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संपादकीय

ईवीएम में गड़बड़ी या मात्र विरोध नीति?

September 03, 2018 03:06 PM

— रोशन लाल गोयल
एवीएम का जिन्न एक बार फिर धुंआ बनकर राजनीतिक दलों की आंखों में चुभने लगा है। 2019 लोकसभा चुनावों में कुछ ही माह शेष है। राजनितिक दलों ने चुनावों को लेकर अपनी—अपनी गोटियां फिट करनी शुरू कर दी है। कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक दलों को आभास हो रहा है कि चुनावों में ईवीएम मशीन में सबसे बड़ी गड़बड़ी की संभावना हो सकती है। इसी गड़बड़ी के चलते 27 अगस्त को कांग्रेस समेत विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव आयोग के साथ एक सर्वदलीय बैठक संपन्न हुई।    

लोकतन्त्र की सुरक्षा और विश्वास के लिए चुनाव आयोग, मौजूदा सरकार और सभी विपक्षी दलों को मतदाताओं के मताधिकार के मद्देनज़र खरा उतरना अति आवश्यक है।


बैठक में सभी विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मतपत्र से मतदान कराने की मांग की है। कुछ राजनीति दलों के नेताओं का मानना है कि ईवीएम से छेड़छाड़ कर सत्‍ता पक्ष अपने हक में मतदान करवा सकता है। ईवीएम की सैटिंग में गड़बडी की जा सकती है और इस तरह सेट किया जा सकता है जिसमें मतदाता विभिन्न उम्मीदवारों को मतदान करने के लिए किसी भी बटन को दबाए, वोट सत्‍तापक्ष के उम्‍मीदवार को ही जाएगा। हालांकि कांग्रेस समेत अन्य दल और दुनिया के दूसरे देश भी अपने यहां ईवीएम की गड़बड़ी और पारदर्शिता पर सवाल उठा चुके हैं। लेकिन चुनाव आयोग बार-बार कह चुका है कि भारत में इस्तेमाल होने वाली ईवीएम से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हो सकती। मशीन का कोड पूरी तरह से एमबेडिड है, उसे न तो निकाला जा सकता है और न ही डाला जा सकता है। इस बार भी चुनाव आयोग ने इसी बात को दोहराया। हालांकि ईवीएम की जांच करने को लेकर उन्होंने पूरी तरह से प्रतिबद्धता दिखाई है।
भाजपा इन सभी दलों की मांग का विरोध कर रही है। भाजपा और उसके सहयोगी दलों का कहना है कि ईवीएम में किसी तरह की कोई छेड़छाड़ न हुई है न ही आगे आने वाले चुनावों में होगी। ईवीएम में गड़बड़ी और पारदर्शिता पर सवाल मात्र विरोध नीति है। हालांकि 2009 में भाजपा ने भी ईवीएम की गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए थे लेकिन अब जबकि विपक्षी दलों ने ईवीएम की पारदर्शिता पर सवाल उठाए है तो भाजपा इस तरह की गड़बड़ी को पूरी तरह से नकार रही है।
सवाल यह उठ रहा है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में भाजपा के पूर्ण बहुमत से विपक्षीे दल बौखलाए है कि आने वाले चुनावों में किसी तरह की कोई कोताही नहीं बरतनी या फिर कहीं ईवीएम में गड़बड़ी का अंदेशा सही तो नहीं!, जिसके चलते आने वाले लोकसभा चुनावों में मतदान मतपत्र के जरिए करवाने के पक्ष में करने की मांग रखी है। अगर विपक्षी दलों ने इस तरह की कोई मांग रखी है तो मौजूदा सरकार को निष्पक्ष और पारदर्शिता पूर्ण मतदान का समर्थन करना चाहिए। उसके लिए ईवीएम की जांच हो या फिर मतपत्र से मतदान। लोकतन्त्र की सुरक्षा और विश्वास के लिए चुनाव आयोग, मौजूदा सरकार और सभी विपक्षी दलों को मतदाताओं के मताधिकार के मद्देनज़र खरा उतरना अति आवश्यक है।    
Roshan Lal Goyal

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