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हरियाणा

सेना, पुलिस और प्रशासन ने दिखाया दम: सवा साल के बच्चे को 48 घंटे के बाद बोर वेल से सही सलामत निकाला

March 22, 2019 10:17 PM
हिसार, फेस2न्यूज
हिसार के गांव बालसमंद में भारतीय सेना, एनडीआरएफ, जिला प्रशासन और ग्रामीणों के आपसी समन्वय और तत्परता के चलते आखिर 48 घंटे बाद 15 महीने के मासूम नदीम को सुरक्षित बोरवेल से निकाल लिया गया। बिना रुके लगातार चले जटिल बचाव अभियान के बाद बाहर निकाले गए नदीम को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया जहां उसके स्वास्थ्य की सघन जांच की जाएगी और जरूरत के अनुसार उपचार के बाद उसके घरवालों को सौंपा जाएगा।

 नदीम को बचाने के लिए 20 मार्च की सायं जिला प्रशासन ने भारतीय सेना और एनडीआरएफ के साथ विचार-विमर्श के बाद संयुक्त बचाव अभियान शुरू करवाया। अभियान के लिए 7 जेसीबी, 8 ट्रैक्टर, सेना के वाहनों सहित जरूरत के हर उपकरण का प्रबंध किया गया जिनकी मदद से बोरवेल से लगभग 20 फुट दूर तक 52 फुट गहराई तक खुदाई की गई। इसके बाद यहां से बोरवेल तक सुरंग बनाई गई जिसके माध्यम से नदीम को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

 
अभियान के दौरान बच्चे की वास्तविक लोकेशन की पहचान करने में आ रही मुश्किल को दूर करने में एचडीडी ट्रैकर ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जो अभियान की सफलता का सूत्रधार बना।
उपायुक्त अशोक कुमार मीणा ने अभियान की सफलता के लिए भारतीय सेना, एनडीआरएफ, विभिन्न विभागों और ग्रामीणों की मेहनत तथा टीम भावना की सराहना करते हुए उन्हें अभियान की सफलता के लिए बधाई दी।
दरअसल, बुधवार 20 मार्च को होली के दिन गांव बालसमंद में 15 माह का मासूम नदीम खेतों में बने अपने घर के पास अन्य बच्चों के साथ खेलते हुए पेड़ के पास बने 54 फुट गहरे बोरवेल में गिर गया था। परिजनों द्वारा इसकी सूचना पुलिस को देने के साथ ही उपायुक्त अशोक कुमार मीणा व पुलिस अधीक्षक शिवचरण सहित प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और तुरंत भारतीय सेना और एनडीआरएफ को भी बुलाया गया। 
नदीम को बचाने के लिए 20 मार्च की सायं जिला प्रशासन ने भारतीय सेना और एनडीआरएफ के साथ विचार-विमर्श के बाद संयुक्त बचाव अभियान शुरू करवाया। अभियान के लिए 7 जेसीबी, 8 ट्रैक्टर, सेना के वाहनों सहित जरूरत के हर उपकरण का प्रबंध किया गया जिनकी मदद से बोरवेल से लगभग 20 फुट दूर तक 52 फुट गहराई तक खुदाई की गई। इसके बाद यहां से बोरवेल तक सुरंग बनाई गई जिसके माध्यम से नदीम को सुरक्षित बाहर निकाला गया। सुरंग से बोरवेल तक पहुंचने के दौरान बच्चे की वास्तविक स्थिति की पहचान करने के काम में आ रही बाधा को एचडीडी ट्रैकर से बचाव टीम बच्चे तक पहुंच पाई। अभियान के दौरान सेना, एनडीआरएफ और प्रशासनिक टीमों के कर्मचारियों व अधिकारियों ने बिना आराम किए अथवा शिफ्टों में ड्यूटी बदलते हुए काम किया और शुक्रवार को सायं 5.30 बजे नदीम को सुरंग के रास्ते बाहर निकालकर इस अभियान को सफल बनाया।
पूरे अभियान के दौरान उपायुक्त अशोक कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक शिवचरण और अतिरिक्त उपायुक्त अमरजीत सिंह मान ने अधिकतर समय घटनास्थल पर मौजूद रहकर अभियान पर नजर रखी और बचाव कार्य की गति को बनाए रखा। प्रशासन ने बचाव अभियान के लिए जरूरी हर उपकरण व अन्य सामान मुहैया करवाया। सभी विभागों ने भी अपनी-अपनी जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निवर्हन किया। आपदा प्रबंधन में सभी के आपसी सहयोग व समन्वय का यह अभियान एक सफल उदाहरण साबित हुआ।
प्रशासन ने बोरवेल में नाइट विजन कैमरा पहुंचाकर लगातार नदीम की गतिविधियों की निगरानी की। नदीम तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए जहां बोरवेल में बच्चे तक एक ऑक्सीजन पाइप पहुंचाई गई वहीं रोशनी पहुंचाने के लिए लाइट्स भी नीचे भिजवाई गईं ताकि बच्चे को सांस लेने में दिक्कत न हो और वह घबराए नहीं। इसके अलावा बीच-बीच में बिस्कुट  और फ्रुटी आदि भी नीचे भिजवाई गईं जिससे नदीम को ताकत मिलती रही। इन सभी कार्यों की निगरानी तथा नदीम तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की दो एंबुलेंस बोरवेल के पास ही तैनात की गई थीं। भारतीय सेना, एनडीआरएफ, जिला प्रशासन और ग्रामीणों के आपसी समन्वय और तत्परता के चलते 48 घंटे बाद 15 महीने के मासूम नदीम को सुरक्षित बोरवेल से निकाल लिया गया।
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