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पंजाब

जीरकपुर में पुलिस मुकाबले में मारे गए गैंगस्टर अंकित भादू का सख्त सुरक्षा प्रबंधों के बीच अंतिम संस्कार, चार गोलियाँ लगने से हुई थी मौत

February 09, 2019 09:11 PM

डेराबस्सी, जेएस कलेर   

आरगनाईज़ड क्राइम कंट्रोल यूनिट (ओकू) की ओर से ज़ीरकपुर के पीरमुछल्ला क्षेत्र में पुलिस मुकाबले में मारे गए गैंगस्टर अंकित भादू की लाश आज डेराबस्सी सिवल हस्पताल से पोस्टमार्टम करवाने बाद में परिजनों के हवाले कर दी। डाक्टरों के तीन सदस्यीय बोर्ड की ओर से उसका पोस्टमार्टम किया गया जिसकी बाकायदा वीडीओग्राफी करवाई गई। अंकित भादू के परिवार में से उसकी लाश लेने के लिए उसका चाचा, परिवार में से दादा और गाँव से उसका एक दोस्त पहुँचा था।   देर शाम अंकित का अंतिम संस्कार अबोहर में उसके गांव में सख्त सुरक्षा के बीच कर दिया गया

-परिवार ने सरेंडर करने के बावजूद झूठे पुलिस मुकाबला कर मारने का लगाया आरोप

मृतक के चाचा बिन्दर और दादा जसवंत सिंह ने पत्रकारों के साथ बातचीत करते आरोप लगाया कि उनका भतीजा सरेंडर करना चाहता था परन्तु पुलिस ने झूठा एनकाउंटर दिखा उसे मार दिया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस उसके दोनों साथियों को जीवित काबू कर सकती थी फिर उसे क्यों नहीं किया? उन्होंने इस पुलिस मुकाबले को पूरी तरह फ़र्ज़ी बताया। मृतक गैंगस्टर के चाचा बिन्दर ने बताया कि उसका भतीजा शुरू से अपराधी नहीं था बल्कि गाँव में उस पर एक व्यक्ति की ओर से झूठे केस दर्ज करवा दिए थे जिसके बाद में वह अपराध की दुनिया में ऐसा दाख़िल हुआ कि पलट कर वापस नहीं लौटा। 

 
  
  
  
कुख्यात गैंगस्टर अंकित भादू के शव का शनिवार को डेराबस्सी सिविल अस्पताल में पोस्टमार्टम किया गया। शरीर से केवल एक गोली बरामद की गई। भादू का शव लेने के लिए उसके गांव से सगे चाचा एवं पूर्व सरपंच रविंदर भादू मौजूदा सरपंच संदीप भादू और रिश्ते में अंकित के दादा रिटायर्ड जसवंत  सिंह बीती रात ही जीरकपुर में पहुंच गए थे। बता दें कि एन्काउंटर के बाद अंकित भादू का शव पहले ढ़कोली सिविल अस्पताल में ही पड़ा रहा । बीती रात को 12:50 पर शव को डेराबस्सी सिविल अस्पताल पहुंचा दिया गया था।

भादू के दोनों साथी जर्मनजीत और गिंदा काना को डेराबस्सी में ज्युडिशियल मैजिस्ट्रेट सोनाली सिंह की कोर्ट में पेश किया गया। वहां पुलिस ने पूछताछ के लिए दोनों आरोपियों का 10 दिन का पुलिस रिमांड मांगा जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। अब 18 फरवरी को इन आरोपियों को पूछताछ के बाद दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।  अंकित भादू को कुल छह गोेलियां लगी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि अंकित के चार गोलियाँ लगीं थी जिनमें से दो गोलियाँ उसकी छाती के आर पार हो गई और एक गोली उसके गले के नीचे हंस पर लगी जो गोली लगने साथ टूट गया। एक गोली उसके पेट में से मिली है जिस को डाक्टरों ने काफ़ी मशक्कत के साथ बाहर निकाला। पाँचवी गोली उसकी छाती को छू कर गुज़र गई। 

