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हरियाणा

अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेला: कर्नाटक के हलवे ने घोली मिठास

February 02, 2019 08:28 PM

फरीदाबाद, फेस2न्यूज
33वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में इस बार कर्नाटक का खास हलवा जमकर अपनी मिठास बिखेर रहा है। आम हलवे की तरह ही यह भी आटे व घी से बना है लेकिन है पूरी तरह से ठोस। इस हलवे की खासियत यह है कि एक बार तैयार होने के बाद तीन महीने तक इसके स्वाद में कोई फर्क नहीं पड़ता और न ही खराब होता है। सूरजकुंड मेले में मुख्य इंट्री गेट के पास ही स्थित है महाराष्ट्र की राजधानी बैंगलोर के रहने वाले गोपी का स्टॉल। गोपी की कई पीढिय़ां बैंगलोर के लालबाग क्षेत्र में अपने इस हलवे की दुकान चलाती आ रही हैं। इनका हलवा बनाने का अपना अलग ही अंदाज है और गोपीराम बताते हैं कि हम प्रतिदिन लालबाग बैंगलोर स्थित अपनी दुकान पर एक से डेढ़ लाख रुपये तक का हलवा बेच देते हैं। बैंगलोर आने पर लोग उनके कोर्ज कॉफी एंड स्पाइस में हलवा न खाएं तो ऐसा हो ही नहीं सकता।
कन्नड़ बोलने वाले गोपीराम दुभाषिए के माध्यम से बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने यह हलवा बनाना शुरू किया था। इस हलवे को वह देसी घी व आटे के साथ तैयार करते हैं और ठोस रूप में इसके पीस तैयार होते हैं। एस पीस पांच से दस किलो तक का होता है। उन्होंने बताया कि बड़े-बड़े नेता व अभिनेता उनके हलवे के दीवाने रहे हैं। इस हलवे का स्वाद बढ़ाने के लिए वह सूखे मेवों का प्रयोग भी खूब करते हैं।
स्टाल पर हलवा की महक से पहुंची दिल्ली के रोहिणी निवासी छात्रा श्रुति ने बताया कि उन्होंने पहली बार इतना स्वादिष्ट हलवा खाया है। घर में या किसी कार्यक्रम में उन्होंने जो हलवा खाया है उसमें घी तैरता रहता है और यह हलवा एक या दो दिन में खराब हो जाता है। कमला नगर दिल्ली की सुरभी भी इस हलवे की दीवानी दिखी। पहले तो उन्होंने एस टुकड़़ा लेकर चखा और उसके बाद वह घरवालों के लिए भी हलवा लेकर जाना नहीं भूली। सुरभि ने बताया कि इस बार सूरजकुंड मेले को खास बनाने में सरकार की तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। उन्होंने बताया कि वह पहली बार सूरजकुंड मेले में आई हैं यहां के अलग-अलग रंग देखकर वह खुश हैं।
विभिन्न प्रांतों के अलग अलग व्यंजनों का लुत्फ
लोगों ने परिवार सहित जमकर खरीदारी व भारत के विभिन्न प्रांतों के अलग अलग व्यंजनों का लुत्फ उठाया। किसी ने दिल्ली की चटपटी चाट का मजा लिया तो किसी ने गोहाना की जलेबी व छोले भठूरे भाए। विभिन्न कॉलेजों व स्कूलों के छात्रों के साथ हजारों लोगों ने भी राजस्थानी, मद्रासी, बॉम्बे भेलपूरी, पंजाबी तडक़ा दाल, बाजरे की रोटी, सरसों का साग, लस्सी, दिल्ली का मशहूर नॉन कोरमा व गुजराती कड़ी का जायका चखा। इसके अलावा अलग अलग राज्यों के पेय प्रदार्थ, आचार, पापड़, कुल्फी, आइसक्रीम, राजस्थानी चाय, ढोकला, सांबर बड़ा, और भी अनेकों व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे और इन स्टालों पर जमकर भीड़ उमड़ी।
दिल्ली के करोलबाग से बच्चों सहित मेले में पहुंचे दंपति अरूण व रेखा ने बताया कि सूरजकुंड मेले की यात्रा करके हमे बड़ा आंनद मिला। एक ही स्थान पर देश की संस्कृति से जुडें़ इतने सारे व्यंजन मिलने से बच्चें बहुत खुश हुए। उन्होंने कहा कि उन्हे अगले साल का बेसब्री से इंतजार रहेगा। फरीदाबाद के कमल, रोहतक से पहुंचे रघुबीर, ज्ञान सिंह, रामकुमार, गुरुग्राम की निशा, अतुल, राहुल, प्रियंका आदि ने कहा कि सूरजकुंड मेला हम युवाओं के लिए अपनी सभ्यता व पंरपराओं से अवगत करवाता है। भारत से विभिन्न राज्यों के व्यंजनों का स्वाद, क्या कहें मजा आ गया।

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