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एस्ट्रोलॉजी

पहली अगस्त से शुक्र होंगे कन्या राशि में एक मास के लिए नीचस्थ

July 30, 2018 11:47 AM

मदन गुप्ता सपाटू, ज्योतिर्विद्, चंडीगढ़- 098156 19620;

शुक्र ग्रह 1 अगस्त 2018, बुधवार को दोपहर 12:41 बजे कन्या राशि में गोचर करेगा और 1 सितंबर 2018, शनिवार रात्रि 23:46 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेगा। शुक्र के कन्या राशि में होने वाले इस गोचर का असर सभी राशियों पर देखने को मिलेगा। शुक्र जिसका संस्कृत भाषा में एक अर्थ है शुद्ध, स्वच्छ, भृगु ऋषि के पुत्र एवं दैत्य-गुरु शुक्राचार्य का प्रतीक शुक्र ग्रह है।

भारतीय ज्योतिष में इसकी नवग्रह में भी गिनती होती है। यह सप्तवारों में शुक्रवार का स्वामी होता है। शुक्र नाम उच्चारण में शुक्ल से मिलता हुआ है जिसका अर्थ है श्वेत या उजला। वैज्ञानिक दृष्‍टिकोण : शुक्र का व्यास 126000 किलोमीटर है और गुरुत्व शक्ति पृथ्वी के ही समान। इसे सूर्य की परिक्रमा पूरी करने में 225 दिन लगते हैं। शुक्र एवं सूर्य के बीच की दूरी वैज्ञानिकों ने लगभग 108000000 किलोमीटर मानी है।

शुक्र के अस्त दिनों में भी शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। इसका कारण यह कि उक्त वक्त पृथ्वी का पर्यावरण शुक्र प्रभा से दूषित माना गया है। यह ग्रह पूर्व में अस्त होने के बाद 75 दिनों पश्चातपुन: उदित होता है। उदय के 240 दिन वक्री चलता है। इसके 23 दिन पश्चात अस्त हो जाता है। पश्चिम में अस्त होकर 9 दिन के पश्चात यह पुन: पूर्व दिशा में उदित होता है। पुराणों के अनुसार शुक्र दानवों के गुरु हैं। इनके पिता का नाम कवि और इनकी पत्नी का नाम शतप्रभा है।

दैत्य गुरु शुक्र दैत्यों की रक्षा करने हेतु सदैव तत्पर रहते हैं। ये बृहस्पति की तरह ही शास्त्रों के ज्ञाता, तपस्वी और कवि हैं। इन्हें सुंदरता का प्रतीक माना गया है। ज्योतिष के अनुसार शुक्र रोमांस, कामुकता, कलात्मक प्रतिभा, शरीर और भौतिक जीवन की गुणवत्ता, धन, विपरीत लिंग, खुशी और प्रजनन, स्त्रैण गुण और ललित कला, संगीत, नृत्य, चित्रकला और मूर्तिकला का प्रतीक है। जिनकी कुण्डली में शुक्र उच्च भाव में रहता है उन लोगों के लिए प्रकृति की सराहना करना एवं सौहार्दपूर्ण संबंधों का आनंद लेने की संभावना रहती है।

हालांकि शुक्र का अत्यधिक प्रभाव उन्हें वास्तविक मूल्यों के बजाय सुख में बहुत ज्यादा लिप्त होने की संभावना रहती है। शुक्र तीन नक्षत्रों का स्वामी है: भरणी, पूर्वा फाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा। सौरमंडल के नवग्रहों में शुक्र का महत्व अधिक है। आकाश में शुक्र ग्रह को आसानी से देखा जा सकता है। इसे संध्या और भोर का तारा भी कहते हैं, क्योंकि इस ग्रह का उदय आकाश में या तो सूर्योदय के पूर्व या संध्या को सूर्यास्त के पश्चात होता है। आकाश में सबसे तेज चमकदार तारा शुक्र ही है। ज्योतिष और वैज्ञानिकों मानना है कि शुक्र की किरणों का हमारे शरीर और जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।

