ENGLISH HINDI Sunday, May 26, 2019
Follow us on
पंजाब

सुमेध सैनी के बयान पर आ सकता है सियासी भूकंप

February 21, 2019 07:24 PM

जेएस कलेर                                                                                                                 वर्ष 2015 के बहबल कलाँ और कोटकपूरा गोलीकांडों में विशेष जांच टीम (एसआईटी) पंजाब पुलिस के इंस्पेक्टर जनरल परमराज सिंह उमरानंगल और मोगा के पूर्व एसएसपी चरनजीत सिंह शर्मा को गिरफ़्तार कर चुकी है। इसी कारण आजकल श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी की घटनाएँ एक बार फिर चर्चा का केंद्र बनीं हुई हैं।

 बताया बहबल कलाँ में गोली चलाने के हुक्म किसने दिए थे, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर नहीं चलाईं थी गोलियां                                              उस समय पर झगड़ा कैसे शुरू हुआ और उसके बाद क्या–कुछ घटा, इसकी वीडियो क्लिपिंग सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं। तब 10 रोष व्यक्त कर रहे व्यक्ति और 40 पुलिस मुलाजिम ज़ख़्मी हुए थे। उस तनावपूर्ण स्थिति को सुधारने के करने के लिए सख़्ती का इस्तेमाल किया गया था। उस समय अधिकारी मौजूद थे और जल्द ही हालात पर काबू भी पा लिया गया था। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में बहबल कलाँ में क्या घटा था क्योंकि इस के अलग अलग तथ्य मौजूद हैं। यही सच्चाई सामने लाने के लिए जांच चल रही है।


