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पंजाब

बादलों की डूबती नाव को ओर डूबो के चले गए हैं मोदी: भगवंत मान

July 12, 2018 06:58 PM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
आम आदमी पार्टी के संसद सदस्य भगवंत मान ने कहा कि प्रधान मंत्री नरिन्दर मोदी के पंजाब दौरे ने किसानों और मजदूरों समेत समूचे पंजाबियों को न केवल निराश किया बल्कि पूरी तरह निराश कर दिया है।
'आप' मुख्य कार्यालय की ओर से जारी प्रेस ब्यान में भगवंत मान ने कहा मलोट की रैली में प्रधान मंत्री नरिन्दर मोदी का भाषण जुमलेबाजी से ज्यादा कुछ भी नहीं था। भगवंत मान ने कहा कि 'प्रधान मंत्री जुमलेबाज थे, जुमलेबाज हैं और जुमलेबाज रहेंगे, यह बात मलोट की रैली में एक बार फिर साबित हो गई है।
भगवंत मान ने कहा कि हद तो इस बात की है कि किसान कल्याण रैली में किसानी कर्जों की बात तक नहीं की गई। जबकि पिछले एक महीने में करीब 50 किसान और खेत-मजदूर आर्थिक तंगी के चलते कर्जे के बोझ के कारण आत्म हत्याएं कर चुके हैं। किसानों की आमदन दोगुनी करने के जुमले छोड़ गए परंतु स्वामीनाथन की सिफारिशें लागू करने सम्बन्धित प्रधान मंत्री साहिब एक शब्द तक नहीं बोले। उल्टा सफेद झूठ बोल कर गुमराह करने की कोशिश की गई कि इस बार फसलों के मूल्य तय करते समय सभी लागत खर्चों को आधार बनाया गया। भगवंत मान ने कहा कि प्रधान मंत्री के इस झूठ की पोल वह (मान) पार्लियामेंट के अगले हफ्ते शुरू होने जा रहे सैशन दौरान खोलेंगे।
भगवंत मान ने कहा 'मै कोई राजनैतिक पंडित तो नहीं हूं, परन्तु मुझे यह साफ दिखाई दे रहा है कि बादल परिवार की तरफ से अपने निजी फायदों के लिए किसानों और खेत मजदूरों के नाम पर आयोजित की गई मलोट रैली बादल परिवार की डूब रही राजनैतिक नाव को ओर डूबाने का काम करेगी, क्योंकि पंजाब के किसानों, मजदूरों समेत सभी वर्गों ने बादलों को पूछना है कि जब मलोट में प्रधान मंत्री किसानों और नौजवानों के नाम पर झूठ पर झूठ तोल रहे थे तो आप (बादल दल) कौन सी मजबूरी के चलते चुप बैठे रहे? पंजाब के लोग पूछेंगे कि किसानी कर्जे और स्वामीनाथन रिपोर्ट से भागे प्रधान मंत्री को सिर्फ 'गुंमराह व जुमलेबाजी' के कारण ही सम्मानित किया गया?
भगवंत मान ने कहा कि धान के मूल्य 200 रुपए प्रति क्विंटल के वृद्धि में भी 20 रुपए प्रति क्विंटल का सीधा हेर फेर है क्योंकि पंजाब के धान की प्रचलित किस्मों के लिए यह विस्तार केवल 180 रुपए प्रति क्विंटल है। इस के इलावा पिछले साल दौरान डीज़ल पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि, खेती यंत्रों कीटनाशकों पर जीएसटी टैकस, बिजली और लेबर की महंगाई जैसे कितने ही कारण के चलते धान के मूल्य में यह विस्तार एक भ्रम से अधिक नहीं और पंजाब का किसान यह बात अच्छी तरह समझता है।

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