मृतक के चाचा बिन्दर और दादा जसवंत सिंह ने पत्रकारों के साथ बातचीत करते आरोप लगाया कि उनका भतीजा सरेंडर करना चाहता था परन्तु पुलिस ने झूठा एनकाउंटर दिखा उसे मार दिया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस उसके दोनों साथियों को जीवित काबू कर सकती थी फिर उसे क्यों नहीं किया? उन्होंने इस पुलिस मुकाबले को पूरी तरह फ़र्ज़ी बताया। मृतक गैंगस्टर के चाचा बिन्दर ने बताया कि उसका भतीजा शुरू से अपराधी नहीं था बल्कि गाँव में उस पर एक व्यक्ति की ओर से झूठे केस दर्ज करवा दिए थे जिसके बाद में वह अपराध की दुनिया में ऐसा दाख़िल हुआ कि पलट कर वापस नहीं लौटा। चाचा ने बताया कि अंकित बचपन में क्रिकेट का खिलाड़ी था और टीवी में क्रिकेट मैच देखने का शौकीन था। उसके पिता किसान हैं और वह परिवार का अकेला लड़का है जिसकी एक छोटी बहन है। चाचा ने बताया कि अंकित अपनी माता व छोटी बहन पर जान छिड़कता था। उसकी छोटी बहन का कुछ महीने पहले ही विवाह हुआ है जिसको वह बहुत प्यार करता था। उसकी बहन ने उसे विवाह से पहले अपराध की दुनिया छोड़ कर सरेंडर करने के लिए मना लिया था। इससे पहले पुलिस ने उसे झूठे एनकाउंटर कर मार दिया। परिवार ने बताया कि अंकित हनुमान का बहुत बड़ा भक्त था और लड़कियों की बहुत इज्जत करता था। पुलिस से बचने के लिए लड़की को अगवा करने बारे उन्होंने कहा कि अंकित ऐसा काम कभी नहीं कर सकता। 
गौरतलब है कि खुफिया एजेंसियां पहले ही पंजाब और दूसरे राज्यों की सरकारों को आगाह कर चुकी हैं कि पंजाब के गैंगस्टर देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन गए हैं। दरअसल पंजाब के गैंगस्टर आईएसआई के संपर्क में है जो न केवल इनको बराबर हथियार मुहैया करवाती है बल्कि नशा तस्करी में लिप्त कई गैंगस्टरों को नकली नोट और हेरोइन की सप्लाई भी करती है। पंजाब पुलिस द्वारा हाल ही गिरफ्तार किए गए बंबीहा गैंग के 11 सदस्यों से चीन में निर्मित हथियार बरामद किए गए हैं, जो इस बात का सबूत है। 
पाकिस्तान से ऑपरेट करने वाले बब्बर खालसा के नए प्रमुख वधावा सिंह पर आईएसआई लगातार पंजाब में नकली करेंसी और हेरोइन तस्करी के लिए दबाव डाल रही है। विदेशों में बैठे खालिस्तानी ग्रुप नकली करेंसी और हेरोइन की स्मगलिंग के जरिए न केवल हथियार खरीद रहे हैं बल्कि उस पैसे से पंजाब के युवाओं को लुभाने का प्रयास भी कर रहे हैं।
हाल ही चंडीगढ़ में एक एनकाउंटर के दौरान जिंदा गिरफ्तार किए गए गैंगस्टर दिलप्रीत सिंह दाहा उर्फ बाबा ने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया कि वो और भगोड़ा गैंगस्टर हरविंदर संधू उर्फ रिन्दा कई बार वधावा सिंह से बात कर चुके हैं। पंजाब पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग प्रमुख कुंवर विजय प्रताप सिंह ने माना है कि कई गैंगस्टर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में हैं, पुलिस उन पर नजर रख रही है। 
क्रिकेट खिलाड़ी को बुरी संगत ने बनाया गैंगस्टर
गैंगस्टर अंकित भादू क्रिकेट का अच्छा खिलाड़ी था, लेकिन बुरी संगत ने उसे गैंगस्टर बना दिया। गांव के नंबरदार निरपत भादू व बाब चुन्नी लाल ने बताया कि 26 वर्षीय अंकित पढऩे लिखने में होशियार था। अंकित अपने पिता का इकलोता बेटा था, उसकी एक बहन भी है। अंकित अबोहर में ही पढ़ा लिखा और यहीं वह लारेंस बिशनोई के सम्पर्क में आया और बुरी संगत का शिकार हो गया। इसके बाद उसने अपराध की दुनिया में ऐसा पांव रखा कि पीछे मुड़ कर नहीं आया। अंकित ने 5 वर्ष पूर्व अपराध की दुनिया में पांव रखा था।
सोशल मीडिया के जरिए अपराध