अब मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में चल रही पंजाब सरकार के कुछ मंत्री वर्ष 2015 में उस समय के डीजीपी सुमेध सिंह सैनी व पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की गिरफ़्तारी की माँग कर रहे हैं जो शायद अब पंजाब सरकार के लिए गले की फांस बनने जा रही है। यह भी बताना जरूरी है कि प्रकाश सिंह बादल को डीजीपी से कह चुके हैं कि बताओं कहां गिरफ़्तारीदेनी है, वह तैयार हैं;
सुमेध सैनी ने तोडी चुप्पी
जब से बहबल कलाँ गोलीकांड घटा है, तब से श्री सैनी ने ने मौन धारण किया हुआ था। ‘फेस2न्यूज’ ने श्री सुमेध सैनी के साथ आज विशेष बातचीत की। पेश हैं उसी बातचीत के कुछ अंश:
सवाल: 2015 में बहबल कलाँ और कोटकपूरा में वास्तव में क्या घटा था?
जवाब: कोटकपूरा में जो कुछ भी घटा था, वह सब धीरे-धीरे थोड़ा–थोड़ा सब सामने आता जा रहा है। उस समय के ज़्यादातर विवरण तो वीडियोग्राफी में ही हैं। गोलीबारी की घटना घटने से चार घंटे पहले ही रोड जाम कर रहे लोगों को उस स्थान से दूर भेजने की कार्रवाई शुरू हो गई थी। इसलिए शहरी प्रशासन ने ख़ास बसें भेजी थीं और इस तरह उनके द्वारा बसों में भर कर वहां मौजूद संगत को हटा दिया गया था। इसी दौरान अचानक रोष कर रहीं सिख संगत और पुलिस के बीच झड़प शुरू हो गई। उस समय पर झगड़ा कैसे शुरू हुआ और उसके बाद क्या–कुछ घटा, इसकी वीडियो क्लिपिंग सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं। तब 10 रोष व्यक्त कर रहे व्यक्ति और 40 पुलिस मुलाजिम ज़ख़्मी हुए थे। उस तनावपूर्ण स्थिति को सुधारने के करने के लिए सख़्ती का इस्तेमाल किया गया था। उस समय अधिकारी मौजूद थे और जल्द ही हालात पर काबू भी पा लिया गया था। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में बहबल कलाँ में क्या घटा था क्योंकि इस के अलग अलग तथ्य मौजूद हैं। यही सच्चाई सामने लाने के लिए जांच चल रही है।
सवाल: रोष कर रहे लोगों पर गोली चलाने का आदेश किस ने दिया था?
जवाब: कोटकपूरा में बलप्रयोग के आदेश एग्जिक्युटिव मैजिस्ट्रेट ने दिए थे। बहबल कलाँ में कोई एग्जिक्युटिव मैजिस्ट्रेट मौजूद नहीं था। जब यह सब कुछ घट चुका था, मुझे उससे आधे घंटे बाद इस बारे पता लगा था।
सवाल: ऐसे आरोप हैं कि आपने उस समय के लुधियाना के पुलिस कमिशनर परमराज सिंह उमरानंगल (जो अब आईजी हैं) को भारी पुलिस बल के साथ कोटकपूरा भेजा था और उसी बल ने शांतीपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया था। कोटकपूरा में पुलिस बाहर से क्यों भेजी गई थी?
जवाब: फरीदकोट के बाहर से पुलिस बल और अधिकारी इस कारण भेजे गए थे क्योंकि ज़िला पुलिस के पास पुलिस बल की संख्या कम थी और वह ऐसे हालात के साथ निपटने के समर्थ नहीं थे। पुलिस का काम करने का यही बुनियादी ढंग है। वहाँ श्री उमरानंगल और अन्य आधिकारियों के साथ साथ एडीशनल डिप्टी जनरल आफ पुलिस और ज़ोनल आईजी भी मौजूद थे। अब यह दावे किये जा रहे हैं और आरोप लगाऐ जा रहे हैं कि ज़िले से बाहर से फोर्स प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के लिए भेजी गई थी। इस मामले में मेरा सिर्फ़ इतना ही कहना है कि ऐसे आरोप लगाने से पहले इस बात की अच्छी तरह जांच कर ली जाये कि क्या इस तरह किसी अपेक्षित जगह पर पुलिस बल भेजने जनहित में है या नहीं।
सवाल: यह आरोप भी लगा है कि बहबल कलाँ में हुई दो मौतों के लिए ज़िम्मेदारी तय करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
जवाब: वह घटना घटने के तुरंत बाद घायल प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मचारियों की देखभाल करने और उनको अस्पताल पहुँचाने की हिदायत जारी की गई थीं। बाद में जब मुझे पता लगा दो व्यक्ति मारे भी गए हैं ; तब इस मामले की जांच के लिए तुरंत एडीजीपी (क्राइम) आईपीएस सहोता अधीन एक ‘विशेष जांच टीम ’ (एसआईटी) बनाई गई थी। मेरी सेवा–निवृत्त से पहले कत्ल का केस भी दर्ज कर लिया गया था। परन्तु मैंने कभी किसी के मुँह से उन 40 पुलिस कर्मचारियों के लिए हमदर्दी का कोई एक शब्द नहीं सुना, जो घायल हुए थे और उनमें से बहुत से गंभीर रूप में घायल थे।
सवाल: ऐसे आरोप हैं कि आप और उस समय के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने रात को 2:00 बजे बातचीत की थी और आपने उमरानंगल को कई बार गोली चलाने के आदेश दिए थे।
जवाब: मैंने न केवल मुख्यमंत्री और उमरानंगल के साथ बात की थी, बल्कि मैंने उसी रात कानून और व्यवस्था के एडीजीपी, ज़ोनल आईजी और अन्य आधिकारियों के साथ भी बातचीत की थी। क्या एक मुख्यमंत्री और डीजीपी को रात को बात करने की इजाजत नहीं है, वह भी उस समय पर, जब कोई समस्या सामने खड़ी हो? मुख्यमंत्री को क्या करना चाहिए था? मुझे क्या करना चाहिए था, जब कानून और व्यवस्था का मसला हो? क्या मैं अपना फ़ोन बंद कर कर बैठ जाता? वहाँ जो कुछ भी घटा उसकी वीडियो मौजूद है। शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी का तो कोई सवाल कहाँ है?
सवाल: क्या आपको लगता है कि सरकार बादलों को और आपको निशाना बना रही है? क्या ऐसा इस कारण तो नहीं की मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के साथ आपके सम्बन्ध अच्छे नहीं हैं?
जवाब: मैं नेताओं की ओर से की जा रही अरोपबाजी में नहीं पड़ूँगा। लोगों को जैसे लगता है कि गोलीबारी के लिए नेता ही ज़िम्मेदार होंगे और नेता ही एक–दूसरे पर अरोपबाजी कर रहे हैं। एक ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना का राजनीतिकरण किया जा रहा है, जिसमें दो व्यक्तियों की मौत हुई है। यह करना बहुत गलत है और ऐसीं बातें से परहेज करना चाहिए था। उस घटना का सत्य सामने लाने की जगह अब इसे व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए एक औज़ार के तौर पर प्रयोग किया जा रहा है। मार्च 2017 में सरकार बदलने से एक साल बाद तक तो कुछ नहीं किया गया। फिर अचानक ही रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह कमीशन की रिपोर्ट पेश होते ही नेताओं ने सभी तथ्य तोड़ने–मरोड़ने शुरू कर दिए। जब यह रिपोर्ट सार्वजनिक हुई, तब कोई भी विशेष जांच टीम नहीं बनी थी और जांच भी शुरू नहीं हुई थी परन्तु राजनैतिक नेताओं ने अपने अपने नतीजे निकाल भी लिए थे। क्या सत्य को सामने लाने और पीड़ितों को इंसाफ़ दिलाने की कोई मंशा है भी या नहीं।
सवाल: परन्तु कोटकपूरा की विडीयोज़ में गोलियाँ चलने की आवाजें तो सुनाई दे रही हैं।
जवाब: वह वीडियो आपको अपने आप जवाब देगी कि वह घटना शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाने की थी। फ़र्ज़ी ढंग के साथ इस तरह यह कह देना कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाईं –यह नैतिक तौर पर बिल्कुल गलत है और यह राज्य के हित में भी नहीं है। अब यही सिद्ध करने के प्रयास किये जा रहे हैं कि प्रदर्शनकारी बिल्कुल शांत थे। क्या ज़िम्मेदार नेताओं को ऐसा व्यवहार करना चाहिए?
सवाल: क्या आपका इशारा मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह की तरफ है?
जवाब: इस बारे नतीजे अपने आप निकाले जाएंगे।

