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राष्ट्रीय

थैले का अलग से 5 रुपया लेने पर लाईफस्टाईल स्टोर को 13000 का जुर्माना

January 07, 2019 10:37 AM

चंडीगढ, संजय मिश्रा:
अपने ग्राहकों से सामान के साथ थैले की कीमत 5 रुपया अलग से वसूलना चंडीगढ़ के एलांते मॉल स्थित लाईफस्टाईल इंटरनेशनल को भारी पड़ गया, चंडीगढ़ के उपभोक्ता मंच ने स्टोर को थैले की कीमत 5 रुपया लौटाने के साथ 10000 रुपया उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने, 1500 रुपया शिकायतकर्ता को मानसिक परेशानी का मुआवजा एवं 1500 रुपया मुकदमा खर्च के रूप में अदा करने का आदेश दिया है।    

स्टोर द्वारा सभी ग्राहकों से थैले की अलग से कीमत वसूली को नाजायज बताते हुए इसे "अनुचित व्यापार ब्यवहार बताया"


चंडीगढ़ के उपभोक्ता अधिवक्ता पंकज चण्डघोटिया एवं संगीता चण्डघोटिया ने चंडीगढ़ के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एलांटे माल में लाईफस्टाईल इंटरनेशनल प्राईवेट लिमिटेड से कुछ खरीददारी की। बास्केट में सामान को रखकर जब बिलिंग काउन्टर पर बिल बनवाया गया तो मौजूद कैशियर ने सामान ले जाने के लिए स्टोर की तरफ से दिए जाने वाले थैले का अलग से 5 रूपये की मांग रखी, जिसपर कोई और उपाय न देख कर शिकायतकर्ता ग्राहक को मजबूरन थैले की कीमत 5 रूपये अलग से देना पड़ा। स्टोर मैनेजर से शिकायत करने पर बताया गया कि शॉपिंग के दौरान आप अपना थैला लाया करें अन्यथा स्टोर से थैले अलग से लेने पर उसकी कीमत अलग से चुकानी होगी। स्टोर मैनेजर के इस रवैये की शिकायत चंडीगढ़ के उपभोक्ता मंच को दी गई। शिकायत में स्टोर द्वारा सभी ग्राहकों से थैले की अलग से कीमत वसूली को नाजायज बताते हुए इसे "अनुचित व्यापार ब्यवहार बताया" और ये भी कहा गया कि स्टोर में कहीं भी नोटिस नहीं लगाया गया है कि थैले की कीमत अलग से वसूली जायेगी, जो की उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के विरूद्ध है।
फोरम के समक्ष सुनवाई के दौरान स्टोर मैनेजर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार के द्वारा प्लास्टिक बैग को प्रतिबंधित करने के बाद स्टोर के पास कागज़ के बैग में सामान देने के अलावा और कोई रास्ता नहीं बचा। प्लास्टिक बैग के तुलना में कागज़ के बैग की कीमत ज्यादा पड़ती है, फिर बैग लेना या ना लेना ये पूर्णतः ग्राहक के ऊपर निर्भर है। ग्राहक अपना बैग साथ लेकर आ सकता है। स्टोर मैनेजर ने बताया कि शिकायतकर्ता से पूछकर ही उसे कागज़ के बैग दिए गए एवं उसकी कीमत वसूली गई, और इस तरह स्टोर ने कोई भी अनुचित व्यापार व्यवहार नहीं किया है।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फोरम के मेंबर सुरजीत कौर ने कहा कि सरकार के द्वारा प्लास्टिक बैग को बैन करने का मतलब ये कतई नहीं है कि स्टोर को अपने ग्राहकों से दूसरे तरह के थैले की कीमत वसूलने का अधिकार मिल गया। सभी तरह के स्टोर द्वारा अपने ग्राहकों को उनके सामान को ले जाने के लिए थैले मुफ्त में दी जाती है। फिर लाईफस्टाईल इंटरनेशनल द्वारा अपने ग्राहकों को दिए जाने वाले पेपर बैग में दोनों तरफ स्टोर के विज्ञापन छपे हुए है, मतलब कि स्टोर अपने दुकान का विज्ञापन भी थैले के माध्यम से आमजन को देता है और आमजन से ही उसकी कीमत भी वसूलता है जो कि कानूनन "अनुचित व्यापार व्यवहार" की श्रेणी में आता है जिसके लिए वह दंड का पात्र है।
फोरम ने उपरोक्त शिकायत संख्या 438 ऑफ़ 2018 का निपटारा करते हुए प्रतिपक्ष स्टोर को आदेश दिया कि वो शिकायतकर्ता से कागजी थैले के एवज में वसूल किये गए 5 रूपये को वापस करे, शिकायतकर्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए 1500 रुपया का मुआवजा एवं मुकदमा खर्च के तौर पर 1500 रूपये का भुगतान शिकायतकर्ता को आदेश मिलने की तिथि से 30 दिनों के भीतर करे। उपरोक्त के अलावा स्टोर उपभोक्ता कल्याण कोष में भी 10000 रुपया जमा कराये। 30 दिन तक आदेश के अनुपालना नहीं होने पर स्टोर उपरोक्त राशि पर 12% की दर से ब्याज भी देने का भागी होगा।

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