ENGLISH HINDI Friday, November 16, 2018
Follow us on
राष्ट्रीय

भारतीय रुपे कार्ड कि लोकप्रियता से अमरीकी मास्टर कार्ड हताश

November 05, 2018 06:18 PM

चंडीगढ/नई दिल्ली, संजय मिश्रा:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा स्वदेशी पर ज़ोर देने की पहल के तहत स्वदेशी भुगतान नेटवर्क रुपेकार्ड की बढ़ती लोकप्रियता से अमरीकी मास्टर कार्ड एवं वीजा कार्ड के बिजनेस में भारी गिरावट आई है और वो परेशान एवं हताश है।
दरअसल, मोदी ने कहा था कि स्वदेसी रुपेकार्ड का इस्तेमाल करना, देश की सेवा करना है क्योंकि इसका ट्रांजैक्शन फी देश में ही रहता है, विदेश नहीं जाता। भारत में रुपे कार्ड का संचालन नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के द्वारा किया जाता है।
जून 2018 में अमेरिकी पेमेंट्स कंपनी मास्टरकार्ड ने अपनी सरकार से भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की शिकायत की थी कि मोदी घरेलू पेमेंट्स नेटवर्क रुपे को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा ले रहे हैं और मोदी की इस स्ट्रैटिजी से उसे नुकसान हो रहा है। वैसे तो रुपे को मोदी सरकार का साथ मिलने से पेमेंट्स सेक्टर की वैश्विक कंपनियों का परेशान होना लाजिमी है, लेकिन इस कदर कि भारतीय प्रधानमंत्री की शिकायत करनी पड़ जाए! यह वाकई हैरतअंगेज है।
मोदी सरकार ने 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी के ऐलान के साथ ही 'कैशलेस इंडिया' की ओर कदम बढ़ाया। भारत में बैंक अब छोटे-छोटे कस्बों तक अपनी पहुँच बना रहे हैं और नोटबंदी के कारण डिजिटल ट्रांजैक्शन भी रफ्तार पकड़ रही है। यही वजह है कि मास्टरकार्ड समेत पेमेंट्स सेक्टर की दिग्गज कंपनियां भारत को एक बड़ा बाजार मानने लगी है, जहां उनके विस्तार की असीम संभावनाएं बन सकती हैं। आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि अगस्त महीने में 14 करोड़ 42 लाख क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन हुए, जिनके जरिए 4 खरब 79 अरब 80 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। वहीं, 35 करोड़ 70 लाख डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन के माध्य से 4 खरब, 89 अरब, 70 करोड़ रुपये इधर से उधर हुए। बैंकों की ओर से जारी डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स से ट्रांजैक्शन मास्टरकार्ड और वीजा या रुपे जैसी पेमेंट कंपनियों के जरिए हो पाता है, जो हर ट्रांजैक्शन पर कुछ शुल्क वसूलते हैं।
ज्ञात हो कि साल 2012 में नैशनल पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा तैयार किया गया स्वदेसी पेमेंट सिस्टम रुपे ने भारतीय पेमेंट्स मार्केट पर दोनों अमेरिकी कंपनियों (मास्टरकार्ड एवं वीजा) का दबदबा काफी हद तक खत्म कर दिया ।
मास्टरकार्ड उन करोड़ों भारतीयों पर भी नजर जमाए हुए है जिनके हाथ में कार्ड अभी पहुंचे ही नहीं। यहाँ भी रुपे को विदेशी प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त हासिल है क्योंकि सरकार उसे ही बढ़ावा दे रही है। मसलन रुपे डेबिद कार्ड एवं किसान क्रेडिट कार्ड रुपे आधारित ही है। इतना ही नहीं, डेबिट कार्ड्स भी तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
ज्ञात हो कि मास्टर कार्ड एवं वीजा कार्ड के मुक़ाबले NPCI का अपना अलग पेमेंट मोड है जिसे UPI के नाम से जाना जाता है। अगस्त महीन में 31 करोड़ 20 लाख बार इस पेमेंट मोड के इस्तेमाल से 5 अरब 42 करोड़ 10 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन हुआ जो रुपे कि लोकप्रियता दिखाने को काफी था।
मास्टरकार्ड ने अमेरिकी सरकार से मांग की है कि वो भारत सरकार के सामने यह प्रस्ताव रखे कि भारत सरकार रुपे से होनेवाली आमदनी को लेकर लोगों मे भ्रम ना फैलाये एवं जिस विशेष प्रयास के तहत रुपे को बढ़ावा दे रही है, उसे रोके । हालांकि इस मसले पर रॉयटर्स के सवाल के जवाब में मास्टरकार्ड ने कहा कि वह भारत सरकार की पहल का भरपूर समर्थन करती है और उसने भारत में बड़ा निवेश भी कर रखा है। लेकिन, कंपनी USTR नोट के वक्तव्यों पर टिप्पणी नहीं कर सकती।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
और राष्ट्रीय ख़बरें