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राष्ट्रीय

जल संवर्धन और पुलवामा कांड के कारण इस बार नहीं खेली जायेगी रंगों से होली

March 14, 2019 07:18 PM

अबोहर, फेस2न्यूज:
देश विदेश में 1100 मंदिरों व 3 अक्षरधामों की स्थापना करने वाली बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था ने इस बार होली उत्सव पर पानी का उपयोग ना करने का निर्णय लिया है। गुजरात के बोटाद जिले की तपोभूमि सारंगपुर में प्रतिवर्ष औसतन एक लाख लोग होली मनाने के लिये एकत्रित होते हैं। इसे पुष्पदोलोत्सव का नाम दिया जाता है। यह परंपरा स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक नीलकंठवर्णी भगवान स्वामीनारायण के समय से चल रही है। इस बार यह उत्सव 21 मार्च को आयोजित किया जा रहा है। जिसके लिये हजारों भारतीय व विदेशी नागरिक अग्रिम आरक्षण करवा चुके हैं।
संस्था के अंतर्राष्ट्रीय संयोजक ईश्वरचरण स्वामी ने जानकारी देते हुए कहा कि यह संस्था सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानती है। निवर्तमान अध्यात्मिक मुखिया प्रमुखस्वामी महाराज ने कच्छ के भूकंप ग्रस्त लोगों से सहानुभूति जताते हुए कई वर्ष पूर्व होली उत्सव ना मनाने का निर्देश दिया था। अब 6वें अध्यात्मिक मुखिया महंतस्वामी महाराज ने निर्देश दिया है कि गुजरात में कम वर्षा होने के कारण चल रही सूखे की स्थिति और बीते माह पुलवामा में 40 सीआरपीएफ जवानों की शहादत को देखते हुए रंगों से होली ना मनाई जाये। मूलरूप से भगवान स्वामीनारायण के समय से सारंगपुर में रंगोत्सव मनाया जाता था। परंपरा के अनुसार अध्यात्मिक मुखिया हजारों हरीभक्तों पर रिमोट से चलित पिचकारियों से रंग की वर्षा करते रहे हैं लेकिन इस बार प्रतीकात्मक रूप में पुष्प पत्तियों की वर्षा करके हरीभक्तों को आशीर्वाद दिया जायेगा।
उन्होंने बताया कि संस्था ने पुलवामा के शहीदों को सभी मंदिरों में श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद प्रभावित परिवारों को एक करोड रूपये की सहायता राशि जारी की है। अन्य साधनों से भी ऐसे परिवारों के प्रति आने वाले समय में सदभावना के रूप में अनेक कदम उठाने की प्रेरणा भी हरीभक्तों को दी जा रही है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि अन्य स्वयंसेवी संस्थाएं भी रंगों की होली मनाने से परहेज करेंगी।

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