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अयोध्या में राम मंदिर का फैसला अदालत को जनभावनाओं के अनुरूप ही करना होगा: इंद्रेश कुमार

December 03, 2018 07:36 PM

ज्वालामुखी,(विजयेन्दर शर्मा) ।

मुस्लिम राष्टरीय मंच के अध्यक्ष आरएसएस नेता इंद्रेश कुमार ने कहा है कि अयोध्या में मस्जिद का कोई अस्त्तिव न तो पहले था, न ही भविष्य में होगा। व हां भव्य राम मंदिर ही बनेगा। इसका फैसला अदालत को जनभावनाओं को देखकर ही करना होगा।  न कि कानूनी नजरिये से। 

ज्वालामुखी मंदिर में दर्शन के बाद  डा राजीव कुंदु के आवास पा पत्रकारों को संबोधित करते हुये आर एसएस नेता ने कहा कि जिस तरीके से काबा, हरमंदिर साहब और वेटिकन को बदला नहीं जा सकता है, उसी तरह राम जन्मस्थान भी बदला नहीं जा सकता है. यह एक सत्य है। राम लाल अयोध्या में ही विराजमान होंगे।

उन्होंने कहा कि अदालत के बर्ताव से देश में लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है। चूंकि पहले तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एम खानविलकर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की बेंच ने दो एक के बहुमत से फैसला दिया था कि 1994 के संविधान पीठ के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत नहीं है।  जिसमें कहा गया था कि मस्जिद में नमाज पढना इस्लाम का अभिन्न हिस्सा नहीं ह। इसके साथ ही बेंच ने कहा था कि 1994 का इस्माइल फारुखी फैसला सिर्फ जमीन अधिग्रहण को लेकर था।  संविधान पीठ ने कहा था कि जमीनी विवाद से इसका लेना देना नहीं इसलिए सिविल मामले की सुनवाई होगी।  लेकिन बाद में अदालत में मामला पुनर्विचार के लिये आया।  जो कि नहीं होना चाहिये था। 

उन्होंने कहा कि इस समय सुप्रीम कोर्ट की पीठ अयोध्या विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 13 अपीलों पर सुनवाई कर रहा है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ के इस विवादित स्थल को इस विवाद के तीनों पक्षकार सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और भगवान राम लला के बीच बांटने का आदेश दिया था।  लेकिन बंटवारा नहीं किया गया। 

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