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पंजाब

नारी शक्ति का प्रतीक -शीनू के जुनून का परिचायक है ‘चन्न मखना’

February 19, 2019 08:09 PM
चंडीगढ़ सुनीता शास्त्री।
‘चन्न मखना’ शीनू के जुनून का परिचायक है। चन्न मखना एक मधुर पंजाबी विवाह गीत है, जिसमें बहुत सारी मौज-मस्ती, संगीत और नृत्य से परिपूर्ण पारंपरिक विवाह का विवरण है। ‘इनकी मधुर आवाज़ और उसका उतार-चढ़ाव इन्हें बाकी सिंगर्स से अलग करता है । इस सिंगल गीत का निर्माण साहिल कटारिया ने कया जो इसे प्रमोट भी कर रहे हैं। गाने का टीजर यहां बीच एन ब्रियू में दिखाया गया। प्रिव्यू में गायिका शीनू के साथ इस गाने के निर्देशक प्रदीप सिंह मौजूद थे।
इस अवसर पर गीत का पोस्टर भी रिलीज किया गया। बहुत जल्द उनका पहला गाना ‘चन्न मखना’ रियाज़ प्रोडक्शंस के बैनर तले और टी-सीरीज के सहयोग से रिलीज होने जा रहा है।  इस अवसर पर गायिका शीनू ने कहा सभी का सपना सच हो सकता है, यदि कड़ी मेहनत के साथ उसे पूरा करने के लिए व्यक्ति पूरी तरह से जुट जाये। उन्होंने कहा कि 
ईश्वर ने मुझे दूसरा जीवन दिया है। विपरीत हालात के बावजूद मैं जी सकी, ताकि गायन को एक प्रोफेशन के रूप में अपना सकूं। किस्मत ने मुझे संगीतकार सुखपाल सुख से मिलाया, जिन्होंने मुझे अपने जुनून यानी गायिकी को जारी रखने के लिए प्रेरित किया। शीनू ने कहा।‘ईश्वर ने मुझे दूसरा जीवन दिया है।
विपरीत हालात के बावजूद मैं जी सकी, ताकि गायन को एक प्रोफेशन के रूप में अपना सकूं। किस्मत ने मुझे संगीतकार सुखपाल सुख से मिलाया, जिन्होंने मुझे अपने जुनून यानी गायिकी को जारी रखने के लिए प्रेरित किया। प्रदीप सिंह जी को भी धन्यवाद देना चाहती हूं, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया और प्रोजेक्ट पर कड़ी मेहनत करते हुए ‘चन्न मखना’ का वीडियो डायरेक्ट किया। मैं आज यहां नहीं होती, अगर पंजाबी मनोरंजन उद्योग के ये दोनों दिग्गज मुझे सहारा नहीं देते। ज्ञात हो कि चालीस वर्षीय शीनू पहले एक निपुण नर्तकी के रूप में जानी जाती थीं, अब वे एक ऐसी गायिका भी हैं, जिन्होंने तमाम बाधाओं का मुकाबला करते हुए, अपना पहला गाना- ‘चन्न मखना’ तैयार किया है, जो एक खुशी पैदा करने वाला पंजाबी विवाह गीत है। शीनू ने शादी से पहले एक पायलट के रूप में काम किया और निश्चित रूप से वे एक प्रतिभाशाली डांसर और गायिका थीं, 24 साल की उम्र में ही उनके डांसिंग करियर पर विराम लग गया, जब वे एक हादसे का शिकार हो गयीं। एक डांसर और गायिका के रूप में उन्होंने कई मंचों पर अपने कार्यक्रम दिये, लेकिन दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी और सिर पर गंभीर चोटें आयीं, जिससे वे कोमा में चली गयीं। वे दो महीने के बाद कोमा से बाहर आयींर्, लेकिन उनकी याददाश्त चली गयी। पति के सहयोग से ठीक हो गयीं। गहन फिजियोथेरेपी और योग के माध्यम से, उन्होंने सहारा लेकर चलना शुरू कर दिया। तभी उन्होंने गायकी का अपना जुनून फिर से पकड़ लिया। शीनू उन महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों के चलते अपना सपना त्याग दिया है। महिलाओं को शीनू जी के उदाहरण से प्रेरणा लेनी चाहिए कि कैसे समस्याओं के बावजूद अपने सपने को साकार किया जा सकता है,शीनू जी कई बार गिर चुकी हैं और इन्हें अनेक फ्रेक्चर हो चुके हैं, फिर भी वे हमेशा मजबूत रहती हैं और इनकी इच्छा शक्ति जबर्दस्त है। अपनी तमाम परेशानियों के बावजूद, उन्होंने गायन के अपने जुनून को अपना लिया है। 
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