किसी के भी जीवन में शुक्र ग्रह की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यह सुंदरता का प्रतीक है। यह पुरुष में शुक्राणु का भी द्योतक है जिससे विवाह और संतान का विचार किया जाता है। ज्योतिष में यह बृषभ एवं तुला राशि का मालिक है जो मीन राशि में उच्च कहलाता है परंतु कन्या राशि में यह नीच हो जाता है। आकाश में यह सबसे चमकदार सितारा है । इसेे अ्रग्रेजी में वीनस कहते हैं। विवाहों के जब मुहूर्त निकाले जाते हैं तो सबसे पहले यही देखा जाता हैे कि कहीं शुक्र ग्रह अस्त तो नहीं ? इसे आंचलिक भाषा में तारा डूबना कहते हैं।

विवाह के दौरान इस सितारे का शुभ होना आवश्यक माना जाता है। जिसके भाग्य चक्र में यह कमजोर है, उसके विवाह या संतान मंें कठिनाई आने की संभावना रहती है। शुक्र के अन्य ग्रहों के साथ बैठने से वैदिक तथा लाल किताब के ज्योतिष में उनके विभिन्न प्रभावों का वर्णन किया गया है। जीवन में सुख-समृद्धि भी शुक्र के शुभ प्रभाव से आती है। शुक्र कलात्मकता का विकास करते हैं। यह कला, प्रेम, सौंदर्य, जीवनसाथी और भौतिक सुखों का कारक होता है। कुंडली में शुक्र के शुभ प्रभाव से व्यक्ति जीवन में घर, वाहन और समस्त सांसारिक सुखों को प्राप्त करता है। वहीं इसके अशुभ प्रभाव से जीवनसाथी से अनबन और भौतिक सुखों में कमी या परेशानियां आती हैं।

कुंडली में ग्रह स्थिति बेहतर होने से बेहतर फल प्राप्त होते हैं। वहीं ग्रह स्थिति अशुभ होने की दशा में अशुभ फल भी प्राप्त होते हैं। बलवान ग्रह स्थिति स्वस्थ सुंदर आकर्षण की स्थितियों की जन्मदाता बनती हैं तो निर्बल ग्रह स्थिति शोक संताप विपत्ति की प्रतीक बनती हैं। लोगों के मध्य में आकर्षित होने की कला के मुख्य कारक शुक्र ग्रह हैं।

कहा जाता है कि शुक्र जिसके जन्मांश लग्नेश केंद्र में त्रिकोणगत हों वह आकर्षक प्रेम सौंदर्य का प्रतीक बन जाता है। कैसा रहेगा शुक्र का प्रभाव ? यह राशिफल चंद्र राशि पर आधारित है,जो पहली अगस्त से पहली सितंबर तक ही फलित रहेगा मेष शुक्र षष्ठम भाव में संचरण करेगा। आपके विरोधियों की संख्या बढ़ सकती है इसलिए उनसे सावधान रहें, अन्यथा आप उनके कुचक्र में फंस सकते हैं। वैवाहिक जीवन में भी अशांति बनी रह सकती है। वृषभ शुक्र आपकी राशि से पंचम भाव में प्रवेश करेगा। धन में वृद्धि संभव है ।जीवनशैली में मिलेगा।

समाज में आपके मान-सम्मान में वृद्धि होने के योग हैं। वहीं जो जातक नौकरी के लिए आशान्वित हैं उन्हें नई नौकरी मिलने की संभावना है। मिथुन चतुर्थ भाव में आपको आर्थिक लाभ होने के योग हैं। इस अवधि में आप भौतिक सुख-सुविधाओं का पूरा आनंद लेंगे। घर में भी सुख-शांति का वातावरण देखने को मिलेगा।

