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पंजाब

15 लाख से लगवाए 12 सीसीटीवी कैमरे हैं खराब, ट्रैफिक पुलिस ने एमसी को लिखे 13 लेटर, फिर भी नहीं हुए रिपेयर

January 09, 2019 10:18 PM
जीरकपुर, जे एस कलेर:
जीरकपुर लगातार रेजिडेंशियल व कमर्शियल हब बन कर उभर रहा है और लोग देश विदेश से यहां रहने आ रहे हैं। जहां बाहरी लोग आकर रहेंगे, वहां क्राइम भी बढ़ेगा। ऐसे में शहर के चुनिंदा 12 प्वाइंट्स पर और ट्रैफिक पुलिस के आग्रह पर 2015 में नगर काउंसिल जीरकपुर ने विभिन्न चौराहों व फ्लाईओवर पर ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगावाए थे। कैमरे लगवाते हुए उन प्वाइंट्स को विशेष रूप से चुना गया,जहां हर समय भीड़ भाड़ है, ताकि किसी प्रकार की अापराधिक घटना होने पर पुलिस अपराधी तक आसानी से पहुच सके, लेकिन अब शहर में लगाए गए 12 सीसीटीवी में से एक भी कैमरा वर्किंग नहीं है।
  
  
जिक्रयोग है कि सीसीटीवी कैमरे महज शोपीस बनकर रह गए है कैमरे काम करते तो ट्रैफिक पुलिस अपने कंट्रोल रूम से उस जगह समय पर पहुंचती, जहां ट्रैफिक किसी एक्सीडेंट और अन्य कारणों से रूक जाता है। जीरकपुर में चंडीगढ़-अंबाला रोड, जीरकपुर- पंचकूला रोड और पटियाला रोड तीनों ही एरिया में सड़क हादसों में कई युवाओं की जानें चली गई। सड़क हादसे में जान जाने के बाद उनके परिवारों को इस बात का गहरा धक्का लगता है कि टक्कर मारने वाली गाड़ियां मौके से फरार हो जाती हैं। उन गाड़ियों के नंबर के बारे में पुलिस को पता ही नहीं चलता है। इसलिए टक्कर मारने वाले आरोपी ड्राइवर किसी की जान लेकर आसानी से बच जाते हैं। 
 
जितने ट्रैफिक इंचार्ज आए, सबने कैमरे ठीक करवाने को लिखा: 
पिछले दो सालों में अब तक 5 ट्रैफिक इंचार्ज जीरकपुर की कुर्सी पर बैठ चुके हैं। इन सब ने खराब सीसीटीवी कैमरा ठीक करवाने के लिए नगर काउंसिल के ईओ को करीब 13 बार पत्र लिखे हैं। इससे पहले रह चुके ट्रैफिक इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर मनफूल सिंह जो इस समय  बलौंगी थाना प्रभारी बनाया तैनात है ने बताया कि वह करीब 6 महीने तक जीरकपुर में इंचार्ज रहे। इस दौरान उन्होंने 6 बार बंद कैमरों को ठीक करवाने के लिए पत्र भेजे, लेकिन एक का भी जवाब नहीं आया और न कैमरे ठीक करवाए गए। इन सभी की कॉपीज अभी भी ट्रैफिक पुलिस के कंट्रोल रूम जीरकपुर में रिकाॅर्ड के रूप में रखी हुई है। उससे पहले भी करीब 7 बार दूसरे ट्रैफिक इंचार्जों ने लेटर लिखे।  
बताया गया कि सबसे पहले दो कैमरे खराब हुए थे। यह काफी समय तक खराब रहे। उसको ठीक करवाने के लिए नगर काउंसिल को पत्र लिखा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। उसके बाद एक के बाद एक सारे कैमरे खराब होेते चले गए और किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया।  
बस अड्डे में बनाया गया था कंट्रोल रूम, ट्रैफिक पुलिस करती थी ऑपरेट: बताया गया कि नगर काउंसिल ने 15 लाख की कीमत से जो 12 प्वाइंट्स पर कैमरे लगाए थे, उनका सीधा लिंक बस अड्डे में बने ट्रेफिन इंचार्ज रूम से करवाया गया था। जीरकपुर बस अड्डे के एक रूम में कंट्रोल रूम व स्क्रीन लगाई गई थी, जहां से ट्रैफिक पुलिस कैमरों से सारी गतिविधियों पर  नजर रखती थी। यही नहीं शहर में कोई वारदात होते ही संबंधित थाना पुलिस भी इस कंट्रोल का फायदा उठाती थी लेकिन अब करीब डेढ़ साल से यह सारे कैमरे बंद पड़े हैं अौर शोपीस बनकर पोल्स पर टंगे हुए हैं।  
ईओ से कैमरे ठीक करवाने के लिए मीटिंग करूंगा:
नए तैनात ट्रैफिक इंचार्ज भूपिंदर सिंह से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनको जॉइन किए कुछ ही दिन हुए हैं और उनको भी यह बात पता चली है कि शहर का एक भी सीसीटीवी कैमरा काम नहीं करता। उनके स्टाफ ने यह भी बताया कि कई बार पहले इंचार्ज लिख चुके हैं। अब वह खुद ईओ नगर काउंसिल गिरीश वर्मा से जाकर मिलेंगे। ईओ गिरीश वर्मा का कहना है कि फ्लाईओवर को छोडकर बाकी 8 सीसीटीवी कैमरे काउंसिल ने लगवाए हैं। मेरी नॉलेज में नहीं था, लेकिन अब नगर काउंसिल की हाउस की बैठक में इसपर चर्चा कर एस्टिमेट बनवाकर सारे बंद कैमरों को ठीक करवा दिया जाएगा। 
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