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हरियाणा

सूरजकुंड मेले के आगंतुकों का अनोखे विचार के साथ स्वागत

February 07, 2019 04:49 PM

चंडीगढ़, फेस2न्यूज:
फरीदाबाद में अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले के आगंतुकों का हरियाणा के ‘अपना घर’ में एक अनोखे विचार के साथ स्वागत किया जा रहा है।
यह ‘अपना घर’ हरियाणा की पारंपरिक जीवनशैली को दर्शाता है। राज्य से जुड़े मेहराबों के साथ वास्तुकला, खुले बरामदे और कमरे एक हरियाणवी घर के असली ग्रामीण प्रदर्शित को दर्शाते हैं।
अंदर की सजावट एक ग्रामीण डिजाइन है, जिसमें एक विशाल चारपाई, कृषि उपकरण, कपड़े आदि हैं। आगंतुक बहुत विस्मय और आश्चर्य से उस जगह को घेरते हैं। आगंतुक विभिन्न कलाकृतियों के साथ तस्वीरें लेते हैं और अपना घर में पारंपरिक शिल्पकारों के साथ बातचीत करते हैं।
डॉ० महा सिंह पूनिया, क्यूरेटर धरोहर संग्रहालय, ने उत्साहपूर्वक कहा कि हमने ग्रामीण हरियाणा की सच्ची विरासत और जीवनशैली को लोगों तक पहुंचाने के लिए अपने स्तर पर पूरी कोशिश की है। लोग यहां आते हैं और जानकारी लेते हैं और हरियाणा राज्य के इस आकर्षक जीवन की तस्वीरें लेते हैं। वेशभूषा, मिट्टी के बरतन, धातु के बर्तन से लेकर कृषि उपकरण तक, हरियाणा में ‘अपना घर’ के हर कोने में प्रदर्शित हैं। हमने सूरजकुंड मेला के दौरान एक फैशन शो भी आयोजन किया, जिसमें हरियाणा की वेशभूषा दिखाई गई और हर एक को बहुत पसंद आई।
हरियाणा के श्री मुथु खान अपना घर’ में अपने पारंपरिक करघे के साथ एक लाइव प्रदर्शन भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह और उनका समुदाय हथकरघा का विशेषज्ञ है और बिस्तर की चादर और हल्की रजाई बनाने में माहिर है।
इसी प्रकार थीम राज्य-महाराष्ट्र ने एक पारंपरिक मराठी घर बनाया है, जोकि वांडा और रहने वाले क्षेत्रों और कमरों के साथ वास्तुकला की पारंपरिक शैली प्रस्तुत करता है।
महाराष्ट्र के लोक कलाकार बरामदे में बैठते हैं और वि_ल भगवान की स्तुति में गाए गए भजनों से श्रोताओं का अभिवादन करते हैं। लोक कलाकार श्री चितमणि का कहना है कि वह और उनके साथी कलाकार शोलापुर, महाराष्ट्र से आए हैं और ताल, वीणा और हारमोनियम जैसे वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल करते हैं। यह एक पुरानी कला है जो हमें उनके पूर्वजों से विरासत में मिली है।
सांस्कृतिक संध्या में कल शाम राजस्थान राज्य से आए दर्शकों ने शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां मंत्रमुग्ध कर रही थीं। कच्छी घोड़ी, चरीनृत्य, चरखीनृत्य, कालबेली और मयूर नृत्य जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों ने दर्शकों को रेत की भूमि से एक रंगीन और सांस्कृतिक अनुभव दिया।
लोक गायकों ने अपने पारंपरिक गीतों जैसे आओ मेरे देश के साथ कई दिल जीते, बॉलीवुड नंबरों के राजस्थानी गायन के साथ, समूह द्वारा पावर पैक प्रदर्शन को हर गीत के बाद तालियों की गडग़ड़ाहट के साथ स्वागत किया गया।

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