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जीरकपुर ट्रैफिक जाम: समस्या समाधान और कारण

December 01, 2018 06:43 PM
जेएस कलेर
जीरकपुर में ट्रैफिक जाम सबसे आम और परेशान कर देने वाली समस्याओं में से एक है। जीरकपुर की सड़कों पर पिछले 15 सालों से यातायात की भीड़ दिन-पर-दिन बढ़ती जा रही है और शहर में बढ़ती हुई जीरकपुर नगर काउंसिल के अधिकारियों की शहर में बिना चैकिंग के चल रही विकासशील गतिविधियाँ सार्वजनिक परिवहन के आधारिक संरचना की विफलता को दर्शाती है। दुख की बात है, लेकिन यह सच्चाई है कि ट्राइसिटी के सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से एक जीरकपुर, अपने गलत कारणों जैसे यातायात भीड़ और प्रदूषण के लिए मशहूर है। वास्तव में, जीरकपुर की सड़कों पर बढ़ती यातायात की भीड़ शहर की एक निराशाजनक रूप रेखा प्रस्तुत करती है। 
 
 
जीरकपुर में यातायात की भीड़ के प्रमुख कारण
 
हाल ही के वर्षों में शहर की सड़कों पर वाहनों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। गौर से नोट करने से पता चलता है कि जीरकपुर की अधिकांश महत्वपूर्ण सड़कों पर लाखों वाहन चल रहे हैं।
शहर से होकर गुजरने वाले वाहनों के अनुपात में सड़कों का विस्तार नहीं हो रहा है, इससे पता चलता है कि विस्तार बढ़ती आबादी के विपरीत नहीं है।  
जीरकपुर के चौराहों पर किसी भी वाहन को गुजरने में लगभग 180 से 220 सेकंड तक का समय लगता है, यह व्यस्ततम समय विशेष रूप से यातायात भीड़ की अगुवाई करता है।
एक अन्य प्रमुख कारण यह है कि जीरकपुर की सड़कों पर मिश्रित यातायात की विशेषता है, जिसमें व्यक्तिगत वाहन, बसों, ट्रकों, तीन पहिया वाहन, दोपहिया वाहन और पैदल चलने वाले लोग शामिल हैं। इससे यातायात के प्रबंधन में समस्याएं पैदा होती हैं और इससे यातायात चालन में भी विलंब होता है। 
एक और महत्वपूर्ण कारण यह है कि जीरकपुर की आबादी में वृद्धि हुई है और शहर में पिछले 10 सालों से जनसंख्या के अनुपात में कोई प्लानिंग नहीं कि गई है। 
जीरकपुर में सार्वजनिक परिवहनों की कमी है। बस सेवाओं के बावजूद, परिवहन व्यवस्था बढ़ती आबादी के साथ तालमेल रखने में सक्षम नहीं है। जिसके परिणामस्वरूप अधिक से अधिक लोग अपने निजी वाहनों का उपयोग करते हैं, जिससे सड़कों पर भीड़ का जमावड़ा लगा रहता है।
शहर की यातायात की भीड़ में विभिन्न स्थानों में बिना प्लांनिग के सड़कों बीच बनाए गए कट्स, क्षतिग्रस्त सड़कें और सड़कों की होने वाली मरम्मत अहम भूमिका निभाते हैं। 
परिणाम 
इसमें कोई संदेह नहीं है कि अनावश्यक देरी और वाहनों की कम गति यातायात की भीड़ में मुख्य योगदान देते हैं।
यह ज्यादातर लोगों के लिए निरर्थक गतिविधि के रूप में सामने आया है, जब लोग यातायात भीड़ में फंस जाते हैं, तो वह देर से अपने कार्यस्थल पहुँचते हैं और जिसके कारण घर पहुँचने में भी देर हो जाती है।
जीरकपुर में यात्रा और ड्राइविंग बहुत ही असुरक्षित होने के कारण सड़क यातायात संबंधी मुत्युदर भी काफी अधिक है।
यातायात की भीड़ के कारण सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि हुई है। वास्तव में, ट्राइसिटी में से जीरकपुर में दुर्घटना दर सबसे अधिक है।
यहाँ की विडंबना यह है कि हर कोई जल्दी में होता है, लेकिन समय पर कोई भी नहीं पहुँचत पाता।
जीरकपुर में यातायात की भीड़ का प्रमुख कारण यह भी है कि यहाँ के लोग यातायात नियम और लाल-बत्ती (रेड लाइट) का पालन नहीं करते हैं।
यात्रा के समय का पूर्वानुमान करने में -असमर्थ होना
*ईंधन की बर्बादी।
*वायु और ध्वनि -प्रदूषण में इजाफा होना।
*वाहनों की टूट फूट।
*यातायात में सड़क पर चलने वाले लोगों द्वारा रोड़ रेज के बढ़ते मामलें।
*यातायात भीड़ के कारण आपातकालीन वाहनों को भी असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। 
क्या कदम उठाए जा सकते हैं ? 
यातायात के उचित परिगमन के लिए जीरकपुर ट्रैफिक पुलिस व जीरकपुर नगर काउंसिल द्वारा आपसी तालमेल से कुछ तत्काल कदम उठाए जाने की आवश्कता हैः 
*बेहतर और विकसित सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की योजना बनाना।
*विभिन्न आकार और वजन वाले वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए अलग-अगल सड़कों या लेन का निर्माण कराना।
*कट्स वाली जगहों पर फ्लाईओवर या अंडरपास बनाना
*शिक्षा, विज्ञापन और सख्त प्रवर्तन के माध्यम से यातायात सुरक्षा और यातायात नियमों को बढ़ावा देना।
*वाहन की रूप रेखा में सुधार करने पर जोर देना।
*निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए प्रचुर साधन और सख्त नीतियों को लागू करना।
*प्रमुख सार्वजनिक परिवहन की भीड़-भाड़ वाली सड़कों के लिए सार्वजनिक परिवहन के लागत प्रभावी, पर्यावरण-अनुकूल और नए कुशल तरीके अपनाना।
*सार्वजनिक परिवहन और पैदल चलने वाले यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करना।
*शहर में बनाए गए मनमर्जी के बस अड्डों को शहर से बाहर कर एक बस स्टैंड बनाना
*रिंग रोड पीआर-7 को शीघ्र शुरू करना 
*अंतिम लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पैदल चलने वाले और साइकिल चलाने वालों को प्रोत्साहित करना।
इस तरह के उपायों की कार्यसाधकता काफी हद तक लोगों, सड़क उपयोगकर्ताओं, पुलिस और कानून के प्रवर्तकों पर निर्भर करती है।
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