऐफीलेट संस्था को भेजा गया था उसके अधिकारी हाईकोर्ट की डबल बैंच व एनएफआई की तरफ से बुलायी गई मीटिंग में क्यों नहीं पहुँचे।

उन्होंने आवाम से कहा कि डिसऐफीलेटड संस्था ने अपनी गलतियों पर पर्दा पाने के लिए खिलाड़ियों का कंधा इस्तेमाल कर मीडिया में धोखापूर्ण समाचार प्रकाशित करवाए। जिससे उन्होंने खेल विभाग, खेल मंत्रालय, ओलंपिक संघ व ओलंपिक एसोसिएशन के कानूनों का उल्लंघन तो किया ही, इसके साथ ही नेटबॉल खेल को भी बदनाम करने की साजिश रची है। जिसके बारे में जल्दी ही मंत्रालय व भारतीय ओलंपिक संघ से बात की जाएगी।  हरीओम कौशिक-राष्ट्रीय महासचिव नेटबॉल फेडरेशन आफ इंडिया।

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