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रंगोत्सव में हुई पानी की बजाए पुष्पपत्तियों की बौछार

March 23, 2019 10:50 AM

संतों ने कहा कि बीते वर्ष में वर्षा कम होने से कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति का किसान सामना कर रहे हैं। पुलवामा में आतंकी हमले के कारण केन्द्रीय सुरक्षा बल के 40 जवान शहीद हो गए। ऐसी परिस्थिति में पानी के रंगों की होली खेलने की बजाए प्रतीकात्मक रूप में पुष्पोत्सव आयोजित किया गया। इसकी तैयारी में दस हजार स्वयं सेवक जुटे हुए थे। विदेशों से भी भारी संख्या में हरिभक्त पधारे हैं। 

अबोहर। तपोभूमि सारंगपुर में इस बार आयोजित रंगोत्सव में पानी की बजाए विशाल पिचकारियों से पुष्प पत्तियों की वर्षा की गई। वीरवार रात्रि 8 बजे तक चले इस समारोह का आयोजन बीएपीएस स्वामिनारायण संस्था द्वारा 10 लाख वर्गफुट भूमि की साफ सफाई करके किया गया। इसके लिए 4 हजार वर्गफुट मंच 40 फुट ऊंचाई पर तैयार किया गया। लगभग 50 हजार हरिभक्तों व 700 संतों की उपस्थिति में भजन कीर्तन के बाद वरिष्ठ संतों-आंनदस्वरूप स्वामी, डा. स्वामी, विवेकासागर स्वामी, ईश्वरचरण स्वामी, त्यागवल्लभ स्वामी ने आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया। 

संतों ने कहा कि बीते वर्ष में वर्षा कम होने से कई क्षेत्रों में सूखे की स्थिति का किसान सामना कर रहे हैं।

पुलवामा में आतंकी हमले के कारण केन्द्रीय सुरक्षा बल के 40 जवान शहीद हो गए। ऐसी परिस्थिति में पानी के रंगों की होली खेलने की बजाए प्रतीकात्मक रूप में पुष्पोत्सव आयोजित किया गया।इसकी तैयारी में दस हजार स्वयं सेवक जुटे हुए थे। विदेशों से भी भारी संख्या में हरिभक्त पधारे हैं। सैंकडों हरिभक्त पदयात्रा करते हुए और कई साईकल यात्रा करके समारोह में सम्मलित हुए हैं। यह उत्सव भगवान स्वामीनारायण के समय से आयोजित किया जा रहा है। 

श्री स्वामीनारायण बाल मंदिर के विद्यार्थियों व बोटाद से आए युवा कलाकारों ने सामूहिक नृत्यों से कार्यक्रम को चार चांद लगाए। सारंगपुर में संस्था के पांचवें आध्यात्मिक मुखिया, विश्ववंदनीय संत प्रमुखस्वामी जी महाराज के समाधिस्थल पर पुष्प अर्पित करने के बाद वचनामृत दिशाताब्दी को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए मंच पर महंतस्वामी जी महाराज पधारे तो वातावरण जयघोष से गूंज उठा। नारायणमुनि स्वामी ने उत्सव की महिमा पर प्रकाश डाला। महंतस्वामी जी महाराज ने जल संवर्धन का संदेश देते हुए कहा कि रंगोत्सव आध्यात्मिकता के परिवेश में मनाकर जीवन को प्रेमभाव, करूणा व परोपकार से पूर्ण बनाना चाहिए।

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