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हिमाचल प्रदेश

लोकतांत्रिक प्रणाली का ज्ञान आज की आवश्यकता : डॉ0 बिन्दल

February 16, 2019 04:59 PM

शिमला  (विजयेन्दर  शर्मा)

हिमाचल प्रदेश विधान सभा का सत्र देखने आएएपीजी, विश्वविद्यालय शिमला के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए विधान सभा अध्यक्ष डॉ राजीव बिन्दल ने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक प्रणाली समझने में रूची लेनी चाहिए तथा देश के संघीय ढ़ाचे तथा शासन व्यवस्था का ज्ञान होना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए।

डॉ0 बिन्दल ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह अच्छा है कि आज की युवा पीढ़ी जिस तरह से विधान सभा व संसदीय सत्रों के देखने के लिए प्रेरित हो रहे है उससे यह प्रणाली सुदृढ़ होगी तथा इसका भविष्य भी उज्जवल होगा। उन्होंने कहा कि सभी युवाओं को इसका ज्ञान आज की अवश्यकता है। डॉ0 बिन्दल ने कहा कि मिडिया लोकतांत्रिक व्यवस्था का चौथा स्तम्भ है जो इस व्यवस्था की कार्यप्रणाली तथा क्रियाक्लापों को उजागर करता है।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का अविभाज्य अंग है। प्रतिपल परिवर्तित होने वाले जीवन और जगत का दर्शन पत्रकारिता द्वारा ही संभव है। परिस्थितियों के अध्ययन , चिंतन-मनन और आत्माभिव्यक्ति की प्रवृति और दूसरों का कल्याण अर्थात लोकमंगल की भावना ने ही पत्रकारिता को जन्म दिया है। पत्रकारिता जनता को समसायमिक घटनाएं वस्तुनिष्ठ तथा निष्पक्ष रूप से उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण कार्य है। सत्य की आधारशीला पर पत्रकारिता का कार्य आधारित होता है तथा जनकल्याण की भावना से जुड़कर पत्रकारिता सामाजिक परिवर्तन का साधन बन जाता है।

डॉ0 बिन्दल ने कहा कि लोकतंत्र में संसदीय गतिविधियों का सर्वाधिक महत्व है जीवन और समाज हर क्षेत्र को प्रभावित करने वाले काम संसद में होते हैं। संसद ही वह स्थान है जहां नए-नए विधि विधान बनाए जाते हैं देश की सरकार की आर्थिक गतिविधियों को दिशा दी जाती है और सत्ता में जनता की भागीदारी तय होती है यहां सरकार के कामकाज पर चर्चा होती है सत्तापक्ष जहां उसकी अच्छाईयों को गिनाता है वहीं विपक्ष उसकी कमियों को उजागर करने की कोशिश करता है जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की सक्रियता निष्क्रियता एवं योग्यता का वास्तविक आईना संसद ही होता है यही कारण है कि आमतौर पर लोगों  की रूचि इन समाचारों में होती है। उन्होंने कहा कि सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए आज नए अत्याधूनिक विद्यालयों की स्थापना करनी होगी ताकि नवीनतम तकनीक के साथ पत्रकार वास्तविकता को सार्थकता के साथ उजागर कर सकेंगे। 

छात्रों से संवाद करते हुए  डॉ0 बिन्दल ने कहा विधान सभा अध्यक्ष का दायित्व नियमों की परिधि में सत्र का संचालन करना है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधान सभा देश की  सर्वप्रथम तकनीकयुक्त, कागज रहित विधान सभा है। यह गर्व का विषय है कि आज देश की 40 विधान सभायें व विधान परिषदें हिमाचल प्रदेश के ई-विधान मॉडल का अनुकरण कर रही है। यह प्रणाली हरित क्रान्ति का द्योतक है जिसकी वजह से जहां प्रति  वर्ष हजारों वृक्ष कटने से बचेगें तथा करोडों रूपयों की बचत होगी । इसके अतिरिक्त कार्य में दक्षता व पारदर्शिता आयेगी  तथा समय की बचत होगी। डॉ0 बिन्दल ने सभी छात्रों को  अपनी ओर से शुभकामनाऐं दी तथा उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर एपीजी विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग के आचार्य एवं प्रमुख डॉ रमेश चौहान तथा वरिष्ठ पत्रकार श्री अश्वनी शर्मा भी मौजूद थे।          

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