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पंजाब

मास्टर प्लान की अनदेखी, नहीं सैटबैक और पार्किंग सुविधा

December 05, 2018 07:24 PM

जिरकपुर, जे एस कलेर:
नगर काउंसिल की आंखों के सामने शहर में नियम के विरूद्ध बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो गई है। कुछ स्थानों पर रोड के नक्शे के विपरित ही कॉम्प्लैक्स खड़े कर दिए गए। कहीं एक मंजिल की अनुमति लेकर दो-तीन मंजिलें तक बना दी गई हैं।
मास्टर प्लान की पालना कराने वाले जिम्मेदार नगर काउंसिल के बिल्डिंग ब्राँच की आंखों के सामने शहर में नियम विरूद्ध बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो गई है। इन मंजिलों के निर्माण में सैटबैक और पार्किंग तक की जगह नहीं छोड़ी गई। इतना ही नहीं कुछ ने भवन निर्माण की अनुमति लेने के लिए पहले तो नक्शे में पार्किंग छोड़ दी, बाद में वहां पार्किंग खत्म कर दुकानें बना दी। आलम यह है कि इन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पार्किंग सुविधा नहीं होने से यहां आने वाले चार पहिया और दुपहिया वाहन सड़क के दोनों ओर खड़े किए जाते हैं। जिससे आए दिन शहर में जाम की स्थिति रहती है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई इलाकों में तो आवासीय कॉम्प्लैक्सों में रहने वाले लोग भी सड़कों पर वाहनों की पार्किंग करते हैं। ऐसे एक-दो कॉम्प्लैक्स नहीं, शहर में इनकी तादाद बहुतायत में है। वहीं जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि जब यह अवैध कॉम्पलैक्स बन रहे थे तो उन्होंने इनको रोकना-टोकना उचित क्यों नहीं समझा? अब निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने जब मास्टर प्लान की पालना को लेकर सख्त आदेश कर दिए है तो फिर इन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है?
2010 के बाद ज्यादा उल्लंघन:
जीरकपुर शहर में वर्ष 2010 के बाद सबसे अधिक मास्टर प्लान का उल्लंघन किया गया। वर्ष 2013 तक प्रॉपर्टी में जबरदस्त बूम रहा। उस दौरान जमीन खरीद-फरोख्त जमकर हुए। आवासीय जमीनों को व्यवसायिक बना दिया गया। बहुत से मालिकों ने तो निर्माण की मंजूरी तक नहीं ली।
आवासीय निर्माण की अनुमति लेकर ज्यादातर ने व्यवसायिक इमारतें बना डाली, जबकि ऐसा किया जाना मास्टर प्लान के विपरित है। शहर में वीआईपी रोड, बलटाना रोड़, ढकोली रोड, लोहगढ़, पभात गांव, लोहगढ़ गांव, पीरमुछल्ला तथा शिवा एन्क्लेव सहित अन्य क्षेत्रों में ऐसे कई बहुमंजिला भवन बने हुए हैं, जिसमें सैटबेक और पार्किंग नहीं छोड़ी हुई है। यहां आने वालें वाहनों की रोड पर ही पार्किंग होती है।
ऐसे अवैध कार्यों में नगर परिषद पर काबिज पार्षद बने बैठे कुछेक बिल्डरों ने आनन—फानन में मकान खरीदने वाले वांशिदों को सब्जबाग दिखा कर काफी चांदी कूट ली जहां सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं। आने वाले समय में जिरकपुर जैसे शहर में सिर फुटव्वल की स्थिति पैदा हो जाएगी ये कहा जाए तो भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। 

राजस्व का बड़ा नुकसान:
मास्टर प्लान की पालना नहीं होने से पंजाब सरकार सहित नगर काउंसिल जीरकपुर को भी राजस्व का भी बड़ा नुकसान हुआ है। आवासीय की परमिशन लेकर व्यवसायिक भवन खड़े कर लिए गए। यदि ऐसे सभी भवन को नियमानुसार व्यवसायिक में तब्दील किया जाता तो नगर काउंसिल जीरकपुर को बड़ा राजस्व मिल सकता है।

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