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डिफ़ाल्टर बनने वाले को सार्वजनिक नहीं करने पर सूचना आयोग का आरबीआई गवर्नर को नोटिस

November 05, 2018 06:13 PM

नई दिल्ली, संजय मिश्रा:
केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने जानबूझकर बैंक ऋण नहीं चुकाने वालों की सूची को सार्वजनिक नहीं करने एवं इस संबंध में जारी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की भी अनुपालना नहीं करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आयोग ने आरबीआई के साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय से भी फंसे हुए कर्ज पर आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के पत्र को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। आयोग ने आरबीआई गवर्नर को 16 नवम्बर 2018 से पहले इसका कारण बताने का निर्देश देते हुए पूछा है कि उनके खिलाफ क्यों न अधिकतम जुर्माना लगाया जाए?
ज्ञात हो कि विलफूल लोन डिफ़ाल्टर की सूची को जारी करने के बारे में तत्कालीन केन्द्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखते हुए 50 करोड़ या इससे अधिक के लोन को जानबूझकर नहीं चुकाने वाले की लिस्ट को जारी करने को कहा था, जिसमें आरबीआई द्वारा टालमटोल करने से नाराज केन्द्रीय सूचना आयोग ने गवर्नर ऊर्जित पटेल से यह बताने को कहा है कि सूचना आयोग एवं सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अनुपालना नहीं करने पर क्यों न आपके ऊपर अधिकतम जुर्माना लगाया जाए।
केन्द्रीय सूचना आयोग के आयुक्त श्रीधर आचार्युलू ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि पटेल ने गत 20 सितम्बर को सीवीसी में कहा था कि सतर्कता पर सीवीसी की ओर से जारी दिशानिर्देश का उद्देश्य अधिक पारदर्शिता, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा की संस्कृति को बढ़ावा देना तथा उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले संगठनों में समग्र सतर्कता प्रशासन को बेहतर बनाना है। लेकिन पारदर्शिता कानून पर आरबीआई गवर्नर और डिप्टी गवर्नर के कहनी एवं कथनी मे बहुत फर्क है यानि उनके बयान एवम उनकी वेबसाइट पर दी गई जानकारी का आपस में कोई मेल नहीं है। आयोग ने कहा कि जयंती लाल मामले में सीआईसी के आदेश का सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि किये जाने के बावजूद भी आरबीआई सतर्कता रिपोर्टों और निरीक्षण रिपोर्टों में अत्यधिक गोपनीयता बरत रहा है। हालांकि इस अवज्ञा के लिए केन्द्रीय बैंक के लोक सूचना अफसर को दंडित करने से किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी क्योंकि उन्होंने तो शीर्ष प्राधिकारियों के निर्देश पर कार्य किया है। सूचना आयुक्त आचार्युलू ने कहा कि, ‘आयोग गवर्नर को डीम्ड पीआईओ मानता है जो कि खुलासा नहीं करने और उच्चतम न्यायालय एवं सीआईसी के आदेशों को नहीं मानने के लिए जिम्मेदार हैं।

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