कर्क इस दौरान आपकी किस्मत का सितारा बुलंद रहेगा। मित्रों की संख्या में वृद्धि होगी, । आर्थिक क्षेत्र में भी आपको लाभ मिलने के योग हैं और समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा। सिंह द्वितीय भाव में प्रवेश दौरान आपको विभिन्न स्रोतों से लाभ प्राप्त होने के योग हैं। इस अवधि में आप कपड़े, आभूषण अथवा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की ख़रीदारी कर सकते हैं। प्रेम जीवन के लिए यह शानदार समय रहने वाला है कन्या शुक्र आपकी राशि में गोचर करेगा और यह आपके प्रथम भाव में स्थित होगा। ऐसा कोई भी कार्य न करें जिससे आपके मान-सम्मान में कमी आए।

अविवाहित जातक परिणय सूत्र में बंध सकते हैं। वहीं विवाहितों को संतान प्राप्ति के योग हैं। तुला द्वादश भाव में जाएगा धन लाभ के योग हैं। मित्रों की ओर से भी आपको किसी प्रकार का लाभ मिल सकता है। लंबी दूरी की यात्रा अथवा विदेश जाने के योग हैं। वासनात्मक विचारों पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें।

वृश्चिक शुक्र आपकी राशि से एकादश भाव में गोचर करेगा। इस दौरान आपकी आर्थिक स्थिति मज़बूत होगी। आपके खान-पान और रहन-सहन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। प्रेम के मामलों में भी आपको सफलता मिलने की संभावना है।

धनु आपकी सेहत कुछ कमज़ोर रह सकती है । वहीं पैसों की लेनदेन में सावधानी बरतें वरना धन हानि का भय है। किसी समस्या के कारण मानसिक तनाव भी रह सकता है। किसी मुद्दे पर सीनियर्स से विवाद हो सकता है। मकर कपड़े, ज्वैलरी अथवा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स आदि ख़रीद सकते हैं। वर्तमान नौकरी में स्थानांतरण अथवा नई नौकरी मिलने के योग हैं। समाज में आपकी प्रसिद्धि बढ़ेगी। इसके अलावा घर में किसी धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन होने की संभावना है। कुंभ आपकी आर्थिक स्थिति मज़बूत रहेगी और आप धन एकत्रित करने में सफल रहेंगे। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि होने की संभावना है। छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलेगी। मीन शुक्र आपकी राशि से सप्तम भाव में गोचर करेगा।

प्रोफ़ेशनल क्षेत्र में आपको सफलता पाने के लिए कठिन परिश्रम करना होगा। जीवनसाथी से किसी बात को लेकर मनमुटाव हो सकता है। धन हानि भी संभव है यात्रा पर जा सकते हैं।

अशुभ शुक्र के लिए क्या करें: अशुभ शुक्र की शांति के लिए शुक्र से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए। जैसे चांदी, चावल, दूध, श्वेत वस्त्र आदि।

1- दुर्गाशप्तशती का पाठ करना चाहिए।

2- कन्या पूजन एवं शुक्रवार का व्रत करना चाहिए।

3- हीरा धारण करना चाहिए।

4- शुक्र का बीज मंत्र भी लाभकारी होगा।

ऊँ शं शुक्राय नमः

ऊँ हृीं श्रीं शुक्राय नमः

लक्ष्मी की उपासना करें।

सफेद वस्त्र दान करें।

भोजन का कुछ हिस्सा गाय, कौवे, और कुत्ते को दें। शुक्रवार का व्रत रखें। खटाई न खाएं। दो मोती लेकर एक पानी में बहा दें और एक जिंदगीभर अपने पास रखें। स्वयं को और घर को साफ-सुथरा रखें और हमेशा साफ कपड़े पहनें। नित्य नहाएं। शरीर को जरा भी गंदा न रखें। सुगन्धित इत्र या सेंट का उपयोग करें। पवित्र बने रहें।

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