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पंजाब

देसी गायों की नस्ल सुधार हेतु बनेगा सैंटर ऑफ एक्सीलेंस: सिद्धू

January 11, 2019 12:01 PM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
पंजाब में आधुनिक प्रौद्यौगिकी के साथ देसी गायों के नस्ल सुधार और रख-रखाव के लिए लगभग 35 करोड़ रुपए की लागत से ‘सैंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जायेगा जिसमें ब्राजील की आधुनिक प्रौद्यौगिकी का सहयोग लिया जायेगा। इस बात का खुलासा पशु पालन, मछली पालन और डेयरी विकास मंत्री पंजाब बलबीर सिंह सिद्धू ने यहाँ ब्राजील के नुमायंदों के साथ हुई मीटिंग के दौरान किया।
पशु पालन मंत्री ने बताया कि इस मीटिंग का मुख्य मंतव्य आधुनिक प्रौद्यौगिकी के साथ देसी नस्लों का सुधार करना और पैदावार को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि फ़सली विभिन्नता प्रोग्राम के अधीन पशु पालन और डेयरी फार्मिंग के पेशों के साथ किसानों को जोडऩे के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं जिससे किसानों की आय में पक्के तौर पर विस्तार किया जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा देश में 5 सैंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किये जा रहे हैं जिनमें से एक केंद्र पंजाब में स्थापित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यह केंद्र जहाँ देसी गायों की नस्ल सुधार के लिए लाभप्रद होगा वहीं इस केंद्र में नवीनतम प्रौद्यौगिकी के द्वारा ब्रीडिंग, आई.वी.एफ, (इन विटओ फर्टीलाईजेशन), सैक्स सोरटड सीमन का उत्पादन और माहिरों द्वारा स्टाफ को आधुनिक तकनीकों और विधियों संबंधी प्रशिक्षण दिया जायगा।
ब्राजील के पारा राज्य के कृषि और पशु पालन मंत्री टारकिस्यू डी क्रुज मैसकिटा ने कहा कि सैंटर ऑफ एक्सीलेंस कलसी उत्तराखंड और केंद्रीय कृषि यूनिवर्सिटी, कृषि विज्ञान केन्द्रों मोतिहारी में ब्राजील के पशु पालन के क्षेत्र माहिरों के सहयोग से स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि ब्राजील में भारत की देसी गायों गीर, कनकरेज, लाल सिंधी और ओनगेल नस्ल की गायों का आयात किया गया जिसके उपरांत इन नस्लों में सुधार किया गया और अब गीर 86 लीटर दूध प्रति दिन, कनकरेज 60 लीटर, लाल सिंधी 50 लीटर और ओनगेल नस्ल 41 लीटर दूध दे रही है। जो यहाँ मौजूद नस्लों की अपेक्षा कहीं ज़्यादा है।
डायरैक्टर, बोफैलो, रिर्सच एंड डिवैल्पमैंट एमबरापा इस्टर्न एमाज़ोन बिलिम, डा.जोस रिबामर फिलायप मोरकीस ने बताया कि आई.वी.एफ. प्रौद्यौगिकी में ब्राजील विश्व में सबसे अग्रणी देश है और आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से दूध उत्पाद को भी कई गुणा बढ़ाकर पैदावार की जा रही है। उन्होंने कहा कि हम राज्य के नीली रावी और मुर्हा नस्ल के सीमन स्टरा का प्रयोग ब्राज़ील के खोज केन्द्रों में करेंगे।
पशु वैज्ञानिक, उबेराबा, मीन्स गिरेस डा. झोस ओटाव्यो लिमोस ने कहा कि ब्राजील द्वारा विकसित की गई जीनोमिक चिप भारत की देसी नस्ल की गायों के लिए लाभप्रद साबित होगी इसका प्रयोग भारत के 4 एक्सीलेंस केन्द्रों में किया जा रहा है।

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