बीते कुछ समय से पंजाब के गैंगस्टर अपनी गतिविधियां चलाने के लिए सोशल मीडिया का खुलकर इस्तेमाल कर रहे हैं। पंजाब की जेलों में बंद बड़े गैंगस्टर अपनी आपराधिक गतिविधियों के अपडेट बकायदा अपने फेसबुक पेज पर साझा करते हैं वहीं अंकित भादू भी अपना लगातार प्रोफ़ाइल अपडेट कर रहा था। पंजाब के लगभग हर गैंगस्टर का अपना फेसबुक पेज है और कई गैंगस्टरों की फैन फॉलोइंग लाखों में है। 
जयपाल गैंग ने 30 अप्रैल 2016 को जब फाजिल्का के पूर्व गैंगस्टर और राजनेता जसविंदर सिंह रॉकी की हत्या की थी उसके बाद जयपाल ने खुद फेसबुक अपडेट के जरिए न केवल इसकी जिम्मेवारी ली थी, बल्कि भटिंडा के एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को धमकाया भी था। वहीं अंकित के एनकाउंटर के 6 मिनट बाद उसके फेसबुक प्रोफाइल में भी धमकी भरे लहजे में लिखा था मीडिया वालों सुधर जाओ झूठी खबरें न फैलाओ। 
हाल ही गिरफ्तार किए गए गैंगस्टर दिलप्रीत सिंह दाहा उर्फ बाबा ने भी पंजाबी गायक परमेश वर्मा पर हमला करने के बाद फेसबुक पर इसकी जिम्मेवारी ली थी। उसने बकायदा सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने के लिए एक एमबीए गुर्गा भी हायर किया था, जिसे मोहाली पुलिस ने गिरफ्तार किया था।  
पंजाब पुलिस ने सोशल मीडिया खासकर फेसबुक और वट्सऐप पर गैंगस्टर और अपराधियों की बढ़ती सरगर्मी को देखते हुए बाकायदा एक साइबर सेल का गठन किया है, जो इनकी गतिविधियों पर नजर रखता है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक हाल ही गिरफ्तार किए गए दर्जन से ज्यादा गैंगस्टर सोशल मीडिया पर मिले लिंक्स के जरिए ही पकड़े गए हैं।
अबोहर में किया गया अंतिम संस्कार
राजस्थान, हरियाणा व पंजाब में मोस्ट वाटेंड रहे और तीनों राज्यों की पुलिस के लिए पिछले लंबे समय से एक चुनौती बन चुके गांव शेरेवाला निवासी अंकित भादू को गत दिवस जीरकपुर में पंजाब पुलिस के जवानों ने एनकाऊंटर में मार गिराया। जिसके शव को आज कडी सुरक्षा के बीच उसके पैतृक गांव लाया गया, जहां कडी सुरक्षा व्यवस्था में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। गांव शेरेवाला निवासी करीब 25 वर्षीय अंकित भादू पिछले कुछ वर्षों से गैंगस्टर लारेंस बिश्रोई के सपर्क में आने से जुर्म की दुनिया में अपने कदम रख चुका था और आए दिन लूटपाट, हत्या, डकैती के मामले से उसने पिछले दो वर्षों से पंजाब सहित राजस्थान व हरियाणा पुलिस के नाक में दम कर रखा था। अब तक अंकित भादू पर अबोहर शहर के थानों सहित तीनों राज्यों में करीब डेढ दर्जन मामले दर्ज होने के बाद वह तीनों राज्यों की पुलिस के लिए वांछित था और वीरवार देर सांय पंजाब पुलिस की विशेष टीम ने उसे एनकाऊंटर के दौरान ढेर कर दिया। शनिवार को उसका शव गांव पहुंंचने की जैसे ही सूचना मिली एसपी विनोद चौधरी के नेतृत्व में उसके गांव शेरेवाला में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। वहीं करीब 5 बजे जैसे ही उसका शव गांव शेरेवाला पहुंचा तो उसके परिजनों में मातम छा गया और अंकित के पिता, माता व बहन सहित अन्य रिश्तेदारों का बुरा हाल था।  शादी की उम्र में जिस बेटे सेहरा बांधना था उसकी गोद में पडा शव देखकर मां का बुरा हाल था। शनिवार देर सांय गांव की शमशान भूमि में उसका कडी सुरक्षा में अंतिम संस्कार करवाया गया।
 

पुलिस चाहती तो अंकित के साथियों की भांति उसे गिरफतार कर सकती थी

अंतिम संस्कार के समय अंकित भादू के दादा जसवंत सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर पुलिस चाहती तो अंकित के साथियों की भांति उसे गिरफतार कर सकती थी। उनका कहना था कि बेशक उसका पोता गुनाहगार था और पुलिस को उस सजा देने का पूरा हक था लेकिन पुलिस को उसे इस प्रकार से मारना नहीं चाहिए था। जसवंत सिंह ने कथित आरोप लगाते हुए कहा कि जब उन्होंने पकडे गए अंकित के साथियों से मिलने की बात पुलिस से की तो पुलिस ने उनसे मिलने नहीं दिया।

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