ENGLISH HINDI Wednesday, August 22, 2018
Follow us on
हरियाणा

मिशन-एडमिशन: एक भूल रुला देगी खून के आंसू

June 08, 2018 07:50 PM

रेवाड़ी, धनेश:
जिले के सभी कालेजों में इन दिनों मिशन-एडमिशन चल रहा है, जिसमें कॉलेज प्रशासन व छात्र वर्ग व्यस्त हैं। छात्र-राजनीति करने वाले संगठन इस बार कॉलेज परिसरों से गायब हैं। छात्र खुद आधे-अधूरे ज्ञान से अथवा अपने स्तर पर जानकारी जुटाकर एडमिशन लेने की पहल कर रहे हैं। मगर ऐसा करना उनके भविष्य पर भारी पड़ सकता है।
कहावत है नीम हकीम खतरा-ए जान यानी अधूरा ज्ञान घातक होता है। मिशन एडमिशन में यह कहावत सही साबित हो रही है। आज का युवा खुद को तेज-तर्रार मानता है मगर उसकी एक भूल उसे नासमझ साबित करने के लिए काफी साबित होती है। ऐसी स्थिति में वह सबकी हंसी का पात्र बन जाता है। शिक्षाविदों की सलाह है कि छात्र मिशन एडमिशन में अपने वरिष्ठ और शुभचिंतकों की सलाह जरूर लें, अन्यथा उन्हें आॅन लाइन आवेदन करते वक्त एक भूल भविष्य में खून के आंसू रुला सकती है।    

आॅन लाइन आवेदन करते वक्त रखें आंख और कान खुले, अबकी बार एक नहीं दो सूचियां बनेंगी


अक्सर आवेदन करते वक्त नाम की स्पैलिंग, आधार कार्ड, मोबाइल अथवा बैंक खाता नंबर दर्ज करते वक्त चूक हो जाती है और यह भूल युवाओं का समय और पैसा दोनों बर्बाद करती है और उसे दर-दर के चक्कर काटने के लिए भी मजबूर कर देती है और उनकी समझदारी धरी की धरी रह जाती है। विश्वविद्यालयों में आॅन लाइन आवेदन की नई प्रक्रिया पिछले सत्र से शुरू हुई जिसने डिजीटल इंडिया की ओर कदम बढ़ाते भारत की युवा पीढ़ी को अपने घेरे में ले लिया। इससे पहले आॅफ लाइन आवेदन जमा होते थे। तब प्रवेश के दिनों में कॉलेजों में खूब चहल-पहल रहती थी। कॉलेज प्रशासन व दूसरे लोग भी चेहतों के एडमिशन कराने की सिफारिश लगाने की जुगत में रहते थे। अभिभावक भी इस दौड़ में पीछे नहीं रहते थे। पिछले सत्र से सारी परिस्थितियां बदल गई हैं।
चूंकि पिछले शैक्षणिक सत्र में केंद्रीयकृत आधार पर एक ही वरीयता सूची तैयार कर जारी की गई थी और उसी के आधार पर छात्रों के प्रवेश हुए मगर इस बार केंद्रीयकृत सूची को प्रोविजनल तथा बाद में अंतिम सूची जारी होने की बात सामने आई है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से संबंद्ध कालेजों को प्रवेश प्रक्रिया का तिथिवार विवरण उपलब्ध करा दिया गया है। कॉलेजों ने अपने स्तर पर इसके लिए तैयारियां भी की हैं और उनका असर पर कॉलेज कैंपस में नजर आ रहा है मगर इस बार अधिक भीड़-भाड़ नहीं होने के पीछे मुख्यत: तीन-चार कारण दिखाई दे रहे।
पहला, पिछले सत्र में नई प्रवेश प्रक्रिया के लागू होने के बाद अब आॅन लाइन आवेदन घर बैठकर भी किया जा सकता है। दूसरा, साइबर कैफे से भी यह काम आसानी से कराया जा सकता है। तीसरा कॉलेज प्रशासन ने प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी देने के लिए हेल्प डेस्क और हेल्प लाइन स्थापित की हैं। चौथा, आॅन लाइन आवेदन जमा करने के लिए इंटरनेट की सुविधा-युक्त एक या दो कम्प्यूटर आॅप्रेटर भी उपलब्ध कराए हैं। पांचवां, कॉलेज का एक प्रतिनिधि आवेदन के इच्छुक छात्रों एवं उनके अभिभावकों के प्रश्नों के समुचित जवाब दे रहे हैं।
राह नहीं आसान:
किसी भी पाठयक्रम में प्रवेश लेने की राह आसान नहीं है। आधार कार्ड रखने वाले ही प्रवेश प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। बैंक खाता नंबर भी अनिवार्य है। सभी दस्तावेज साथ लेकर आने पर ही आॅन लाइन आवेदन जमा हो पाएगा। इंटरनेट की उपलब्धता, सर्वर की गति और विश्वविद्यालय की साइट के लगातार चलते रहने पर आवेदन जमा होने की सारी प्रक्रिया टिकी हुई है।
आम समस्या:
आॅन लाइन प्रवेश की प्रक्रिया में शामिल होने वाले युवा राकेश का कहना है कि अक्सर ऐसा होता है कि आधार कार्ड फीड कराते वक्त मोबाइल पर एक कोड, जिसे तकनीकी भाषा में ओटीपी कहा जाता है, आता है। अगर उपरोक्त किसी भी स्थिति में ओटीपी नहीं आया तब मुसीबत का पिटारा अचानक खुल जाता है। दोबारा आधार कार्ड नंबर डालने पर साइट आधार कार्ड नंबर दर्ज होने की बात कहता रहता है। इसी प्रकार आवेदन करते वक्त कोई त्रुटि रह जाने पर, उसे दुरुस्त कराना काफी परेशानी भरा अनुभव होता है।
आवेदन प्रक्रिया:
जिले के कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया 6 जून से शुरू हो चुकी है, जोकि 22 जून तक चलेगी। सर्वर के धीमा चलने की वजह से आवेदन करने में छात्रों को परेशानी आई है। मौसम और बिजली की उपलब्धता की वजह से भी कुछ जगह परेशानी आई है। हालांकि शहर के अधिकांश कॉलेजों ने प्रवेश प्रक्रिया के आॅन लाइन आवेदन जमा कराने के लिए इनवर्टर सुविधा उपलब्ध कराई हुई मगर इस बार कॉलेजों में आवेदकों की संख्या पिछले साल से कम हैं। साइबर कैफे आवेदकों की पहली पसंद हैं।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें