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पंजाब

पटियाला: फिर शाही चुनौती से टक्कर लेने को तैयार सांसद धर्मवीर गांधी

March 13, 2019 05:58 PM

जेएस कलेर की विशेष रिपोर्ट

जीरकपुर: 9 विधानसभा क्षेत्रों में फैले पटियाला संसदीय सीट पर 1999 से ही कांग्रेस का कब्जा रहा था जिसमें विधानसभा क्षेत्र डेराबस्सी निर्णायक भूमिका अदा करता आया है, जो पहले बनूड़ विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था। आजादी के बाद 1952 से यहां जीत का झंडा गाड़ रही कांग्रेस को पहली बार 1977 में अकाली दल से मुंह की खानी पड़ी थी। इसके बाद 1984 में अकाली दल और 1989 में निर्दलीय के खाते में यह सीट गई। 1998, 1999 में शिरोमणि अकाली दल ने यहां जीत का परचम लहराया और 2014 चुनावों में इस सीट पर उस समय बनी नई राजनैतिक पार्टी आम आदमी पार्टी ने बड़ा उलटफेर करते हुए धर्मवीर गांधी को इस लोकसभा सीट से विजयी बनाकर संसद में भेजा।

Praneet Kaur
 
Dharamvir Gandhi
 
1952 से अब तक पटियाला लोकसभा सीट पर 16 बार चुनाव हुए, जिसमें 10 बार कांग्रेस, चार बार शिअद और एक बार निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं। 1977 तक यहां कांग्रेस का ही दबदबा रहा। 1977 में शिअद के गुरचरन सिंह सिंह टोहड़ा ने कांग्रेस के प्रभुत्व को खत्म किया। मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र होने के कारण यहां की राजनीति हमेशा हाई वोल्टेज रहती है। ज्यादातर लोग नौकरीपेशा हैं या बिजनेस से जुड़े। इस समय संसद में इस हलके की नुमाइंदगी डा. धर्मवीर गांधी कर रहे हैं ; इसलिए अगर यह कहा जाये कि डा. गांधी आनेवाले लोकसभा चुनावों में एक तरह शाही चुनौती और सरकारी मशीनरी का सामना करने को तैयार हैं;
पटियाला लोकसभा हलके में शहरी और देहाती वोटरों का मिश्रण है। इस संसदीय हलके में नौ विधान सभा हलके आते हैं। इस अधीन आता डेराबस्सी विधान सभा हलका चाहे कांग्रेस का गढ़ है परन्तु फिर भी यहाँ के वोटर हैरानीजनक ढंग के साथ अपनी मर्ज़ी भी कर जाते हैं। हालांकि इस समय इस विधानसभा हल्के में शिरोमणि अकाली दल से एन के शर्मा बतौर विधायक नुमाइंदगी कर रहे हैं और उनकी इस विधानसभा क्षेत्र में मजबूत पकड़ है। इस हलके में 2014 में आम आदमी पार्टी के डा. धर्मवीर गांधी ने कांग्रेस के परनीत कौर को 20,942 वोटों के साथ हराया था। इससे पहले साल 2009 दौरान श्रीमती परनीत कौर ने शिरोमणि अकाली दल के प्रेम सिंह चन्दूमाजरा को 97,389 वोटों के फ़र्क के साथ हराया था। 68 वर्षीय डा. धर्मवीर गांधी बाकायदा क्वालिफाईड़ डाक्टर हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता एम.बी.बी.एस, एम.डी है। वह निलंबन से पहले वह लोकसभा में आम आदमी पार्टी के नेता थे। परन्तु उनको कथित पार्टी–विरोधी गतिविधियों कारण पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया था। सस्पेंशन के बावजूद डा. गांधी ने लोक मसले उठाने कभी बंद नहीं किये। डा. गांधी बहस में सक्रियता के साथ भाग लेते हैं। उन्होंने राजपुरा–बठिंडा रेलवे लाईन डबल लेन करने और इसके बिजलीकरण किये जाने की माँग उठाई थी। इसके इलावा उन्होंने हलके में एक पासपोर्ट सेवा केंद्र स्थापित किया था। उन्होंने पानी की बाँट और चंडीगढ़ पंजाब को दिए जाने जैसे मुद्दे भी संसद में उठाए हैं।

मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 से अब तक 543 में से केवल 35 लोकसभा सांसदों की निधि से चल रहे प्रोजेक्ट पूरे किए गए। हर प्रोजेक्ट के लिए 25 करोड़ रुपए जारी किए गए थे जिनमें से पंजाब के 3 सांसदों में से एक नाम डॉक्टर धर्मवीर गांधी का भी है जिन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र में पूरे 25 करोड़ रुपए खर्च किए हैं जिसमे से 14 करोड़ के लगभग केवल स्कूलों के उत्थान के लिए दिए गए फंड्स है। वहीं चुनावों की तारीखें घोषित होने के बाद भी अभी तक कांग्रेस से परनीत कौर, अकाली दल से सुरजीत सिंह रखड़ा के नामों का कयास लगाया जा रहें है वहीं आम आदमी पार्टी अभी तक कुछ भी तय करने की स्थिति में नहीं है जबकि डॉ. गांधी पहले ही सभी को चुनौती देकर फ्रंट फुट पर हैं।

उन्होंने सात निजी बिल भी पेश किये थे ; जिनमें सिख मैरिज एक्ट, किसानों और खेत मज़दूरों के संकट और एन.आर.आई विवाहों के साथ सम्बन्धित समस्याएँ शामिल थीं। डा. धर्मवीर गांधी शिक्षित हैं, जिस कारण वह कभी भी तहज़ीब नहीं भूलते। इसीलिए जब भी कभी वह अपने सहायक की ओर से टाईप किया कोई प्रैस–नोट तैयार करते हैं, तो वहाँ अगर कभी अपने विरोधी उम्मीदवार परनीत कौर का नाम प्रैस–नोट में आता है, तो अपने सहायक को इस तरह समझाते हैं –‘परनीत कौर के नाम के आगे श्रीमती लगाओ, हमने तहज़ीब और मर्यादा नहीं छोड़नी।’
दिल के रोगों के माहिर डा. धर्मवीर गांधी विचारधारा से समाजवादी हैं। वह आम आदमी का चेहरा थे लेकिन अब उन्होंने आप से किनारे करते हुए अब पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस से इस संसदीय सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। वह अपनी पार्टी से बग़ावत कर चुके हैं परन्तु आम लोगों का साथ उन्होंने कभी भी नहीं छोड़ा। 1975 में इमरजंसी के समय उन्होंने डटकर स्टैंड लिया था और 1980 के दौरान आतंकवाद के दौर के समय में भी दृढ़तापूर्वक अपने स्टैंड पर कायम रहे थे। साल 2014 में जब डा. गांधी ने तीन बार एम.पी रह चुकी और केंद्रीय विदेश राज मंत्री रहीं परनीत कौर को हराया था, तब सब बहुत हैरान हुए थे क्योंकि ऐसा कोई सोच भी नहीं सकता था कि कभी पटियाला के कांग्रेसी खुंटे को कोई तोड़ भी सकेगा। डा. धर्मवीर गांधी आज़ाद–ख्याल के मालिक हैं और किताबें पढ़ने के शौकीन हैं। उनका मानना है कि आम आदमी का एजेंडा ही राजनैतिक नेताओं की प्राथमिकता रहनी चाहिए, भारत तब ही तरक्की कर सकेगा। उनका कहना है कि वह ऐसी राजनीति के निर्माण का प्रयास कर रहे हैं। डा. गांधी ने सरकारी मैडीकल कालेज, अमृतसर से मैडीकल शिक्षा प्राप्त की है। वह सदा अपने हरेक मरीज़ के साथ जज़्बाती तौर पर जुड़ जाते हैं। इसीलिए लोग उन को ‘जनता का डाक्टर ’ भी कहते हैं। परन्तु राजनीति एक अलग किस्म की खेल है ; इसीलिए राजनीति में उनका उभार जितनी जल्दी हुआ था, उतनी ही जल्दी वह नीचे भी आ गए। 2014 में अरविन्द केजरीवाल डा. धर्मवीर गांधी की ऐसी शैली से इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने तुरंत उनको लोकसभा में आम आदमी पार्टी का नेता बना दिया था। फिर जब प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जैसे नेताओं को आम आदमी पार्टी में से बाहर किया गया, तब डा. गांधी ने इसका विरोध किया और उनको उसका खामियाजा भी भुगताना पड़ा। उन्हें पार्टी की प्राथमिक मैंबरशिप से ख़ारिज कर दिया गया। इतना सब होने के बावजूद डा. गांधी आम जनतक मुद्दों के साथ लगातार जुड़े रहे हैं। विदेशों में फंसे 50 भारतियों का मामला भी उन्होंने सुलझाया था। उन्होंने अपने एम.पी कोटो के फंड्स द्वारा अपने हलके के गाँवों के स्कूलों में टॉयलेट्स, पाइन के पानी के आर.ओ, बैंच आदि बनवाऐ साथ कि साथ उन्होंने डेराबस्सी विधानसभा क्षेत्र के स्कूलों की भी हर मांग पूरी की। डा. गांधी का मानना है कि कि वह किसी ख़ास व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि आम जनता के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीमती परनीत कौर चाहे काफ़ी समय विदेश राज्य मंत्री रहे परन्तु उनके राज में कोई के पासपोर्ट सेवा केंद्र नहीं खुल सका। उन्होंने कहा कि पिछले मुख्य मंत्री प्रकाश सिंह बादल और मौजूदा मुख्य मंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने राजपुरा – मोहाली रेल लिंक मुकम्मल करने में कोई मदद नहीं की। चंडीगढ़ को मालवा क्षेत्र के साथ जोड़ने वाला यह एकमात्र रूट है। पंजाब ने इस प्रोजैक्ट के लिए सिर्फ़ 78 करोड़ रुपए देने थे ; जबकि केंद्र ने इस प्रोजैक्ट के लिए 250 करोड़ रुपए जारी कर दिए थे। इस बेइंसाफी को ही उन्होंने इस बार चुनावी–मुद्दा बनाने का फ़ैसला किया है।

मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लिमेंटेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 से अब तक 543 में से केवल 35 लोकसभा सांसदों की निधि से चल रहे प्रोजेक्ट पूरे किए गए। हर प्रोजेक्ट के लिए 25 करोड़ रुपए जारी किए गए थे जिनमें से पंजाब के 3 सांसदों में से एक नाम डॉक्टर धर्मवीर गांधी का भी है जिन्होंने अपने लोकसभा क्षेत्र में पूरे 25 करोड़ रुपए खर्च किए हैं जिसमे से 14 करोड़ के लगभग केवल स्कूलों के उत्थान के लिए दिए गए फंड्स है। वहीं चुनावों की तारीखें घोषित होने के बाद भी अभी तक कांग्रेस से परनीत कौर, अकाली दल से सुरजीत सिंह रखड़ा के नामों का कयास लगाया जा रहें है वहीं आम आदमी पार्टी अभी तक कुछ भी तय करने की स्थिति में नहीं है जबकि डॉ. गांधी पहले ही सभी को चुनौती देकर फ्रंट फुट पर हैं।

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