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चंडीगढ़

एवांस डेंटल केयर ने सफलतापूर्वक 3डी आधारित डेंटल इम्पलांट प्लेसमेंट किया

September 22, 2018 05:22 AM

चण्डीगढ़,राकेश अष्ट
एवांस डेंटल क्लीनिक ने 3 डी कंप्यूटराइज्ड डेंटल इम्पाल्ट प्लेसमेंट करने में सफलता हासिल की है। एवांस चण्डीगढ़ का प्रतिष्ठित डेंटल क्लीनिक है और यह उपलब्धि यहां के विशेषज्ञ डा. मोहित धवन ने यूएस नागरिक 64 वर्षीय श्री क्लिफर्ड एश के दातों को लेकर हासिल की है। श्री एश दांतों के रोगों के चलते करीब 10 पूर्व अपने सभी दांत खो चुके थे।

 इस अवसर पर  डेंटल केयर के निदेशक डा. मोहित धवन ने कहा कि मरीज के जबड़े के 3डी इमेज के आधार पर हमने हड्डी की हालत को जाना और उसके अनुसार सही साइज का इम्पलांट तैयार किया गया। इस इम्पलांट को स्वीडन की कंपनी से तैयार करवाया गया और यहां ला कर उसे सही और सटीक तरीके से फिट किया गया। 3 डी टैक्नॉलोजी की सहायता से बिल्कुल स्टीक बोन डिटेल तैयार की जा सकती है और हम यह पता लगा सकते हैं कि कृत्रिम हड्डी की कितनी मात्रा में आवश्यकता है और हड्डी की सतह को कवर करते के लिए कितने मैश की आवश्यकता है।

डा. मोहित ने कहा कि हमें इस बात की घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि इस ग्लोबल टैक्नालजी को हम विश्व बाजार की तुलना में करीब 10 गुणा कम लागत पर उपलब्ध करवा रहे हैं। यह भी बता दें कि यूएस में कोई भी बीमा कंपनी इस तरह के खर्चे को कवर नहीं करती। यह एक बेहतरीन तरीका है जिससे डेंटल इम्पलांट प्लेसमेंट को सटीकता के साथ लगाया जा सकता है। इससे किसी प्रकार का कोई साइड इफेक्ट जैसे ब्लीडिंग वगैरह नहीं होता है। भारत में इसे बेहद वाजिब दामों पर किया जा सकता है। यही वजह है कि विश्व भर से मरीज इसके लिए भारत का रूख करते हैं। यहां के परिणाम भी विश्व स्तर के हैं, यही वजह है कि भारत और विशेष तौर पर चण्डीगढ़ विश्व मानचित्र पर एक अहम डेंटल टूरिज्म डेस्टीनेशन के तौर पर उभर कर सामने आया है।

श्री क्लिफर्ड एश हाई ब्लड प्रेशर के साथ साथ कोरोनरी रूकावट के रोग से पीडि़त रहे हैं। इसके अलावा उन्हें हैपाटाइटिस भी हुआ था जिसकी वजह से अतिरिक्त ब्लीडिंग होने की संभावना थी। यही कारण था कि उन्हें 24 घंटे मानीटर करना पड़ा ताकि ज्यादा ब्लीडिंग न हो और न ही कोई और सर्जरी संबंधी जटिलतायें पैदा हों।

इडेनटूजिज्म यानि दातों का न होना एक बेहद निरूत्साहित कर देने वाली और सामाजिक शर्मिंदगी देने वाली स्थिति होती है। 64 साल के श्री एश के लिए भी यह स्थिति कुछ ऐसी ही थी। अब तक वो खाने पीने में असमर्थ थे। सामाजिक जीवन भी बेहद सीमित था। यूएसए के मिशिगन में इसका इलाज 1 लाख यूएस डालर के आसपास था जोकि उनके लिए करवा सकना करीब करीब नामुनकिन था। इस तरह के इम्पलांट बीमा कंपनियां भी कवर नहीं करती हैं। ऐसे में यूएस में इनका इलाज करवाना बेहद खर्चीला है। एवांस डेंटल केयर ग्लोबल मंच पर एक ऐसा क्लीनिक है जहां इसका इलाज न केवल बेहद वाजिब है साथ ही बेहद विश्वसनीय और स्तरीय भी है।

3 डी रेडियोग्राफिक्स हड्डी की कमियों को देखने के लिए इस्तेमाल की जाती है साथ ही जहां सर्जरी की जानी है उस स्थान की निशानदेही करने के लिए इसका इस्तेमाल होता है। चबाते वक्त कहां पर दबाव पड़ता है, इसकी जांच होती है। 3 डी गाईड की सहायता से इम्पलांट को जबड़े में सही स्थान पर लगाया जाता है। 3 डी प्रिटिंग साल 2010 के बाद से चलन में आई है। जबड़े की 3 डी प्रिटिंग 2015 से कैंसर रोगियों के इस्तेमाल की जा रही है।

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