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कार्तिक पूर्णिमा 23 नवंबर शुक्रवार को: करें आराधना

November 22, 2018 09:00 PM

मदन गुप्ता सपाटू ज्योतिर्विद्

 कार्तिक पूर्णिमा, तुलसी विवाहोत्सव के पूरा होने की तिथि है। भीष्म पंचक भी इस दिन समाप्त हो जाते हैं। सिख धर्म के पहले गुरु औरसंस्थापक गुरु नानक देव का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।इस दिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिनगुरुद्वारों और अन्य स्थानों पर कई तरह के धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमका आयोजन किया जाता है। सिख धर्म के अनुयाइयों के अलावा अन्य धर्म केलोग भी इस दिन को बड़े ही धूमधाम से प्रकाश उत्सव और गुरु पर्व के रूप मेंमनाते हैं। गुरुनानक देव ने समाज को एकता में बांधने और जाति-पाति कोमिटाने के लिए कई उपदेश दिए थे।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा कार्तिक पूर्णिमा कहलाती है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा या गंगा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन पवित्र नदी का स्नान, दीपदान, भगवान की पूजा, आरती, हवन और दान का बहुत महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान करने से पूरे साल जितना गंगा स्नान का फल प्राप्त होता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा पर अगर कृतिका नक्षत्र हो तो इसे महा कार्तिकी कहा जाता है । कृतिका नक्षत्र में चंद्रमा हो और विशाखा नक्षत्र में सूर्य हो तो पद्मक नामक योग होता है। इस दिन चंद्रोदय के समय मंगल ग्रह के स्वामी भगवान कार्तिकेय की माताओं- शिवा, संभूति, प्रीति, संतति,अनसूया और क्षमा आदि छह कृत्तिकाओं का पूजन करना चाहिए। रात्रि में व्रत करके यदि वृष (बैल) का दान किया जाए तो शिव पद की प्राप्ति होती है। सत्ता बचाने और हासिल करने के लिए संघर्षरत नेताओं को आज के दिन अवश्य स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना करनी चाहिए। गाय, घोड़ा और घी आदि का दान सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। जो लोग मेष, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, मकर और मीन लग्न में पैदा हुए हैं, उन्हें आज के दिन ही पूर्णिमा का व्रत शुरू कर साल की सभी पूर्णिमा का व्रत करना चाहिए। इससे विशेष लाभ होगा। जिन लोगों का मंगल नीच राशि कर्क में है, उन्हें इस दिन मंगल ग्रह के स्वामी कार्तिकेय की विशेष आराधना कृष्णा नदी के तट पर स्थित दूसरे ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन में जरूर करनी चाहिए।

कार्तिक पूर्णिमा की शाम को ही विष्णु का मत्स्य अवतार हुआ था। ब्रह्मा जी का पुष्कर में आज के दिन ही अवतरण हुआ था।

मान्यता है कि इस दिन इस चावल दान करना बेहद शुभ होता है. चावल का संबंध च्रंद से है इसलिए कहते हैं कि ये शुभ फल देता है. कार्तिक पूर्णिमा के दिन घर को साफ रखना चाहिए. इसी के साथ ही घर के दरवाजे पर रंगोली बनाना भी बहुत शुभ माना जाता है. इस कार्तिक पूर्णिमा को विशेष समृद्धि योग बन रहा है, इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाना बहुत शुभ होगा.

जल चढ़ाने के बाद 108 बार ओम नम: शिवाय का जाप भी करें.

पूजा विधि

*आप प्रातः काल शीघ्र उठकर सूर्य देव को जल अर्पित करें. जल में चावल और लाल फूल भी डालें.

*सुबह स्नान के बाद घर के मुख्यद्वार पर अपने हाथों से आम के पत्तों का तोरण बनाकर बांधे.

*सरसों का तेल, तिल, काले वस्त्र आदि किसी जरूरतमंद को दान करें.

*सायं काल में तुलसी के पास दीपक जलाएं और उनकी परिक्रमा करें.

*इस दिन ब्राह्मण के साथ ही अपनी बहन, बहन के लड़के, यानी भान्जे,बुआ के बेटे, मामा को भी दान स्वरूप कुछ देना चाहिए.

*जब चंद्रोदय हो रहा हो, तो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी का आशीर्वाद मिलता है. 

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