सवाल: क्या लुधियाना सिटी सैंटर घोटाले में आपने जानबूझकर अपनी नयी पटीशन दायर की थी कि जिससे मुख्यमंत्री पर दबाव डाला जा सके? कुछ लोगों का कहना है कि आपके पास बहुत बड़ी बड़ी हस्तियाँ को फंसाने की बहुत सारी सामग्री मौजूद है।
जवाब: लुधियाना सीटी सैंटर एक अलग मामला है। सरकारी खजाने को 1,500 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान पहुँचा है और एक पेंडिंग पड़े मामले को बंद और रद्द करवाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। यह ग़ैर–कानून्नी भी है और नैतिक तौर पर गलत भी है। जहाँ तक यह बड़ी हस्तियों वाली बात है, इसके लिए आग्रह है कि आप यह प्रश्न इस इंटरव्यू में से निकाल दें।
सवाल: आप उमरानंगल की गिरफ़्तारी को सियसत से प्रेरित क्यों मानते हो?
जवाब: यह और क्या है? उसकी गिरफ़्तारी की माँग तो यह जांच शुरू होने से पहले ही उठने लग गई थी। तब तो यह भी फ़ैसला नहीं था हुआ कि इस मामलो की जांच सीबीआई करेगी या एसआईटी?

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
और पंजाब ख़बरें